4 सितंबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

गुप्त नवरात्र : यहां माता के चरणों में बना है जल कुण्ड,कभी नहीं सूखता इसका पानी,कुछ ऐसी है मां की महिमा

माता बहरारा मंदिर है पाण्डव कालीन,माता के दर्शन करने आते हैं हजारों लोग
2 min read
Google source verification
mata mandir

गुप्त नवरात्र : माता बहरारा मंदिर है पाण्डव कालीन,माता के दर्शन करने आते हैं हजारों लोग

ग्वालियर। देश में हिन्दू धर्म के अनुसार देवी की साधना के लिए साल में चार नवरात्र आती हैं। जिसमें आषढ और माघ मास में मनाई जाने वाली गुप्त नवरात्र भी है। इस बार आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि 13 जुलाई से शुरू हो रही है जो कि 21 जुलाई तक है। गुप्त नवरात्रि शनि पुष्य संयोग में शुरू होगी और आठ दिन की रहेगी। जिसके हिसाब से 21 जुलाई शनिवार को ही देश और प्रदेश में नवमी मनाई जाएगी। 13 जुलाई को सुबह 5.57 से 9.07 तक सर्वार्थ सिद्धि योग है जिसमें मां की पूजा और साधना करना अति उत्तम होता है। साथ ही गुप्त नवरात्रों में मां भगवती की पूजा की जाती है और मां भगवती के सभी नौ रूपों की पूजा नवरात्रों के भिन्न-भिन्न दिन की जाती है।

यह भी पढ़ें : गुप्त नवरात्र : नौ दिनों ऐसे करें मां की तंत्र साधना और चमकाए अपना भाग्य

ग्वालियर चंबल संभाग में माता रानी का एक ऐसा मंदिर है जहां हजारों की संख्या में भक्त मां के दर्शन करने के लिए आते है। यह मंदिर है मुरैना से लगभग 70 किलोमीटर की दूरी एवं कैलारस से लगभग 20 किलोमीटर दूरी पर माता बहरारे का मंदिर स्थित हैं। यहां प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने के लिए आते है।बहरारे वाली माता मंदिर से लोगों की अटूट श्रद्धा और आस्था जुडी हुई है। मंदिर में माता के चरणों में जल कुण्ड है इसका जल कभी भी नहीं सूखता है। ऐसा बताया जाता है कि इस जल को ग्रहण करने वाले की हर मनोकामना पूर्ण होती है और सारे रोग दोष क्लेश नष्ट हो जाते है।

यह भी पढ़ें : गुप्त नवरात्र : राशि के अनुसार नवरात्र में इन वस्तुओं का दान करने से चमक जाती है आपकी किस्मत

माता के मंदिर की महिमा दूर दूर तक फैली है जिसके चलते प्रति माह यहां माता की जात लगाई जाती है। मंदिर पर दर्शन करने के लिए श्रद्धाभाव से लोग पैदल और कनक दण्ड देते आते है।

यह भी पढ़ें : गुप्त नवरात्र : आंखों की डॉक्टर के रूप में प्रसिद्ध हैं यह माता, आज तक आपने नहीं देखा होगा ऐसा चमत्कार

साथ ही माता मंदिर पर पर चैत्र और क्वार के माह में नवरात्रि में विशेष मेले का अयोजन किया जाता है मेले में सभी प्रकार की दुकानें,मनोरंजन के लिए झूले,सिनेमा और श्रगांर से लेकर बच्चों के खेलने की सामग्री आदि कई रोजमर्रा की जरूरत के सामन की दुकानें सजाई जाती है रात्रि में माता के दरबार में धाम का आयोजन किया जाता है।

यह भी पढ़ें : गुप्त नवरात्रि में ऐसे करें देवी मां की आराधना,बदल जाएगी आपकी किस्मत

माता के मंदिर का इतिहास
बहरारे वाली माता के मंदिर के बारे में गांव के वृद्ध लोगों ने बताया कि यहां माता को पाण्डव लाए थे और उन्होंने ही माता की प्रतिष्ठा कराई थी। उस समय यहां बहुत ही घना जंगल था और दूर-दूर तक कोई भी नहीं रहता था। उसके बाद संवत 1152 में विहारी ने बहरारा बसाया था। तदुपरांत सम्बत 1621 में खाडेराव भगत ने वहरारा माता के मंदिर का निर्माण कराया था। तब से लेकर आज तक मांदिर परिसर को श्रद्धालुओं के सहयोग से विकसित किया गया है।