ड्रग कमिश्नर का छापा, कोरोना के इलाज में इस्तेमाल होने वाली नकली दवा की पैकेजिंग यूनिट का पर्दाफाश

मुंबई पुलिस के इनपुट पर ग्रेटर नोएडा में नकली दवा के रैकेट का खुलासा, 20 लाख की नकली दवा बरामद

By: lokesh verma

Published: 09 Jun 2021, 10:08 AM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
नोएडा. कोरोना महामारी के बीच कुछ लोग नकली दवाओं का कारोबार कर अपनी तिजोरी भरने में लगे हैं। मेरठ में नकली दवा (Fake Medicine) फैक्ट्री पकड़े जाने के बाद ग्रेटर नोएडा (Greater Noida) में नकली दवाओं की पैकेजिंग यूनिट का पर्दाफाश हुआ है। मुंबई पुलिस के इनपुट के बाद मेरठ के ड्रग कमिश्नर के नेतृत्व में की गई छापेमारी के दौरान ग्रेटर नोएडा में नकली दवाओं की पैकेजिंग यूनिट पकड़ी गई है। जहां नकली दवाओं के विभिन्न ब्रांड के नाम से दवाओं को पैक कर सप्लाई किया जा रहा था। छापेमारी के दौरान दवा पैक करने वाली मशीन के साथ लाखों रुपए की दवा, दवा के रैपर और कार्टन बरामद किए गए हैं।

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दरअसल, नकली दवा पैकेजिंग यूनिट ग्रेटर नोएडा की ईकोटेक के पी-241 स्थित फैक्ट्री में चल रही थी। जहां नकली दवाओं के पैकेजिंग कारोबार किया जा रहा था। मेरठ के ड्रग असिस्टेंट कमिश्नर वीरेंद्र कुमार, नायब तहसीलदार सचिन पंवार और एडीसीपी अंकुर अग्रवाल की संयुक्त रूप से की गई छापेमारी के दौरान ड्रग डिपार्टमेंट को यहां से जो दवाएं मिली हैं, उनका इस्तेमाल कोरोना संक्रमित के इलाज में भी किया जाता है। इन दवाओं एजिथ्रोमाइसिन, फेवि फ्लू, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, सिफोरेक्स सीवी, फरोपिनम, फेवीमैक्स एंटीबायोटिक दवा शामिल है, जिसकी कीमत 20 लाख से ज्यादा बताई जा रही है।

छापेमारी से पहले ही फरार हुए सभी लोग

बता दें कि इन दवाओं पर हिमाचल की मैक्स कंपनी का लेवल लगाकर सप्लाई किया जा रहा था। जांच में पता चला है कि यहां सिर्फ नकली दवाओं की पैकिंग का काम होता था। औषधि निरीक्षक वैभव बब्बर ने बताया कि फैक्ट्री में छापेमारी के दौरान मिली सभी दवाओं के सैंपल को जांच के लिए लखनऊ स्थित प्रयोगशाला भेजा जाएगा। छापेमारी के दौरान फैक्टरी में कोई भी कर्मचारी मौके पर नहीं मिला है। जांच में औषधि बनाने के लिए जरूरी लाइसेंस भी मौके से नहीं मिला है।

एक महीने पहले ही किराए पर ली गई थी फैक्ट्री

ग्रेटर नोएडा के एडीसीपी अंकुर अग्रवाल ने बताया कि पुलिस की छानबीन में पता चला है कि फर्जी फैक्ट्री चलाने वाले संचालक ने एक महीने पहले इसे किराए पर लिया था। इस मामले में पहले ही कुछ गिरफ्तारी महाराष्ट्र और मेरठ में की जा चुकी है। इस फैक्ट्री के संचालक और इस फर्जी कारोबार से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी की जा रही है। कौन-कौन लोग इस फर्जी कारोबार में जुड़े थे। उन सभी पर कार्रवाई की जाएगी।

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