
योगी सेना की बगावत एक बार फिर सुर्खियों में है। योगी आदित्यनाथ की सबसे बड़ी ताकत हिंदू युवा वाहिनी में बिखराव शुरू हो चुका है। विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ से बगावत कर चुनाव लड़ने का ऐलान करने वाले हिंदू युवा वाहिनी के बागियों ने हिंदू युवा वाहिनी भारत का गठन कर लिया है। हिंदू युवा वाहिनी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह को इस नए संगठन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है।
हिंदू युवा वाहिनी का गठन करने के बाद नए राष्ट्रीय अध्यक्ष ने ऐलान किया कि गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ही इस संगठन के भी संरक्षक रहेंगे।
दरअसल, प्रदेश की राजधानी स्थित वीवीआईपी गेस्ट हाउस में दर्जनों हिंदूवादी नेताओं ने बैठक की। इस बैठक प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए कार्यकर्ता मौजूद रहे। बैठक में हिंदू युवा वाहिनी के गठन का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। इसके बाद सर्वसम्मति से सुनील सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के प्रस्ताव पर मुहर लगाया गया।
नए अध्यक्ष सुनील सिंह ने कहा कि हिंदूवादी विचारों वाली सरकारों का गठन तो हो रहा है लेकिन यह लक्ष्य प्राप्ति नहीं है। सत्ता हमको लक्ष्य से भटका नहीं सकती है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राममंदिर निर्माण, श्रीकृष्ण जन्मभूमि व काशी-विश्वनाथ मंदिर ? आक्रांताओं से मुक्त कराना ही हमारा मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में हिंदू युवा वाहिनी का विस्तार किया जाएगा।
योगी की असली ताकत रही है हिंदू युवा वाहिनी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना पहला लोकसभा चुनाव करीब 26 हजार मतों से जीते थे। लेकिन 1999 में हुए लोकसभा चुनाव में वह महज सात हजार मत से ही जीत हासिल कर सके। जीत के काफी कम अंतर से योगी आदित्यनाथ को समझ आ चुका था कि राजनैतिक रूप से मजबूत रहना है तो कुछ करना होगा। फिर उन्होंने हिंदू युवा वाहिनी का गठन किया। गांव स्तर पर कमेटी का गठन हुआ। प्रखर हिंदूवादी संगठन के रूप में हिंदू युवा वाहिनी की पहचान बनी। यह संगठन योगी सेना के रूप में भी जानी जाती रही। आलम यह कि हिंदू युवा वाहिनी की जड़ें पूरे पूर्वांचल में फैल गई। बीजेपी के समानांतर खड़े इस संगठन से जुड़ने वाले लोग योगी आदित्यनाथ केे प्रति समर्पित रहे। इसका परिणाम यह हुआ कि योगी आदित्यनाथ पूर्वांचल की बड़ी राजनैतिक ताकत के रूप में उभरे।
2017 में बागी होने लगी योगी की हिंदू युवा वाहिनी
दरअसल, योगी आदित्यनाथ की हिंदू युवा वाहिनी सीधे तौर पर चुनावी राजनीति में नहीं उतरती थी लेकिन गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ द्वारा हियुवा के नेताओं को बीजेपी से सिंबल बराबर दिलाया जाता रहा है। भाजपा भी दो-चार सीटें हमेशा देती रही। लेकिन धीरेे-धीरे हिंदू युवा वाहिनी पूर्वांचल में मजबूत होती गई और इस संगठन के लोगों की राजनैतिक महत्वाकांक्षा भी बढ़ती गई। 2017 विधानसभा में हियुवा में बगावत के स्वर मुखर हो गए। चुनाव के दौरान हियुवा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह ने बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर बीजेपी पर योगी आदित्यनाथ की अनदेखी का आरोप लगाते हुए हियुवा द्वारा पूर्वांचल की सीटों पर प्रत्याशी उतारने का ऐलान किया गया। इसके बाद बीजेपी में हड़कंप मच गया। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद खुद योगी आदित्यनाथ ने मोर्चा संभाला। सबसे पहले हियुवा के आधा दर्जन बागियों को बाहर का रास्ता दिखवाया। इसके बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से लेकर कई बड़े नेता भी गोरखपुर में डेरा डाले थे।
Published on:
14 May 2018 04:05 am
