
भारत सरकार ने दावा किया है कि ग्वालियर शहर
ग्वालियर। भारत सरकार की ओर से ग्वालियर को यूनेस्को में सिटी ऑफ म्यूजिक के रूप में पहचान दिलाने के लिए मजबूत दावेदारी पेश की है। दावेदारी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते समय में प्रदेश स्तर पर तैयार हुई रिपोर्ट में ग्वालियर को 128 नंबर मिले हैं, जबकि भोपाल को 126 और चंदेरी को 124 नंबर मिले हैं। मई के आखिर तक दावेदारी को लेकर तैयार ड्राफ्ट केन्द्र सरकार के पास भेजा जाएगा।
जून में केन्द्र सरकार यह प्रस्ताव यूनेस्को (UNESCO ) को भेजेगी। इसके बाद सितंबर अंत तक यूनेस्को द्वारा प्रस्ताव का मूल्यांकन किया जाएगा और सब कुछ सही रहा तो नवंबर में परिणाम घोषित होने के साथ ही शहर को संगीत का शहर के रूप में पहचान मिलने की संभावना है। दावेदारी को लेकर हुए प्रजेंटेशन के दौरान ग्वालियर में बनाए गए डिजिटल संगीत म्यूजियम को सराहना मिली है। इसके साथ ही प्रजेंटेशन के दौरान बताया गया कि संगीत की हर विधा और युवा वर्ग को जोडऩे के लिए शहर में प्लेटफॉर्म मौजूद हैं। जबकि वाद्ययंत्रों का निर्माण करने वाले कारीगर और वाद्ययंत्रों को खरीदने वालों को ग्रामीण हाट बाजार में प्लेटफार्म उपलब्ध कराया जाएगा। प्रजेंटेशन के दौरान ध्रुपद को लेकर बनाए गए विशेष लोगो को भी संस्कृति विभाग के पीएस ने सराहा है।
वीसी के जरिये हुआ प्रजेंटेशन
सिटी ऑफ म्यूजिक के रूप में यूनेस्को में दावेदारी पेश करने के लिए स्मार्ट सिटी सीईओ जयति सिंह की अगुवाई में प्रजेंटेशन तैयार किया गया है। यह प्रजेंटेशन शनिवार को बेल्जियम से सलाहकार मिस्टर ग्रेट, संस्कृति विभाग के पीएस शिवशेखर शुक्ला, संभागायुक्त आशीष सक्सेना, कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह, निगमायुक्त शिवम वर्मा, संगीत विश्वविद्यालय के कुलपति, संगीत विभाग की एचओडी सहित अन्य विशेषज्ञ संगीतज्ञों ने देखा। स्मार्ट सिटी सीईओ ने प्रजेंटेशन के एक-एक पॉइंट को विस्तार से वरिष्ठ अधिकारियों को समझाया।
इन बिंदुओं के आधार पर मिली मजबूत दावेदारी
यह होगा फायदा
इतिहास में भी रही पहचान
महाराजा मानसिंह, संगीत सम्राट तानसेन, बैजू बावरा, उस्ताद अमजद अली खां की छेड़ी तानों ने ग्वालियर को एतिहासिक काल से ही गीत संगीत की महफिलों में अलहदा पहचान दिलाई है। आधुनिक इतिहास में मुगल सम्राट अकबर ने जहां संगीत सम्राट तानसेन की प्रतिभा का कायल होकर अपने नवरत्नों में शामिल किया, वहीं मध्यकालीन इतिहास में सम्राट हर्षवर्धन ने पद्मावती नगरी (वर्तमान में धूमेश्वर-पवाया) को संगीत और नाट्य शास्त्र की साधना स्थली बनाया। समकालीन इतिहास के प्रसिद्ध संगीतकार और ग्वालियर के राजा मानसिंह ने संगीत की अपनी विशेषज्ञता के साथ छाप छोड़ी और स्थानीय संगीत को ग्वालियर घराने के रूप में अंतर राष्ट्रीय पहचान मिली है। वर्तमान में कई संगीतकार ग्वालियर घराने का नाम रोशन कर रहे हैं। रियासतकाल में कहा जाता था कि इस धरती की रग रग मेंसंगीत बसता है। अब उसको पहचान दिलाने के लिए फिर से प्रयास शुरू हुए हैं।
स्मार्ट सिटी सीईओ जयति सिंह के मुताबिक ग्वालियर को यूनेस्को में शामिल कराने के लिए प्रस्ताव तैयार किया है। इसको लेकर पीएस, संभागायुक्त, कलेक्टर को प्रजेंटेशन दिखाया गया है।अब यह प्रस्ताव केन्द्र सरकार के माध्यम से भेजा जाएगा। हमारी दावेदारी प्रबल है। इस तैयारी के परिणाम नवंबर तक आने की संभावना है।
Published on:
23 May 2021 09:21 am
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