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Gwalior Rain: पानी उतरा बर्बादी के निशां छूटे, घर लौटकर रूआंसे हुए ग्रामीण बोले…बह गया सब, अब क्या करेंगे…?

Gwalior Rain: भारी बारिश ने नोन नदी के किनारे बसे गावों में सबसे ज्यादा कहर बरपाया, यहां घर अब घर नहीं….बर्बादी के खाली मकान हो गए, कुछ बह गए, कुछ ढह गए… ना खाने का सामान, ना पीने को साफ पानी, सिर्फ बेबसी और घबराहट... कि अब कैसे…क्या होगा…ग्वालियर-चंबल में कई गांवों बाढ़ का पानी उतरा तो लोग घर लौटे, सरकारी अमला नुकसान का जायजा लेने पहुंचा, तो इधऱ पत्रिका टीम भी पहुंच गई…पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट…

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Gwalior Rain: अति भारी बारिश थमते ही नदी-नालों का पानी उतर गया। पानी उतरते ही गांवों में लोग अपने घरों में लौट रहे हैं। लेकिन अब उनके घर घर नहीं रहे, बर्बादी के खाली मकान बन गए। हजारों कच्चे घर बह गए, कुछ कमजोर घर ढह गए…गृहस्थी का सामान मलबे में दबा है…

सालभर का इकट्ठा राशन कहीं भीग गया तो कहीं, बह गया। अब ग्रामीणों के सामने है जिंदगी की जद्दोजहद और मुश्किल हालात…। सिरसा, सेकरा, सिरोल गांवों में हालात बदतर हैं। खाने-पीने को बेबस हो गए हैं ग्रामीण। अपने घर की हालत देखकर चिंतित हैं, तो बेचैनी ये भी कि अब समय कैसे कटेगा। पत्रिका टीम ने इन तीन गांवों में पहुंचकर लोगों से उनका हाल जाना… पढ़ें लाइव रिपोर्ट…

खरीफ की फसल पानी से बर्बाद हो चुकी है। रबी की फसल के लिए सात महीने का इंतजार करना होगा। वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे के लिए राजस्व निरीक्षक-पटवारियों को भेजा है। इस सर्वे में घर, अनाज, पशु हानि और फसल के नुकसान का अनुमान लगाया जाएगा।

अंचल में अति बारिश से सिंध और पार्वती नदी की अपेक्षा नोन नदी ने ज्यादा कहर बरपाया है। इस नदी के किनारे बसे गांवों में पानी घुस गया, जिससे ज्यादा नुकसान हुआ। सिरसा, सेकरा, सिरोल, खेड़ी रायमल दोनी, मैना, बेरखेरा, नोन की सराय, दौलतपुर, मिलघन, धिरोरा, देवरा, नुन्हारी, मसूदपुर, किशोल, लिधौरा गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।

बाढ़ का पानी घर में आने पर यहां ग्रामीणों को दूसरी जगहों पर शरण लेनी पड़ी। पानी उतरते ही ग्रामीण घर वापस पहुंचे, तो बदहाली देख उदास हो गए। घर का सामान मलबे से निकाला। पशुओं के लिए रखा भूसा भी नदी में बह गया है।

सब्जी और दलहन की फसलें खराब, ज्वार-बाजरा सड़ने का डर

-अतिवृष्टि से सब्जी और दलहन की फसलें ज्यादा प्रभावित हुई हैं। उड़द, मूंग सड़ गए हैं, क्योंकि सितंबर में ये फसलें कटना शुरू हो जाती हैं। ज्वार-बाजरा तेज हवा की वजह से जमीन पर लेट गए, अब इनके सड़ने की चिंता सता रही है।

- नदियों के किनारे धान की फसलें दो दिन तक पानी में डूबी रहीं। धान की फसल भी खराब हो गई। नदी का पानी खेतों को…खेतों की मिट्टी को बहा ले गए। अब यहां बर्बादी के निशां छूटे हैं।

कच्चे घर ज्यादा गिरे, कई पानी से कमजोर हो गए

-जिले में लगातार 36 घंटे बारिश अतिभारी बारिश हुई। जिससे कच्चे घरों में रहने वाले लोगों को सबसे ज्यादा मुश्किलें हुई हैं। कई घर बह गए, कई ढह गए। कई घरों की दीवारें लगातार बारिश और बाढ़ के पानी से कमजोर हो चली हैं, ये कभी भी गिर सकते हैं…।

- प्रशासन ने कच्चे घरों का भी सर्वे शुरू किया है। कच्चे मकान हर गांव में गिरे हैं, क्योंकि लंबे समय से यहां लगातार बारिश नहीं हुई है। इसके चलते लोगों ने बारिश की तैयारियां पहले नहीं कीं।

सिरोल चौराहे पर टूटी सड़क, दुकानों में भी भरा पानी


बारिश थमने के बाद मुरार नदी का पानी भी उतर गया, लेकिन बारिश की वजह से सिरोल चौराहे से फूटी कॉलोनी की ओर जाने वाली आधी सड़क टूट गई। चौराहे पर दुकानों में पानी भर गया था। बेसमेंट से पानी निकालने के लिए मोटर लगाई। दुकानदार अपने सामान बाहर निकाल रहे थे। इसके अलावा जिन लोगों के घरों में पानी भर गया था, उन्होंने भी सामान बाहर निकाला।

-नमामी गंगे के तहत नदी का सौंदर्यीकरण किया गया था। नदी में आई बाढ़ से सारा सौंदर्यीकरण का निर्माण बह गया है। नैनागिर के पास ग्वालियर बायपास के लिए जाने वाली सड़क पर बनी पुलिया भी टूट गई।

-नदी में बाढ़ का पानी उतरने के बाद नदी से हुए नुकसान को देखने के लिए लोग सिरोल पहुंचे। पुलिस बल भी तैनात रहा।

सालभर का राशन रखा, सब खराब हो गया

घर के हालात देख रोना आ रहा है

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