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बंद कमरे में फूटा भाजपा में कलह का बम! गुना में बैठक के बीच ज्योतिरादित्य सिंधिया को देनी पड़ी नसीहत

Jyotiraditya Scindia on Dispute in BJP: गुना से सांसद और केंद्रीमंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बैठक में नहीं पहुंचे विधायक और पार्षद, बंद कमरे में चली मीटिंग में नेताओं का छलका दर्द, सुनाई दिए पार्टी में कलह के स्वर, हालात इतने बिगड़े की सिंधिया को देनी पड़ी दो टूक नसीहत
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गुना

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Sanjana Kumar

Jun 30, 2026

Jyotiraditya scindia reprimand to BJP leaders Guna

Jyotiraditya scindia reprimand to BJP leaders Guna: गुना में दिखा बीजेपी नेताओं में असंतोष, शिकायतों पर झल्लाए सिंधिया। (photo Jyotiraditya Scindia X Handle)

Jyotiraditya Scindia on party dispute: केंद्रीय नागरिक उड्डयन एवं संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के तीन दिवसीय गुना प्रवास के दौरान बंद कमरे में हुई भाजपा नेताओं की बैठक ने संगठन के भीतर सुलग रही असंतोष की चिंगारी को सार्वजनिक कर दिया है। तेलघानी स्थित एक होटल में आयोजित बैठक में संगठन की मजबूती पर चर्चा कम, और अपनों के ही खिलाफ उपेक्षा और नाराजगी का गुबार ज्यादा बाहर निकला। हालात इस कदर असहज हो गए कि खुद केंद्रीय मंत्री सिंधिया को कड़े लहजे में नसीहत देनी पड़ी।

सिंधिया की दो टूक यह पार्टी अम्मा-महाराज की

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि नेता शिकायत करने की परंपरा को छोड़ें और याद रखें कि यह पार्टी अम्मा-महाराज (राजमाता विजयाराजे सिंधिया और माधवराव सिंधिया) के सिद्धांतों और प्रयासों से खड़ी (Jyotiraditya Scindia reprimand to BJP leaders) हुई है। हम सभी का एकमात्र लक्ष्य इसे मजबूत बनाना होना चाहिए। विधायकों और पार्षदों की दूरी चर्चा में रही इस पूरी बैठक का सबसे चौंकाने वाला पहलू कुछ प्रमुख चेहरों की अनुपस्थिति रहा।

सिंधिया की बैठक से गायब रहे विधायक और पार्षद

सिंधिया जैसे कद्दावर नेता की बैठक से विधायक पन्नालाल शाक्य और प्रियंका मीना पूरी तरह गायब रहे। पूर्व विधायक राजेंद्र सलूजा और राधेश्याम पारीख भी बैठक में नहीं पहुंचे। गुना नगरपालिका के अधिकांश भाजपा पार्षद भी दूर रहे। सूत्रों की मानें तो पार्षद नपा अध्यक्ष की कार्यशैली और मनमानी से लंबे समय से खफा हैं। बार-बार शिकायत के बाद भी जब अध्यक्ष के खिलाफ कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो पार्षदों ने विरोध स्वरूप इस बार सिंधिया से मुलाकात करने से भी दूरी बना ली।

राजनीतिक एक्सपर्ट्स बोले- गुटबाजी और खींचतान चरम पर

राजनीतिक जानकारों की मानें तो गुना विधायकों, पूर्व विधायकों और पार्षदों का यह सामूहिक किनारा साफ संदेश दे रहा कि गुना भाजपा के भीतर अंदरूनी गुटबाजी और खींचतान अब चरम पर पहुंच चुकी है, जिसे समय रहते न संभाला गया तो आगामी समय में संगठन को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

सिंधिया की दो टूक-सकारात्मक काम की बात करें

पार्टी के भीतर से आ रही शिकायतों की इस लंबी झड़ी को सुनकर सांसद सिंधिया (Jyotiraditya Scindia Aggresive) अपनी नाराजगी नहीं छिपा सके। उन्होंने उपस्थित नेताओं को समझाइश देते हुए कहा कि केवल कमियां गिनाने या एक-दूसरे की शिकायत करने से संगठन का भला नहीं होगा।

