
Dengue
ग्वालियर। शहर में डेंगू तेजी से फैल रहा है। अब रोज ही मरीज मिल रहे हैं। शनिवार को शहर के 10 लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई है। शनिवार को जीआरएमसी में 35 सैंपलों में 8 शहर के और जिला अस्पताल मुरार में 16 में से 2 लोग शहर के हैं, जो डेंगू पॉजीटिव आए हैं। इनमें रामजी का पुरा निवासी 13 वर्षीय बच्चा, आदित्यपुरम निवासी 6 वर्षीय बच्चा, भिंड रोड निवासी 29 वर्षीय युवती, आदित्यपुरम निवासी 10 वषीय बच्चा, बैंक कॉलोनी थाटीपुर निवासी 14 वर्षीय बच्चा, सुरेश नगर थाटीपुर निवासी 21 वर्षीय युवक, बैंकर्स कॉलोनी थाटीपुर निवासी 17 वर्षीय किशोर, महलगांव निवासी 11 वर्षीय बच्चा, पाताली हनुमान निवासी 51 वर्षीय महिला और ग्राम बरुआ गांव निवासी 27 वर्षीय महिला को डेंगू होने की पुष्टि हुई है। इसके अलावा मुरैना, भिंड, उमरिया, शिवपुरी, झांसी के लोग मरीज हैं।
अक्टूबर में तेजी से बढ़े मरीज
अक्टूबर महीने में डेंगू तेजी से फैल रहा है। पिछले छह दिन से लगातार मरीज मिल रहे हैं। इन छह दिन में 70 लोग डेंगू की चपेट में आ चुके हैं।
डेंगू के बारे में जानिए
मच्छर के काटे जाने के 3 से 5 दिनों के बाद मरीज में डेंगू बुखार के लक्षण दिखने लगते हैं। शरीर में बीमारी पनपने की मियाद 3 से 10 दिनों की भी हो सकती है। इनके तीन प्रकार हैं।
1. क्लासिकल (साधारण):
ठंड के साथ अचानक तेज बुखार आना, सिर, मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द, आंखों के पिछले हिस्से में दर्द (जो आंखें दबाने या हिलाने से और बढ़ जाता है) बहुत ज्यादा कमजोरी, भूख न लगना और जी मितलाना, मुंह का स्वाद खराब होना, गले में हल्का-सा दर्द, शरीर खासकर चेहरे, गर्दन व छाती पर लाल-गुलाबी रंग के रैशेज आदि। यह बुखार करीब 5 से 7 दिन तक रहता है। डेंगू का यही टाइप कॉमन है।
2. डेंगू हैमरेजिक बुखार:
नाक-मसूड़ों से खून आना, शौच या उल्टी में खून आना स्किन पर गहरे नीले-काले रंग के छोटे या बड़े चकत्ते पड़ जाना। इसमें गंभीरता अधिक होती है।
3. डेंगू शॉक सिंड्रोम:
इसमें भी डेंगू हैमरेजिक बुखार के सभी लक्षणों के साथ 'शॉक' जैसे लक्षण भी होते हैं। जैसे मरीज बहुत बेचैन हो जाता है और तेज बुखार के बावजूद उसकी स्किन ठंडी महसूस होती है। मरीज धीरे-धीरे होश खोने लगता है।
मल्टीऑर्गन फेल्योर की भी आशंका
डेंगू से कई बार मल्टी ऑर्गन फेल्योर भी हो जाता है। इसमें सेल्स के अंदर मौजूद फ्लूड बाहर निकल जाता है। पेट में पानी जमा हो जाता है। लंग्स व लिवर पर बुरा असर पड़ता है और ये काम करना बंद कर देते हैं। मरीज की नाड़ी कभी तेज, कभी धीरे चलने लगती है। बीपी लो हो जाता है।
Published on:
16 Oct 2022 03:51 pm
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