
Gwalior court removes Deputy Commissioner- Demo Pic
Gwalior Highcourt- एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने अहम फैसला सुनाते हुए ग्वालियर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के तत्कालीन संपदा अधिकारी डॉ. दिनेश दीक्षित का निलंबन बहाल कर दिया। कोर्ट ने कहा, आरोपों का सामना कर रहे अधिकारी को इसलिए जांच से नहीं बचाया जा सकता कि वह सरकार का चहेता है। उन्हें अभी जीडीए भेजकर बिना किसी पदभार के निलंबित रखे जाने के आदेश दिए गए हैं। बता दें कि डॉ. दिनेश दीक्षित के पक्ष में प्रदेश के 3 मंत्रियों ने नोटशीट चलाई थी।
सिंगल बेंच का निलंबन रद्द करने वाला आदेश निरस्त करते हुए अदालत ने विभागीय जांच जारी रखने के निर्देश दिए गए है। सुनवाई में सामने आया कि मूल रूप से पशु चिकित्सक डॉ. दीक्षित को नियमों को दरकिनार कर नगर निगम में उप आयुक्त पद पर नियुक्ति दी थी।
रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट हुआ कि तीन मंत्रियों की लगातार नोटशीट के बाद प्रतिनियुक्ति का रास्ता बनाया गया, जबकि निगम ने पद की योग्यता और वेतनमान अलग होने की आपत्ति दर्ज कराई गई थी। इसके बाद उन्हें जीडीए में संपदा अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी सौंप दिया गया था।
राजनीतिक प्रभाव के आधार पर मलाईदार पदों पर तैनाती और भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े इस मामले में ग्वालियर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सख्ती दिखाई। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि डॉ. दीक्षित को मूल पशुपालन विभाग से तत्काल कार्यमुक्त कर जीडीए भेजा जाए, जहां वे बिना किसी पदभार के निलंबित रहेंगे।
मामले में सक्षम प्राधिकारी को तय समय-सीमा में विभागीय आरोप-पत्र (चार्जशीट) जारी करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि समय पर चार्जशीट जारी नहीं की गई तो आरोपी अधिकारी को अनुचित लाभ देने का प्रयास माना जाएगा।
Gwalior कोर्ट ने कहा कि प्रदेश के 3 मंत्रियों की नोटशीट में उप आयुक्त का उल्लेख हुआ है। प्रदेश के नगर विकास मंत्री, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री और नर्मदा घाटी विकास विभाग के मंत्री की ओर से नोटशीट लिखकर प्रतिनियुक्ति के लिए लगातार दबाव बनाया गया। मंत्रियों के भारी दबाव में नगर निगम और जीडीए में गैर-कैडर तैनाती की गई। पशु चिकित्सक को नियम ताक पर रख उप आयुक्त बना दिया गया।
Updated on:
08 Aug 2026 01:39 pm
Published on:
08 Aug 2026 12:55 pm
