हौती विद्रोहियों ने लगाया 'मौके पर चौका', सऊदी अरब की तेल पाइपलाइन उड़ाने के पीछे असली खिलाड़ी कौन ?

हौती विद्रोहियों ने लगाया 'मौके पर चौका', सऊदी अरब की तेल पाइपलाइन उड़ाने के पीछे असली खिलाड़ी कौन ?

Mohit Saxena | Publish: May, 16 2019 07:20:00 AM (IST) | Updated: May, 16 2019 12:02:50 PM (IST) गल्फ

  • अमरीका अपनी सेना खाड़ी में उतारने जा रहा है
  • ईरान को डर है कि कहीं सऊदी अरब उस पर हमला न करे
  • हौती विद्रोही युद्ध में आग में घी का काम कर रहे

तेहरान। ईरान और अमरीका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमरीका के कड़े तेवर से दुनिया पर युद्ध का खतरा मंडराने लगा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अमरीका अपनी सेना खाड़ी में उतारने जा रहा है।वहीं उसके युद्धपोतों ने मोर्चा संभाल लिया है। ट्रंप ने हालांकि युद्ध का कोई संकेत नहीं दिया है। मगर हाल ही में उन्होंने ईरान को धमकी दी कि अगर ईरान अपनी हिमाकत से बाज नहीं आता है तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। ईरान को डर है कि कहीं अमरीका के साथ सऊदी अरब भी उस पर हमला न कर दे। क्योंकि ईरान हौती विद्रोहियों का समर्थक रहा है। हाल ही में सऊदी अरब में तेल की मुख्य पाइपलाइन के दो पम्पिंग स्टेशन ड्रोन हमले का शिकार हुए हैं। मंगलवार को सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री खालिद अल-फलीह ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि यह हमला यमन के हौती बागियों ने किया है।

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अमरीका ने क्षेत्र में बमवर्षक विमान तैनात किए थे

स्थिति का पूरा आकलन करें तो इस हमले का उद्देश्य गल्फ देशों के बीच तनाव को एक बार फिर बढ़ना है। दरअसल, एक दिन पहले ही अमरीका ने क्षेत्र में बमवर्षक विमान तैनात किए थे। रविवार को यूएई की ओर से कुछ टैंकरों को नुकसान पहुंचाए जाने की बात भी कही गई थी। अमरीका की ईरान को दी गई चेतावनी के बाद और ज्यादा तनाव पैदा हो गया है। इसे और भड़काने के लिए पाइपलाइन पर हमला किया गया ताकि आवेश में आकर अमरीका ईरान पर हमला कर दे।

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पचास लाख बैरल तेल का उत्पादन

ड्रोन हमले की शिकार पाइपलाइन से एक दिन में पचास लाख बैरल तेल का उत्पादन होता है। मंत्री फलीह के अनुसार यह एक आतंकी हमला है। यह केवल देश पर ही नहीं किया गया, बल्कि इसमें तेल वितरण की सुरक्षा को भी निशाना बनाया गया है। उन्होंने कहा कि इस हमले से तेल का उत्पादन और निर्यात प्रभावित नहीं होगा। कंपनी जल्द पम्पिंग स्टेशन की स्थिति का जायजा लेगी, ताकि ऑपरेशन फिर से शुरू किए जा सकें। हौती बागियों ने सोशल मीडिया के जरिए इस हमले की जिम्मेदारी ली। 1,200 किमी लंबी इस पाइपलाइन को निशाना बनाने के मामले पर यमन के हौती बागियों के प्रवक्ता ने ट्विटर पर लिखा कि यह हमला यमन के लोगों के खिलाफ हो रहे नरसंहार की प्रतिक्रिया है।

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कौन है हौती विद्रोही

यमन दुनिया के सबसे सूखा, सबसे गरीब और कम विकसित देशों में से एक है। यहां पर 42 प्रतिशत लोग गरीब हैं। वहीं पांच में एक यमनी कुपोषित है। 1932 में अदन (जिसे अब यमन कहा जाता है) को अपने अधिकार में ब्रिटिश ने भारत का एक प्रांत बनाया गया था। 1937 में अदन को ब्रिटिश भारत से अलग कर दिया गया था। यमन में चार अरब से अधिक बैरल के कच्चे तेल के भंडार मौजूद है। हालांकि इन भंडारों को नौ साल से अधिक समय तक रहने की उम्मीद नहीं है, और देश के पुराने क्षेत्रों से उत्पादन गिरने से चिंता हमेशा रही है। यमन में हौती विद्रोही, जिसे सादाह युद्ध या सादाह संघर्ष भी कहा जाता है। यह एक सांप्रदायिक सैन्य विद्रोह था, जो सुन्नी सेना के खिलाफ शुरू हुआ था, फिर जैदी शिया हौती एक बड़े पैमाने पर गृहयुद्ध में तब्दील हो गई। सऊदी अरब यमन के साथ अपनी सीमा पर एक सैन्य निर्माण शुरू किया। इसके जवाब में एक हौती कमांडर ने दावा किया कि उनकी सेना किसी भी सऊदी आक्रामकता के खिलाफ मुकाबला करेगी।हौती के इस आक्रामक रुख से लगता है कि खाड़ी में आने वाले समय में शांति की गुंजाइश कम ही है। ईरान और अमरीका के बीच तनाव में हौती की कहीं आग में घी डालने का काम न करे।

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