
Guna Municipality: छह निकायों में 2.58 लाख मतदाता (Photo Source: AI Image)
Guna news: एमपी के गुना जिले में नगर सरकार के अगले चुनाव में बेहद रोचक होंगे। प्रशासनिक स्तर पर वार्डवार मतदाताओं की तस्वीर अब काफी हद तक साफ हो चुकी है। छह नगरीय निकायों में कुल 2 लाख 58 हजार 435 मतदाता है। इनमें 1 लाख 32 हजार 376 पुरुष, 1 लाख 26 हजार 36 महिलाएं और 23 अन्य मतदाता है। इसी तस्वीर में दो आंकड़े सबसे ज्यादा ध्यान खींचते हैं। पहला, 57561 लाड़ली बहना हितग्राही और दूसरा, करीब 98 हजार युवा मतदाता। लाड़ली बहना कुल मतदाताओं का 22.3 प्रतिशत हैं, जबकि 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवा मतदाताओं की संख्या कुल मतदाताओं की करीब 37 फीसदी बैठती है। यानी नगर सरकार की कुर्सी तक पहुंचने वाले उम्मीदवारों के सामने इन दोनों बड़े वोटर समूहों को साधने की चुनौती साफ दिखाई दे रही है।
लाड़ली बहना की संख्या सबसे ज्यादा गुना नगरपालिका में है। यहां 29,163 हितग्राही है। कुल 1,40,807 मतदाताओं के मुकाबले यह संख्या 20.7 प्रतिशत है। आसान भाषा में कहें तो गुना में लगभग हर पांच मतदाताओं में एक लाड़ली बहना हितग्राही है। राघौगढ़ में 11396, आरोन में 5281, मधुसूदनगढ़ में 4191, चांचौड़ा में 3936 और कुंभराज में 3594 लाड़ली बहना है।
हिस्सेदारी के हिसाब से सबसे आगे मधुसूदनगढ़ है, जहां कुल मतदाताओं में लाड़ली बहना की हिस्सेदारी 26.7 प्रतिशत है। इसके बाद राघौगढ़ 24.8, कुंभराज 24.4, आरोन 23.4 और चांचौड़ा 21.1 प्रतिशत पर है। 57561 लाड़ली बहना को 121 वार्डों में औसतन बांटें तो एक वार्ड में करीब 476 हितग्राही आते हैं। यह औसत है, वास्तविक संख्या वार्डवार अलग होगी। लेकिन चुनावी लिहाज से यह संख्या इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि नगर निकायों में कई बार जीत-हार का अंतर कुछ सौ वोट का ही रहता है। यानी एक वार्ड में लाड़ली बहना का समूह किसी उम्मीदवार की बढ़त को मजबूत करने या मुकाबला बेहद करीबी बनाने की क्षमता रखता है। यही वजह है कि इस बार महिला मतदाता सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि वार्ड की जीत का संभावित निर्णायक हिस्सा बन सकती है।
छह निकायों की मतदाता सूची में पुरुष और महिला मतदाताओं का अंतर भी बहुत कम है। पुरुष मतदाता 132376 हैं, जबकि महिलाओं की संख्या 126036 है। यानी महिला मतदाता पुरुषों से सिर्फ 6340 कम हैं। इसलिए लाड़ली बहना की संख्या को केवल योजना के लाभार्थियों के आंकड़े के तौर पर देखना भी अधूरा चुनावी विश्लेषण होगा। हर लाड़ली बहना किसी एक दल को वोट देगी, ऐसा मानना गलत होगा। लेकिन महिला मतदाताओं का इतना बड़ा आधार किसी भी चुनावी रणनीति को प्रभावित जरूर कर सकता है।
दूसरी बड़ी ताकत युवा मतदाता हैं। 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग में करीब 98 हजार मतदाता होने का अनुमान है। छह निकायों के 121 वाडों में इसे औसतन देखें तो एक वार्ड में एक 800 ज्यादा युवा मतदाता बैठते हैं। युवाओं की प्राथमिकताएं महिला मतदाताओं से अलग हो सकती हैं। रोजगार, शहर में नए अवसर, खेल सुविधाएं, सड़क, यातायात, कॉलेज-कॉचिंग, इंटरनेट और डिजिटल सुविधाएं उनके लिए चुनावी मुद्दे बन सकते हैं।
यहीं से चुनाव का नया समीकरण बनता है। महिलाएं शहर की रोजमर्रा की सुविधाओं का हिसाब मांग सकती हैं और युवा भविष्य को लेकर। खास बात यह है कि यदि किसी वार्ड में युवा और महिला मतदाता किसी एक स्थानीय मुद्दे पर एक जैसा रुख बना लेते हैं, तो इसका असर सीधे चुनाव परिणाम पर दिखाई दे सकता है।
Updated on:
03 Aug 2026 04:55 pm
Published on:
03 Aug 2026 04:51 pm
