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नीम चंदोहा की 170 बीघा जमीन का विवाद सुलझा, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

MP High Court: हाईकोर्ट की एकल पीठ ग्वालियर ने सुनाया फैसला, कलेक्टर और अतिरिक्त आयुक्त का आदेश रद्द करते हुए सुलझाया नीम चंदोहा की 170 बीघा जमीन का विवाद...

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MP High Court

MP high court Gwalior (फोटो सोर्स: सोशल मीडिया)

MP High Court: हाईकोर्ट की एकल पीठ ने नीम चंदोहा की 170 बीघा जमीन को लेकर चल रहे विवाद पर अपना फैसला सुना दिया। कोर्ट ने कलेक्टर व अतिरिक्त आयुक्त के आदेश को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ताओं के नाम जमीन करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि कलेक्टर के आदेश को बरकरार नहीं रखा जा सकता है।

ये है मामला

दरअसल नीम चंदोहा हल्के पर आदिवासियों को जमीन पट्टे पर दी गई थी। गुरुचरण सिंह ने आदिवासियों से जमीन को खरीद लिया, लेकिन कलेक्टर ने मामले को स्वत: संज्ञान लेते हुए आदेश पारित किया कि जमीन आदिवासी समाज की है। इसका विक्रय नहीं किया जा सकता है। कलेक्टर के आदेश के खिलाफ गुरुचरण सिंह ने अपील की। संभागायुक्त के यहां से भी गुरुचरण सिंह केस हार गए। इसके बाद 2009 में गुरुचरण सिंह अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

2009 में अंतिम बहस

2009 से याचिका लंबित थी। इस पर 18 जून को अंतिम बहस हुई। गुरुचरण सिंह अन्य की ओर से तर्क दिया कि जमीन को कलेक्टर की अनुमति के बाद खरीदा था। राजस्व अधिकारी जमीन को राजस्व रिकॉर्ड में उनके नाम नहीं कर रहे हैं। इस याचिका में 73 लोग प्रतिवादी थे। उनकी ओर से विरोध किया गया कि जिन लोगों से जमीन खरीदना बताया है, वह नाबालिग थे। इसलिए जमीन बिक नहीं सकती है। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुना दिया। जमीन गुरुचरण सिंह अन्य के नाम राजस्व रिकॉर्ड में करने का आदेश दिया है।

केदारपुर व चंदोहाखुर्द में मिली भूमि, सेनेटरी लैंडफिल साइट बनेगी

हाईकोर्ट की युगल पीठ में नगर निगम ने उस जनहित याचिका में पालन प्रतिवेदन रिपोर्ट पेश कर दी, जिसमें केदारपुर लैंडफिल साइट पर एकत्रित कचरे के निस्तारण का प्लान पूछा था। निगम की ओर से तर्क दिया कि केदारपुर में 16.501 हेक्टेयर भूमि व चंदोहाखुर्द में 3.756 हेक्टेयर भूमि आवंटित कर दी है। जमीन मिलने के बाद सेनेटरी लैंडफिल साइट की स्थापना के लिए संशोधित डीपीआर तैयार की जा रही है। इसके अलावा बायो सीएनजी प्लांट लैंडफिल साइट पर ही शुरू करने का प्लान है। जनहित याचिका पर 26 जून को सुनवाई होगी।

ये है मामला

दरअसल सरताज सिंह तोमर ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि केदारपुर लैंड फिल साइट पर कचरे का ढेर लगा हुआ है। इससे प्रदूषण फैल रहा है। लोग परेशान है, लेकिन नगर निगम कचरे को समाप्त करने की दिशा में कार्य नहीं कर रही है।

हाईकोर्ट ने नगर निगम से कचरा निस्तारण के संबंध में जवाब मांगा था। नगर निगम ने तीन प्लांट की रिपोर्ट पेश की, लेकिन जमीन बाधा बनी हुई। जमीन आवंटित नहीं हुई थी, जिससे चलते प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी थी। कलेक्टर ने भूमि आवंटित कर दी। जमीन आवंटन पर लोगों की आपत्तियां भी आई। लोगों ने प्रदूषण की संभावना को देखते हुए विरोध किया, क्योंकि जहां पर जमीन दी गई है, वहां स्कूल व कॉलोनी बस गई है। इन आपत्तियों को निरस्त किया गया है।

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