
गुना। केन्द्र सरकार का मंशा है कि हर घर में शौचालय हो और बगैर मकान वाले के पास मकान हो। इन दोनों के लिए केन्द्र सरकार ने अलग-अलग लागत की शौचालय आवास और प्रधानमंत्री आवास योजना लागू की है। भले ही इसका लाभ जिले की जनता को कम मिल रहा हो, लेकिन ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के अफसर व कर्मचारी अपने स्वार्थ के खातिर फर्जी आंकड़ेबाजी करके इस योजना को पलीता लगा रहे हैं।
नगर पालिका हो या जिला पंचायत। ओडीएफ घोषित करने की दिशा में शौचालयों का निर्माण करा रहे हैं।
यह दोनों संस्थाएं अभी तक कागजों में लगभग लगभग ८० करोड़ रुपए शौचालय बनवाने पर खर्च कर चुकी हैं। इनमें नगर पालिका पांच करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है, जबकि जिला पंचायत लगभग 75 करोड़ रुपया शौचालयों के निर्माण पर खर्च कर चुकी है। ग्रामीण क्षेत्रों में देखा जाए तो हकीकत ये है कि 425 ग्राम पंचायतों के 1264 गांवों में से लगभग 288 गांव में लगभग ६४ हजार शौचालय बनाकर ओडीएफ घोषित कर दिया है उनमें भी शौचालय के लिए बाहर जाना अभी बंद नहीं हुआ है, क्यों कि वे इतने छोटे और घटिया किस्म के बनवाए गए हैं जिसमें आसानी से कोई बैठ भी नहीं सकता।
कुल मिलाकर ओडीएफ के नाम पर जिले भर में चल रहे फर्जीवाड़े को जिला पंचायत के पूर्व सीईओ ने पकड़ा था, जो कागजों में दब गया। इस तरह जिले में शौचालय बनाने के दौरान तमाम गड़बडिय़ां सामने आई। जिन पर कार्रवाई नहीं होने से शौचालयों की गुणवत्ता में अभी तक सुधार नहीं किया जा सका।
45 ग्राम पंचायतों में भी काम अधूरा
जिले में 425 ग्राम पंचायतें हैं इन सभी ग्राम पंचायतों को ओडीएफ करने की समयावधि 31 मार्च 2019 तय की है। इनमें शौचालय बनाने के लिए अब तक 68 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं।
निर्माण में नियमों की उड़ाई गईं धज्जियां
शासन के नियम हैं कि जो भी शौचालय बने, उसमें दरवाजे लोहे के हो, जिसका वजन कम से कम 14 किलो हो, लेकिन गुना जिले में बने शौचालयों की स्थिति देखी जाए तो बमुश्किल साढ़े तीन से पांच किलो वजन का गेट मिला। इसी तरह इसके लिए दिए जाने वाले 12 हजार रुपए में से मात्र पांच हजार रुपए में शौचालय बना दिए गए।
कागजों में दब गया शौचालय घोटाला
कम वजन के लोहे के दरवाजे और निर्माण कार्य में होने वाली धांधली को पूर्व प्रभारी सीईओ नियाज अहमद खान ने पकड़ा था, जिसमें दो से तीन करोड़ रुपए की आर्थिक अनियमितता होने का मामला सामने आया था। इसको लेकर सरपंच-सचिव को नोटिस दिए जाने की प्रक्रिया भी शुरू हुई, लेकिन खान के जाते ही वह कार्रवाई ठप हो गई थी।
यह मिला नजारा
बमौरी बुर्जुग गांव जो महूगढ़ा ग्राम पंचायत में आता है। इस गांव में कहने को शौचालय तो बने मिले, मगर वे काफी छोटे बने थे, जिन पर ताले लगे मिले, पानी का भी वहां कोई इंतजाम नहीं मिला। यहां रहने वाले लोगों से जब शौचालय के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि काफी प्रयास के बाद शौचालय यहां के सरपंच और सचिव ने बनवाए, जिनके लिए 12 हजार रुपए मिलना तय थे, यह पैसा कुछ ग्रामीणों के खातों में आया, जिसको सचिव ने ले लिया, क्यों कि उसने ही शौचालय अपने खर्चे पर बनवाए थे।
64 हजार शौचालय बनाने का दावा
जिला पंचायत के अधिकारियों का दावा है कि इस योजना के तहत अभी तक नगरीय क्षेत्र को छोडक़र जिले के 288 गांवों में 1 लाख 49 हजार शौचालय बनना है, जिसमें से अभी तक 64 हजार शौचालय बन चुके हैं। लेकिन ओडीएफ में शामिल कई गांव के लोग ओडीएफ को केवल कागजों मे मानते हैं। वे कहते हैं कि आज भी लोग बाहर शौचालय के लिए जाते हैं। गुना जिले में शौचालय का प्रतिशत 78 स्वच्छता मिशन के पोर्टल पर आ चुका है।
शौचालय ठीक-ठाक स्थिति में नहीं
सूत्रों ने बताया कि जिले के नेगमा, हरिपुर,पिपरौदा खुर्द, बजरंगगढ़ कॉलोनी, मुहालपुर, विनायकखेड़ी, खेजरा, बिलौनिया, पाटई, बमौरी, राघौगढ़ जैसे सैकड़ों जगह हैं, जहां शौचालय बनवाए गए हैं। वहां के लोगों ने बताया कि इतने छोटे बनवाए गए हैं जिनमें आसानी से बैठ भी नहीं सकते हैं। हरिपुर में तो एक शौचालय में कण्डे तक भरे हुए मिले।
यह मिली ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति
‘पत्रिका’ टीम जब ऊमरी में बनने वाले प्रधानमंत्री आवास के साथ-साथ बन रहे शौचालयों की स्थिति देखी तो वहां चार वाई चार के शौचालय बने हुए दिखे। उनकी ऊंचाई भी काफी कम थी। निर्माण कार्य भी घटिया चल रहा था। दरवाजे भी इतने कम वजन के थे उनका वजन 14 किलो की जगह चार-पांच किलो का था। जो जल्दी ही खराब हो सकते हैं।
Published on:
26 Apr 2018 10:43 am
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