30 किलोमीटर दूर स्थित पढ़ावली की गढ़ी स्थापत्य कला का अनुपम नमूना है। 10वीं शताब्दी में प्रतिहार राजाओं द्वारा निर्मित यह मूलत: विष्णु मंदिर है। छत पर ब्रह्मा, शिव परिवार, सूर्य, शिव विवाह, विष्णु के दशावतार, कृष्ण लीला, गंधर्व, गायक आदि की कलात्मक मूर्तियां उकेरी गई हैं। पच्चीकारी के मामले में इसे 'मिनी खजुराहोÓ भी कहा जाता है। पढ़ावली को सांसद आदर्श गांव घोषित करने के बाद पर्यटन सुविधाएं विकसित करने की कवायद और तेज हुई है।