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एम्बुलेंस में ऑक्सीजन खत्म, मासूम ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ा, चालक परिजन को सड़क पर उतारकर भागा

MP Health System : यह कैसी व्यवस्था... बिना ऑक्सीजन के सीरियस मरीजों को छोड़ने में जुटी एम्बुलेंस। साढ़े तीन साल की मासूम ने तड़प-तड़प कर तोड़ दिया दम। बाद में चालक सड़क पर ही परिजन को उतारकर भाग निकला।

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MP Health System : एक बार फिर मध्य प्रदेश की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था ने एक साढ़े तीन साल की मासूम बच्ची की जान ले ली। तीन दिन से बुखार में तप रही हर्षिता कुशवाह को गुना जिला अस्पताल से शुक्रवार सुबह 6 बजे भोपाल रेफर किया गया। एम्बुलेंस ब्यावरा भी नहीं पहुंची कि ऑक्सीजन के दोनों सिलेंडर खाली हो गए। ब्यावरा से तीन कि.मी पहले ही बच्ची ने तड़प-तड़पकर जान दे दी। हद तब हो गई, जब सुबह 8.30 बजे एम्बुलेंस चालक बबलू और ईएमटी भगवान सिंह ब्यावरा सिविल अस्पताल के पास बच्ची के शव और उसके माता-पिता को उतारकर भाग निकले। कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं। एम्बुलेंस चालक और ईएमटी को सस्पेंड कर दिया है।

गुना के पटना गांव के बृजेश कुशवाह ने बेटी हर्षिता को 5 मार्च को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। बृजेश का आरोप है कि, अस्पताल में इलाज में लापरवाही बरती गई। गुरुवार रात बेटी की तबीयत बिगड़ी तो डॉ. मनीष जैन को तीन बार कॉल किया। उन्होंने बात नहीं की। फिर शुक्रवार सुबह उसे भोपाल रेफर कर दिया गया।

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आंखों के सामने बेटी की सांस उखड़ गई

हर्षित को याद कर पिता बृजेश फफक पड़े। उन्होंने बताया, एम्बुलेंस में दो सिलेंडर रखे थे। बेटी ऑक्सीजन पर थी। महज ढाई घंटे में ही दोनों खाली हो गए। वो नजरों के सामने तपड़ रही थी। सुबह 8.30 बजे चालक बबलू ने हर्षिता को ब्यावरा सिविल अस्पताल के पास रोड पर ही छोड़ दिया। वे रेफरल पर्चा भी साथ ले गए। बाद में दूसरी एम्बुलेंस की मदद से पर्चा मंगाना पड़ा।