
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : कहा- तीसरा बच्चा हुआ तो नौकरी के लायक नहीं है आप, जानिये क्या है मामला
ग्वालियर/ जन संख्या नियंत्रण को लेकर कानून लाने जा रही उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के बीच जब मध्य प्रदेश में भी इस कानून को लाने की चर्चाएं तेज होने लगी है। इसी बीच प्रदेश की ग्वालियर हाईकोर्ट (Gwalior High Court) की डबल बेंच ने इसी से जुड़ा फैसला सुना दिया है। हाईकोर्ट की ग्वालियर बैंच द्वारा लिया गया ये फैसला प्रदेशभर में काफी चर्चा का विषय बन गया है।
कोर्ट ने सुनाया ये फैसला
दरअसल, ग्वालियर हाईकोर्ट ने नौकरी से अयोग्य करार दिये सहायक बीज प्रमाणन अधिकारी की अपील को खारिज कर दिया। नौकरी के दौरान तीसरा बच्चा होने पर सहायक बीज प्रमाणन अधिकारी को सरकारी सेवा में अयोग्य करार दिया था। इस आदेश के खिलाफ अधिकारी ने हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने अपील खारिज करते हुए कहा- '26 जनवरी 2001 को कानून लागू हुआ है, इसके बाद तीसरा बच्चा हुआ तो सिविल सेवा अधिनियम 1961 (Civil Services Act 1961) के तहत सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माना जाएगा, लिहाजा आप नौकरी के लायक नहीं।'
इस मामले पर कोर्ट ने सुनाया फैसला
आपको बता दें कि, साल 2009 में व्यापमं के माध्यम से आयोजित सहायक बीज प्रमाणन अधिकारी की परीक्षा लक्ष्मण सिंह बघेल ने भी दी थी। बघेल का मेरिट लिस्ट में 7वांनाम आया। खास बात ये है कि फार्म जमा करने के दौरान 30 जून 2009 को बघेल के 2 बच्चे थे, वहीं 20 नवंबर को बघेल के घर तीसरे बच्चे का जन्म हुआ। विभाग द्वारा ज्वाइनिंग के वक्त बघेल का वेरिफिकेशन किया गया। उन्होंने ज्वाइनिंग के समय शपथ पत्र में तीसरी संतान की बात छिपा ली, लेकिन मूल निवासी प्रमाण पत्र और राशनकार्ड में तीसरी संतान की जानकारी सामने आ गई। इसी आधार पर बाद में मामला विभाग के संज्ञान में आ गया, जिसके जवाब में लक्ष्मण सिंह ने शपथ पत्र में तीसरे बच्चे का जन्म 2012 में बताया था; तथ्यों को छिपाने के चलते विभाग ने लक्ष्मण सिंह के खिलाफ एफआईआर की अनुशंसा कर दी।
हाईकोर्ट की डबल बैंच ने भी राहत न दी
याचिकाकर्ता लक्ष्मण सिंह का कहना है कि, जब आवेदन किया था उस समय वो दो बच्चों के पिता थे। परीक्षा देने के बाद तीसरे बच्चे का जन्म हुआ, इसलिए कानून उसके ऊपर लागू नहीं होना चाहिए। इसमें तर्क था कि उम्मीदवार की योग्यता आवेदन जमा करने की तिथि से मापी जाती है। याचिकाकर्ता को नियुक्ति के बाद बच्चा हुआ, लिहाजा उसे अयोग्य ठहराना गलत है। बता दें कि, सिंगल बैंच द्वारा याचिका खारिज किये जाने के बाद लक्ष्मण ने डबल बैंच पर अपील की, जहां न्यायमूर्ति शील नागू एवं न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने लक्ष्मण सिंह अपील खारिज करते हुए कहा कि, इस मामले में सिंगल बैंच द्वारा दिए गए आदेश से अलग दृष्टिकोण अपनाए जाने का कोई कारण नहीं दिखता है, लिहाजा लक्ष्मण सिंह बघेल को कोई राहत नहीं होगी। साथ ही ये भी कहा कि, 26 जनवरी 2001 के बाद तीसरा बच्चा हुआ इसलिये लक्ष्मण नौकरी के लायक नहीं।
जनसंख्या नियंत्रण के लिए बना एमपी सिविल सेवा अधिनियम-1961
आपको बता दें कि, मध्य प्रदेश सिविल सेवा अधिनियम-1961 के तहत, जिनके तीसरे बच्चे का जन्म 26 जनवरी 2001 के बाद हुआ उनको सरकारी नौकरी नहीं मिल सकती।महिला हो या पुरुष, सभी पर ये कानून ये लागू होने के बाद अगर तीसरा बच्चा होता है, तो वो सरकारी नौकरी पाने के लिये अयोग्य होगा। उसे सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी और न ही शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। इस कानून में तथ्य छिपाकर नौकरी करने पर सख्त कार्रवाई का भी प्रावधान है।
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Published on:
14 Jul 2021 04:19 pm
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