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गोरखपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति के खिलाफ वारंट जारी, छात्रों ने दर्ज कराया था मुकदमा

दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में PH.D. के छात्रों की परीक्षा नहीं होने के कारण सत्र लेट हो रहा था। इसे लेकर छात्र नाराज थे। विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया।
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गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति के खिलाफ कोर्ट ने वारंट जारी कर दिया है। कुलपति राजेश कुमार सिंह कोर्ट के आदेश के बाद भी पेश नहीं हुए थे। पीएचडी छात्रा दीप्ति राय के नेतृत्व में अन्य छात्रों ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग थी कि हमारा दाखिला 2018 में हुआ है तो परीक्षा भी उसी के अनुरूप कराई जाए।

नई शिक्षा नीति पर हो रहा था विरोध

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना था कि मेरा एडिमशन 2018 में हुआ था, इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन 2018 के ऑर्डिनेंस के अनुसार परीक्षा कराए।

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वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी परीक्षा नई शिक्षा नीति के अंतर्गत कराने पर अड़ा था। विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के प्रदर्शन को उग्र देखते हुए आनन फानन में फैसला लिया। दिसंबर 2021 में परीक्षा की तिथियां घोषित कर दी गई थीं और छात्रों का आंदोलन समाप्त हो गया।

17 विद्यार्थियों के खिलाफ दर्ज हुआ था मुकदमा

7 जनवरी 2022 को पहले पेपर के दिन छात्र जब परीक्षा देने पहुंचे तो पेपर देखकर हैरान हो गए। पेपर में पूछे गए सवाल नई शिक्षा नीति पर थे। इसके बाद छात्रों ने कॉपियां और पेपर को फाड़कर फेंक दिया और विरोध करने लगे।

विश्वविद्यालय प्रशासन मे छात्रों पर पेपर और कांपियां फाड़ने और परीक्षा में बाधा पहुंचाने का आरोप लगाया। इसके बाद 17 विद्यार्थियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। उन्हें विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया।

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