
itasri, flour mill, wheat, mill close,
किसानों से खरीदे गए धान की कुटाई करने के बाद मिलर्स चावलों को वापस ही नहीं कर रहे। अकेले गोरखपुर में करीब पंद्रह करोड़ रुपये से अधिक का चावल मिलर्स अपने गोदामों में दबाए बैठे हैं।
यूपी के किसानों को उनकी फसल को बेहतर कीमत पर खरीदने के लिए सरकार की विभिन्न एजेंसियों ने समर्थन मूल्य योजना के तहत वर्ष 2017-18 में धान की खरीदी की। धान खरीद करने वाली एजेंसियों पीसीएफ, यूपीपीसीयू और यूपी स्टेट एग्रो ने अपने अपने सेंटरों से खरीदारी की थी। इन एजेंसियों ने धान खरीद के बाद चयनित मिलर्स को आवंटित कर दिया था। अब इन्हें आबंटित धान का चावल बनाकर निर्धारित 67 प्रतिशत रिकवरी गोदामों में जमा करना था। लेकिन अधिकांश मिलर्स ने अभी यह रिकवर हुआ चावल गोदामों तक नहीं पहुंचाया है। ये मिलर्स चावल को अपने गोदामों में ही दबाए बैठे हैं। विभिन्न एजेंसियों के शासकीय चावल (सीएमआर) अभी भी चावल मिलर्स के यहां बकाया है। किसानों के खरीदे गये धान से 67 प्रतिशत की दर से चावल मिलर्स को चावल की रिकवरी देनी थी, लेकिन अब भी अधिकांश मिलर्स ने लापरवाही की है और रिकवर चावल को गोदामों तक नहीं पहुंचाया है।
पीसीएफ की खरीद का 4038.35 मीट्रिक टन, यूपीपीसीयू का 1803.85 मीट्रिक टन और यूपी स्टेट एग्रो का 27 मीट्रिक टन का चावल अभी तब मिलर्स दबाए बैठे हैं। यानी कुल 5869.20 मीट्रिक टन का बकाया चावल अभी मिलर्स पर देनदारी के रूप में बचा हुआ है। इसकी अनुमानित कीमत 15 करोड़ 37 लाख 74 हजार 214 रुपये बताई जा रही है।
क्या कहता है विभाग
खाद्य विपणन विभाग मिलर्स पर दबाव बनाने के लिए अब जागा है। कई लेटर लिखने के बाद एक बार और पत्र लिखकर सभी मिलर्स को 15 सितंबर तक बकाया चावल भारतीय खाद्य निगम के डिपो में जमा करने का मौका दिया है। विभाग का कहना है कि डिपो में चावल न जमा करने वाले मिलर्स के खिलाफ अब आरसी जारी कर प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। इसी के साथ उसे ब्लैक लिस्टेड भी किया जाएगा।
Published on:
01 Sept 2018 03:47 pm
