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3 भाईयों में इकलौता बचा बेटा 10 साल पहले हो गया था लापता, Lockdown में पुलिस ने इस तरह मिलाया

Highlights . क्वारंटाइन सेंटर होम में पूछ गया था घर का पता . पुलिस की मदद से मिले मां-बाप. 15 साल की उम्र में 10 पहले बिछड़ गया था युवक  

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ग्रेटर नोएडा। कोरोना वायरस की वजह से देशभर में लॉकडाउन है। अभी भी बड़ी संख्या में लोग जस के तस फंसे हुए है। विदेशों में फंसे लोगों की वतन वापसी के लिए केंद्र सरकार ने वंदे भारत मिशन शुरू किया हुआ है। जिसके तहत लोगों को विशेष विमान से वतन लाया जा रहा है। वहीं, देश में फंसे मजदूर और छात्रों को भी बसों व ट्रेनें चलाकर घर भेजा रहा है। लॉकडाउन की वजह से एक परिवार के लिए उनके जीवन भर की खुशी लौटी है। कोरोना की वजह से क्वारंटीन शेल्टर होम में भर्ती एक शख्स को उसका परिवार मिला है।

15 साल की उम्र में यह युवक अपने परिवार से बिछड़ गया था। अब 10 साल बाद वह परिजनों से मिला है। परिजनों का कहना है कि वह किसी तरफ 10 साल पहले लापता हो गया था। परिजनों से उसकी काफी तलाश की, लेकिन कुछ पता नहीं चल सका। जब युवक को जिला प्रशासन ने जेचर के क्वारंटीन शेल्टर होम में भर्ती किया तो उससे पता पूछा। हालांकि, वह सिर्फ कासगंज ही बता पाया। उसके बाद कासगंज पुलिस युवक के घर पहुंची और बुजुर्ग परिजनों को वॉट्सऐप पर फोटो दिखाया तो बूढ़ी आंखों में आंसू आ गए। जेवर तहसीलदार दुर्गेश सिंह ने सर्वेश को उसके परिजनों को सौंप दिया।

लॉकडाउन में घूमा हुआ मिला था युवक

जेवर तहसीलदार के मुताबिक, युवक लॉकडाउन में सड़क पर घूमता देखा गया। जिसके बाद उसे पकड़कर शेल्टर होम में रखा गया। युवक ने अपने नाम सर्वेश बताया और उसे घर का पता पूछा गया। लेकिन वह सिर्फ कासगंज के बारे में बता पाया। कासगंज थाना प्रभारी के मोबाइल पर वॉट्सऐप पर सर्वेश की फोटो भेजी गई। रेकॉर्ड चेक पर वह सर्वेश नाम से 10 साल पहले लापता मिला। सर्वेश के घर की हालत अच्छी नहीं। पिता मजदूरी करते है। यह घर का इकलौता बेटा है। बताया गया है कि सर्वेश समेत तीन भाई थे। 2 की एक हादसे में मौत हो गई थी। जिसके बाद वह अकेला ही रह गया।