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मेला प्रबंधन का बड़ा कारनामा: मेला अवधि में मैरिज गार्डन में हुईं शादियां, बिना परमिशन दिए कराए अवैध निर्माण

ग्वालियर व्यापार मेले के दौरान मेले की ओर से संचालित मैरिज गार्डन में १० दिसंबर से २० फरवरी तक शादी-विवाह, मांगलिक व

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gwalior vyapar mela

ग्वालियर। ग्वालियर व्यापार मेले के दौरान मेले की ओर से संचालित मैरिज गार्डन में १० दिसंबर से २० फरवरी तक शादी-विवाह, मांगलिक व सामाजिक कार्य नहीं हो सकते, लेकिन मेला प्रबंधन ने ठेकेदारों से पैसे लेकर शादी कराने की परमिशन मौखिक दे दी। इस अवधि के दौरान मृगनयनी, कुसुमाकर रंगमंच, मंगल वाटिका और संस्कृति गार्डन में लगभग २० शादियां हुईं, जबकि मेले द्वारा निविदा संबंधी शर्तों के अनुसार इस दौरान कोई भी फंक्शन इन गार्डन में नहीं हो सकता। लेकिन, नियम ताक पर रख मेला प्रबंधन के जेब भरने का कारनामा खूब फलता-फूलता रहा।

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निविदा संबंधी शर्तों के अनुसार मेले के मैरिज गार्डन में किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं हो सकता। यदि कोई करता है, तो उसमें मेला प्रबंधन की परमिशन लेनी होगी और वह नव-निर्मित संपत्ति मेले की हो जाएगी। लेकिन मेला प्रबंधन से सांठगांठ कर ठेकेदारों ने गार्डन में अपनी सुविधाओं के अनुसार रूम, टॉयलेट, हलवाई शेड स्थायी रूप से बना लिए हैं, जिनका उपयोग भी धड़ल्ले से हो रहा है। मेला प्रबंधन ने लिखित परमिशन तो नहीं दी, लेकिन हर गार्डन से लाखों रुपए डकारकर निर्माण की मौखिक अनुमति जरूर दे दी। आज हर गार्डन में सभी प्रकार की व्यवस्थाएं हैं, जबकि मेले द्वारा दिए गए गार्डन बाउंड्रीवॉल तक ही सीमित थे।

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हर गार्डन में हुआ स्थायी निर्माण, ठेकेदारों ने गार्डन के एक हिस्से का दिया उप ठेका
नॉम्स के अनुसार ठेकेदार किसी को भी मैरिज गार्डन की जगह रेंट पर नहीं दे सकता, लेकिन मेला प्रबंधन की मिली भगत से अधिकतर गार्डन में हलवाई को जगह दे रखी है, जहां से वह अपना व्यापार भी कर रहा है। उदाहरण के रूप में मृगनयनी गार्डन को लिया जा सकता है, जहां ठेके के बाद उप ठेका चल रहा है। खुलेआम नियमों की धज्जियां मेला प्रबंधन की साठगांठ से उड़ रही हैं और सभी मौन हैं। दोनों हाथों से जेब भरने का खुला धंधा चल रहा है, लेकिन चुप्पी तोडऩे को कोई भी तैयार नहीं। निविदा संबंधी शर्ते एवं संबंध के क्रमांक-१ के अनुसार प्रतिवर्ष शादी-समारोह, सामाजिक कार्यक्रम में ग्वालियर व्यापार मेले के कारण १० दिसंबर से 20 फरवरी तक की अवधि शामिल नहीं होगी।

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क्रमांक-६ में लिखा है ठेकेदार द्वारा उद्यान के लॉन या अन्य किसी संरचना में कोई परिवर्तन, नव निर्माण, मेला प्राधिकरण की लिखित अनुमति के बिना नहीं किया जाएगा।


-क्रमांक-१० के अनुसार निविदा के साथ संलग्न मानचित्र में वर्णित स्थान के अतिरिक्तअन्य स्थान का ठेकेदार उपयोग, उपभोग नहीं कर सकेगा और न ही उसे किराए पर दे सकेगा।


क्रमांक-२० के अनुसार ठेकेदार को अन्य किसी व्यक्ति, संस्था को हस्तांरित करने या उप ठेके पर देने का अधिकार नहीं होगा।
निविदा संबंधी शर्तें

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सीधी बात

Q.मेला अविध के दौरान कुछ गार्डन में शादियां नहीं हो सकती, फिर भी शादियां हुईं?
A.मुझे पता नहीं है। मैं दिखवाता हूं।


Q.नॉम्स के अनुसार मेला के बिना परमिशन गार्डन में कोई भी विकास कार्य नहीं हो सकते, जबकि हर गार्डन में डवलपमेंट हुआ है?
A.आपके पास नॉम्स कहां से आए। मुझे कुछ भी पता नहीं है। मैं दिखवाता हूं।

Q.कोई भी ठेकादार गार्डन की जगह को उप ठेके पर नहीं दे सकता? जबकि किराए पर जगह दी गई हैं?
A.मुझे जानकारी नहीं है। मैं दिखवाता हूं।

ठेकेदारों से मिलीभगत
सूत्रों के अनुसार मेला प्रबंधन ने शादी कराने के लिए हर फंक्शन में एक से डेढ़ लाख रुपए लिए। इनमें से एक लाख रुपया ठेकेदार को बचा। प्रत्येक गार्डन के एक शादी का किराया लगभग ढाई लाख रुपए है।

नोट: स्टोरी से जुड़े तथ्यों की कॉपी पत्रिका के पास है।