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कमरे में मौजूद लाइटों का शरीर पर भी पड़ता है असर, रोशनी से Human Body में बनते हैं ये दो हार्मोन

Highlights: -लाइटिंग की नई टेक्नोलॉजी है और इसकी जानकारी देने के लिए यह प्रदर्शनी लगाई गई है -यह प्रदर्शनी बताती है एलईडी का इस्तेमाल करने के क्या-क्या फायदे हैं -एनवायरनमेंट के लिए ये कितना फायदेमंद है और लोगों की जेब पर भी इससे खर्चा कम होता है

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ग्रेटर नोएडा। शहर के एक्स्पो मार्ट में चल रहे एलईडी एक्स्पो भविष्य में घरों में इस्तेमाल होने वाली इंटेलिजेंट लाइटिंग और ह्यूमन सेंट्रिक लाइटिंग की जानकारी देने के लिए फ्यूचर जोन बनाया गया है। दरअसल, यह लाइटिंग की नई टेक्नोलॉजी है और इसकी जानकारी देने के लिए यह प्रदर्शनी लगाई गई है। यह प्रदर्शनी बताती है एलईडी का इस्तेमाल करने के क्या-क्या फायदे हैं। एनवायरनमेंट के लिए ये कितना फायदेमंद है और लोगों की जेब पर भी इससे खर्चा कम होता है।

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बता दें कि अभी तक हम लोग स्विच से लाइट को ऑन और ऑफ करते हैं। एलईडी एक्स्पो के फ्यूचर जोन में बताया गया कि अब इस तकनीक से भी हम आगे बढ़ गए हैं। अब स्मार्ट लाइटिंग सिस्टम आ गए हैं। आप कमरे में जाते हैं और लाइट जल जाती है, कमरे से बाहर आते हैं तो लाइटे अपने आप बंद हो जाती हैं। आप घर के जिस हिस्से में रहेंगे वहाँ की लाइट जल जाएगी, यह इंटेलिजेंट लाइटिंग की तकनीक है। लेकिन अब ह्यूमन सेंट्रिक लाइटिंग का दौर शुरू हो गया है। इस नई तकनीक में जैसे सनलाइट में डिफरेंट कलर टेंपरेचर होता हैस वह रूम के अंदर भी रीक्रिएट किया जाता सकता है। ताकि जो व्यक्ति रूम के अंदर बैठा है, उसको डिफरेंट कलर टेंपरेचर फील मिले जो शरीर के लिए बहुत जरूरी है।

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नए अनुसंधान के अनुसार लाइट टेंपरेचर का हमारे जीवनचर्या में बहुत प्रभाव पड़ता है। जो हमारी शयन, मूड, फोकस, मोटिवेशन, कंसंट्रेशन और कार्य को प्रभावित करता है। ह्यूमन सेंट्रिक लाइटिंग का आधार इसे ही बनाया गया है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर बीजू जॉन कहते हैं कि हमारे शरीर में लाइट से दो प्रकार के हार्मोन क्रिएट होते हैं। एक कॉर्टिसोल है और दूसरा मेलाटोनिन।

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मेलाटोनिन शरीर को एक्टिव रखता है, जबकि कॉर्टिसोल से शरीर को रिलेक्स करता है। पहले लोग सूर्य कि रोशनी और उसके तापमान पर निर्भर थे। जो सुबह, दोपहर और शाम को अलग लाइट टेंपरेचर देते था। लेकिन वर्तमान में हम लगातार आठ घंटे तक एक सी रोशनी में रहते है और तेज सफ़ेद लाइट से मेलाटोनिन हार्मोन क्रिएट होता रहता है। जिससे शरीर को आराम नहीं मिल पाता। जिससे हमारी दिनचर्या प्रभावित होती है। यह सारी नई टेक्निक है, जिस पर वर्षों से काम चल रहा था, अब लोगों को आसानी से उपलब्ध होंगी।