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अपनी आंखें खोलिए साहब, आपके आदेश निर्देश से बदलाव नहीं, 3000 नोटिस भी बेअसर

MP News: फायर सेफ्टी पर सिर्फ गाल बजाते जिम्मेदार, मध्य प्रदेश के ग्वालियर का मामला, कई दिशा-निर्देश, चेतावनी और 3000 नोटिस भी बेअसर, पत्रिका की पड़ताल में सामने आया सच...

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MP News: आगजनी की हर बड़ी घटना के बाद अधिकारियों को नियम याद आ जाते हैं। फिर शुरू होता है दिशा निर्देश जारी करने का सिलसिला। फायर सेफ्टी को लेकर जिम्मेदार सिर्फ गाल बजा रहे हैं। इनकी तरफ से चेतावनी दी जाती है और थोक में नोटिस थमाए जाते हैं। अब तक 3000 से अधिक नोटिस थमाए जा चुके हैं। अनेक बार दिशानिर्देश और चेतावनी दी गई, तब भी किसी पर कोई फर्क नहीं पड़ा।

पत्रिका पड़ताल में बड़ा खुलासा

यह बात पत्रिका की पड़ताल में सामने आई, जब संभागायुक्त और कलेक्टर से लेकर निगमायुक्त जैसे प्रशासनिक अधिकारियों ने इस तरफ का रुख नहीं किया। नगर निगम के फायर विभाग की ओर से अब तक 3000 से अधिक संस्थानों को नोटिस थमाए जा चुके हैं। इसी तरह प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने करीब 200 अस्पतालों को और स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी करीब 300 अस्पतालों को नोटिस थमाकर चुप्पी साध ली। संभागीय आयुक्त के पत्र के बाद अब फिर से फायर, प्रदूषण और स्वास्थ्य विभाग ने संस्थानों को नोटिस जारी करने की कवायद शुरू कर दी है।

15 अप्रेल डेट की निर्धारित

ताजा मामले में फायर सेफ्टी ऑडिट, नियम में किसी भी तरह का समझौता नहीं किए जाने की चेतावनी दी। नियमों की पूर्ति के लिए 15 अप्रेल की डेटलाइन भी निर्धारित की। पत्रिका ने संभागायुक्त व कलेक्टर के अलग-अलग समय पर दिए दिशा निर्देश और बैठकों की पड़ताल की तो सामने आया कि सिर्फ चेतावनी देकर भूल गए। कमलाराजा हॉस्पिटल में लगी आग के बाद फिर से संभागायुक्त ने सरकारी व निजी में फायर सेफ्टी का आदेश दिया है।

इन घटनाओं के बाद याद आए थे नियम


जेएएच एक साल में दो आग की घटनाएं हो चुकी हैं। इन घटनाओं के बाद अस्पतालों का फायर सेफ्टी ऑडिट का फैसला लिया गया था। जेएएच में आग की घटनाएं नहीं रुकी।


रंगमहल गार्डन में लगी आग के बाद निजी संस्थानों में फायर सेफ्टी का फैसला लिया गया। मैरिज गार्डन ने भी फायर एनओसी नहीं ली है। इनकी भी जांच नहीं की गई है।


गुजरात में कोचिंग में लगी आग के बाद शिक्षण संस्थानों की जांच के लिए दल बनाया गया। कोचिंग भी तंग गली व बिल्डिंगों में चल रही हैं, जहां पर फायर सेफ्टी के इंतजाम नहीं है।


एक साल का रिपोर्ट कार्ड


22 अप्रेल 2024 को कलेक्टर ने फायर ऑडिट के लिए दल गठित किए। नियमों के पालन के लिए संस्थानों को 15 दिन का समय दिया था।


7 जून 2024 को कलेक्टर ने फॉयर ऑडिट के निर्देश दिए।


7 सितंबर 2024 को संभागायुक्त ने सरकारी व निजी अस्पतालों में सुरक्षा के उपाय के साथ न किए जाने की चेतावनी दी। 15 दिन में एनओसी प्राप्त करने के लिए कहा।


5 नवंबर 2024 को मेले में फायर और विद्युत के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश संभागायुक्त ने दिए, लेकिन मेला में भी आग लगी।


26 मार्च 2025 को आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए कलेक्टर ने एडवायजारी जारी की।


3 अप्रेल 2025 को संभागायुक्त ने सरकारी व निजी अस्पतालों में फायर सेफ्टी के इंतजाम के आदेश दिया।


14 जुलाई 2023 को कलेक्टर ने कोचिंग संस्थानों की फायर सेफ्टी ऑडिट का आदेश दिया।

घटना को देखते हुए सीएमएचओ को पत्र जारी किया गया है

घटना को देखते हुए सीएमएचओ को पत्र जारी किया गया है। जिससे अस्पतालों घटना घटित न हो। मरीज सुरक्षित रहें। इसका कुछ समय बाद फिर से रिव्यू किया जाएगा।

-मनोज खत्री, संभागायुक्त ग्वालियर

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