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अफवाहबाजों पर नकेल, गोरखपुर के पेट्रोल पंपों पर सन्नाटा…पटरी पर लौटी वितरण व्यवस्था

डीएम दीपक मीणा ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि- लोगों को इस समय अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। लोग पैनिक नहीं होते तो ऐसी स्थिति नहीं होता। फिलहाल अभी स्थिति सामान्य है।"
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गोरखपुर

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anoop shukla

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Updated: 28 Mar 2026, 3:11 PM IST

Up news, gorakhpur

फोटो सोर्स: पत्रिका, पेट्रोल पंपों पर सन्नाटा

गोरखपुर में बीते दिनों गैस, डीजल और पेट्रोल को लेकर जो अस्थिरता और अफरा-तफरी का माहौल बना था, अब वह पूरी तरह नियंत्रण में आ चुका है। जिला प्रशासन की सतर्कता, त्वरित निर्णय और लगातार निगरानी के चलते हालात सामान्य हो गए हैं। पेट्रोल पंपों पर लगने वाली लंबी कतारें खत्म हो चुकी हैं और आम लोगों को अब आसानी से ईंधन उपलब्ध हो रहा है। वहीं रसोई गैस की समस्या भी काफी हद तक सुलझ चुकी है।

अफवाह से उमड़ी गैस एजेंसी और पंपों कर भीड़

दरअसल, इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत एक भ्रम और अफवाह से हुई। लोकसभा में दिए गए एक बयान, जिसमें कोरोना जैसी स्थिति के लिए तैयार रहने की बात कही गई थी, उसे लेकर आम जनता ने अलग अर्थ निकाल लिया। जहां उस बयान का आशय सतर्कता और तैयारी बनाए रखने से था, वहीं आम लोगों के बीच यह संदेश फैल गया कि पेट्रोल, डीजल और गैस की भारी कमी होने वाली है।

आम जनता भारी मात्रा में स्टॉक करने लगी पेट्रोल, डीजल

इसी गलतफहमी के कारण अचानक लोग बड़ी संख्या में पेट्रोल पंपों की ओर दौड़ पड़े। जो लोग सामान्य दिनों में 100-200 रुपये का पेट्रोल या सीमित मात्रा में डीजल लेते थे, वे अचानक अपने वाहनों की टंकी फुल कराने लगे। कई लोगों ने अतिरिक्त डिब्बों में भी ईंधन भरवाना शुरू कर दिया। इससे मांग में अचानक कई गुना वृद्धि हो गई और कृत्रिम संकट की स्थिति बन गई।

अधिकारियों ने कहा ईंधन की कोई कमी नहीं

हालात ऐसे हो गए कि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के कई पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें लग गईं। लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा था। हालांकि, वास्तविकता यह थी कि ईंधन की आपूर्ति में कोई कमी नहीं थी। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, 25 मार्च को डीजल 1810 केएल (18,10,000 लीटर) और पेट्रोल 1215 केएल (12,15,000 लीटर) उपलब्ध था।

26 मार्च को डीजल 2000 केएल (20,00,000 लीटर) और पेट्रोल 1400 केएल (14,00,000 लीटर) की आपूर्ति की गई। वहीं 27 मार्च को डीजल 1235 केएल (12,35,000 लीटर) और पेट्रोल 730 केएल (7,30,000 लीटर) उपलब्ध रहा। (यहां 1 केएल = 1000 लीटर होता है)। इन आंकड़ों से साफ है कि लाखों लीटर ईंधन उपलब्ध था और किसी प्रकार की वास्तविक कमी नहीं थी।

कालाबाजारी या अनियमितता बर्दाश्त नहीं

स्थिति को बिगड़ता देख जिलाधिकारी दीपक मीणा ने तुरंत हस्तक्षेप किया और सभी संबंधित विभागों को अलर्ट कर दिया। डीएसओ रामेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में आपूर्ति व्यवस्था की सघन निगरानी शुरू की गई। पेट्रोल पंप संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही अफवाह फैलाने वालों पर भी नजर रखी गई।

सुधरने लगी स्थिति, नहीं दिख रही पंपों पर लंबी लाइन

प्रशासन की इस सख्ती और लगातार मॉनिटरिंग का असर जल्द ही दिखने लगा। लोगों को यह समझाया गया कि ईंधन की कोई कमी नहीं है और घबराने की जरूरत नहीं है। जैसे ही लोगों का भरोसा बहाल हुआ, पंपों पर भीड़ कम होने लगी और दो दिनों के भीतर स्थिति पूरी तरह सामान्य हो गई। अब हर पेट्रोल पंप पर डीजल और पेट्रोल आसानी से उपलब्ध हो रहा है और कहीं भी लंबी लाइनें नहीं दिख रही हैं।

KYC अपडेट न करने से लोगों के गैस कनेक्शन हो गए थे निष्क्रिय

वहीं, रसोई गैस को लेकर जो समस्या सामने आई थी, उसका भी बड़ा कारण उपभोक्ताओं का केवाईसी (KYC) लंबित होना था। जिन उपभोक्ताओं ने वर्षों से गैस बुकिंग नहीं कराई थी, जिसके कारण उनके कनेक्शन निष्क्रिय हो गए थे। जब अचानक गैस की मांग बढ़ी, तो बिना केवाईसी वाले उपभोक्ताओं की बुकिंग नहीं हो पा रही थी, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा।

70 प्रतिशत उपभोक्ताओं का KYC पूरा

इस स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने गैस एजेंसियों को निर्देशित किया कि केवाईसी प्रक्रिया को तेजी से पूरा कराया जाए।अभियान चलाकर उपभोक्ताओं को जागरूक किया गया और उन्हें अपने कनेक्शन अपडेट कराने के लिए प्रेरित किया गया। अब तक करीब 70 प्रतिशत उपभोक्ताओं का केवाईसी पूरा हो चुका है, जिससे गैस वितरण की व्यवस्था काफी हद तक सामान्य हो गई है।

जल्द पूरी होगी बचे लोगों की KYC

अधिकारियों के अनुसार, शेष 30 प्रतिशत उपभोक्ताओं का केवाईसी भी जल्द पूरा करा लिया जाएगा। इसके बाद गैस की समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और सभी उपभोक्ताओं को नियमित रूप से होम डिलीवरी के माध्यम से गैस मिलने लगेगी।
प्रशासन का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि अफवाहें किस तरह से सामान्य स्थिति को भी संकट में बदल सकती हैं। यदि लोग संयम और समझदारी से काम लें, तो ऐसी परिस्थितियों से आसानी से बचा जा सकता है। वहीं, प्रशासन की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई ने यह साबित किया है कि सही समय पर लिए गए निर्णय किसी भी संकट को जल्दी समाप्त कर सकते हैं।

सामान्य हुई पेट्रोल, डीजल, गैस की आपूर्ति

कुल मिलाकर, गोरखपुर में अब गैस, डीजल और पेट्रोल की स्थिति पूरी तरह सामान्य है। बाजार में स्थिरता लौट आई है और आम जनता को किसी प्रकार की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ रहा है। प्रशासन की सतर्कता और सख्ती ने न सिर्फ संकट को टाला, बल्कि लोगों का भरोसा भी मजबूत किया है। आने वाले दिनों में भी इसी तरह निगरानी बनाए रखी जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।