
भिण्ड। कलेक्टर के अवकाश पर जाते ही बोर्ड परीक्षाओं में ड््यूटी देने से पहले आयोजित प्रशिक्षण अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गया। 70 फीसदी टीचरों अव्यवस्थाओं का फायदा उठाकर हस्ताक्षर करने के बाद ही गायब हो गए, जबकि 100-100 किमी दूर से आए टीचर शाम तक भूखे प्यासे लटके रहे। प्रशिक्षण से शिक्षा विभाग के अधिकांश अधिकारी भी गायब रहे।
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परीक्षा में ड्यूटी देने वाले शिक्षकों को बोर्ड के नियमों से अवगत कराने के लिए कलेक्टर के निर्देश पर रविवार को प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। सभी 6 विकासखंडों के लिए ६ हजार से अधिक प्राइमरी तथा माध्यमिक के टीचरोंं को प्रशिक्षण देेने के लिए विद्यावती कालेज तथा इसी कैंपस में चल रहे दूसरे श्रीराम कालेज में मैसेज भेजकर बुलाया गया।
इतनी बड़ी संख्या में टीचरों को प्रशिक्षण देने के लिए न तो पर्याप्त स्थान था न ही प्रशिक्षक। विद्यावती में दो कमरे खुले होने और टीचरों की संख्या अधिक होने के कारण खुले मैदान में बैठा दिया गया। वहीं श्रीराम कालेज का एक हॉल खुला हुआ था इसी में एक साथ पंांच सैकड़ा से अधिक टीचरों को बैठाकर सिर्फ 15 मिनट में प्रशिक्षण खत्म कर दिया गया। भीड़ और शोरगुल के कारण पीछे खड़े टीचरों को कुछ सुनाई नहीं दिया। जिस समय प्रशिक्षण चल रहा था उसी समय बाहर बड़ी संख्या में टीचर पत्रक पर हस्ताक्षर करने में जुटे थे।
अव्यवस्था का आलम ये था कि लहार विकास खंड के टीचरों को सुबह 10 बजे प्रशिक्षण के लिए बुलाया था, लेकिन दोपहर दो बजे तक प्रशिक्षण शुरू नहीं हो पाया। प्रशिक्षण स्थल पर पेयजल और भोजन की व्यवस्था न होने के कारण महिला टीचरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। भिण्ड, अटेर और मेहगांव के टीचर तो पत्रकों पर हस्ताक्षर करने के बाद भी गायब हो गए। प्रशिक्षण स्थल पर न तो डीईओ थे और न ही एडीपीसी, सहायक संचालक और न ही बीईओ, बीआरसी। डीईओ ऑफिस से आए कर्मचारी भी टीचरों को जानकारी देने के बजाय एक कमरे में बैठे थे।
शिक्षा विभाग के अधिकारी बोर्ड परीक्षाओं को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं, इसका अंदाजा अव्यवस्थाओं से लगाया जा सकता है। कलेक्टर के जाते ही प्रशिक्षण की रस्म अदायगी कर दी गई। टीचरों को सुबह से बुलाया लिया गया। कोई जवाब देने वाला ही नहीं था।
संतोष लहारिया
70 किमी से आए हैं,यहां पर 10 बजेे ही आ गए थे। परंतु दोपहर तक तो यह भी पता नहीं था, प्रशिक्षण होना है की नहीं, यहां पर तो कोई जानकारी देने वाला ही नहीं हैं। खाना की तोछोड़ो पानी तक नसीब नहीं है।
राजेश सिंह शामावि महुआ पी- 20
75 किमी दूर से आया हूं वो भी दूसरे का सहारा लेकर। प्रशिक्षण का समय १० बजे था, एक बजे भी कोई जानकारी, नहीं कोई कुछ बता भी नहीं रहा है।
राजाराम गुप्ता दिव्यांग टीचर शाप्रावि बहुआ
100 किमी दूर से आया हूॅ। घर से 7 बजे चलकर 10 बजे आ गया था। कौन से ब्लाक का प्रशिक्षण कहां हो रहा पता ही नहीं चल रहा। किराया भी जेब से भरा है।
सुरेंद्र ङ्क्षसह कौरव शाकमावि आलमपुर
डीईओ कोर्ट में हैं, मेरे पास रात के समय कॉल आया था। मेरे से सिर्फ यह कहा गया था, कि प्रशिक्षण मेंं चले जाना, मुझे कोई जिम्मेदारी संभालने के लिए नहीं कहा गया है।
पीएस चौहान प्राचार्य शाउत्कृष्ट उमावि नं.1 भिण्ड
Published on:
26 Feb 2018 03:54 pm
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