सिंधिया ने दो टूक शब्दों में कहा कि आप लोग मुझे कोई ऐसा सकारात्मक काम बताइए जो आपने संगठन या जनता के हित में खुद आगे बढ़कर किया हो। हर बात में शिकायत करना बंद होना चाहिए। हालांकि, जब व्यापार प्रकोष्ठ और चैंबर ऑफ कॉमर्स के नेताओं ने सुझाव दिया कि यदि सिंधिया के दौरे का कार्यक्रम कुछ दिन पहले मिल जाए तो स्थानीय स्तर पर जनता से जुड़े कई लाभकारी कार्यक्रम जोड़े जा सकते हैं, तो केंद्रीय मंत्री ने इसकी सराहना की। उन्होंने कहा कि वे अब अपने संसदीय क्षेत्र में अलग-अलग समय और तारीखों में सघन दौरे कर रहे हैं और इस व्यवस्था को और बेहतर किया जाएगा।

सांगठनिक असंतुलन और एक व्यक्ति-दो पद पर सवाल

बैठक के बाद भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने जिले में बढ़ते राजनीतिक असंतोष के असली कारणों का खुलासा किया। नेताओं के मुताबिक, पूर्व में प्रदेश कार्यकारिणी में गुना जिले से 10 नेताओं को प्रतिनिधित्व मिला हुआ था, जिससे हर गुट और क्षेत्र का संतुलन बना हुआ था। वर्तमान कार्यसमिति में केवल तीन नेताओं हरीसिंह यादव, महेंद्र सिंह सिसौदिया और गजेंद्र सिकरवार को ही जगह दी गई है। जबकि पूर्व में शामिल रहे राजेंद्र सलूजा, गोविंद राठी और राधेश्याम पारीख जैसे कद्दावर चेहरे बाहर कर दिए गए हैं। असंतुष्ट धड़े का यह भी आरोप है कि गुना भाजपा में एक व्यक्ति, एक पद के स्थापित सिद्धांत का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है, जिससे जमीनी नेताओं के अधिकार मारे जा रहे हैं।

प्रोटोकॉल और सूचना तंत्र पर फूटा गुस्सा

बैठक की शुरुआत ही बेहद तल्ख माहौल में हुई। भाजपा के एक पूर्व प्रदेश कार्यसमिति सदस्य ने जिले के सूचना तंत्र और प्रोटोकॉल पर सीधे सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि पहले जब भी कोई केंद्रीय मंत्री या बड़ा नेता क्षेत्र में आता था, तो सभी जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों को विधिवत और समय पर सूचना दी जाती थी। अब यह व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। अब तो यह भी पता नहीं चलता कि कौन सा बड़ा नेता कब आ रहा है और कब जा रहा है। इस पर आधा दर्जन से अधिक वरिष्ठ नेताओं ने सुर में सुर मिलाया। नेताओं का आरोप था कि सर्किट हाउस में प्रशासन द्वारा भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों के बैठने का कोई अलग या इंतजाम नहीं किया जाता है। अपनी ही सरकार होने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर उपेक्षा झेलने के कारण पार्टी के पुराने और जमीनी कार्यकर्ता खुद को बेहद अपमानित और अलग-थलग महसूस कर रहे हैं।

प्रभारी मंत्री पर भी साधा निशाना

असंतोष की यह आंच केवल स्थानीय संगठन और प्रशासन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसकी जद में जिले के प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत भी आ गए। बैठक में एक वरिष्ठ नेता ने खुलकर अपनी भड़ास निकालते हुए कहा कि प्रभारी मंत्री जिले में अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं से मिलना पसंद नहीं करते हैं। महत्वपूर्ण विभागीय बैठकों और सरकारी कार्यक्रमों से स्थानीय वरिष्ठ नेताओं को दूर रखा जाता है। नेताओं ने सीधे सिंधिया से सवाल किया कि अगर कार्यकर्ताओं को इस तरह हाशिए पर धकेला जाएगा, तो क्षेत्र में पार्टी कैसे मजबूत होगी? वर्तमान में स्थिति यह है कि प्रशासन का कोई भी अधिकारी भाजपा संगठन या कार्यकर्ताओं की बात सुनने तक को तैयार नहीं है।