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हैंडओवर से पहले ही दम तोड़ रहे खेल मैदान

खिलाड़ियों को आधुनिक खेल सुविधाएं देने के नाम पर स्मार्ट सिटी ने लक्ष्मीबाई कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय (एमएलबी) के खेल मैदानों को करोड़ों रुपये की लागत से संवारा, लेकिन हैंडओवर से पहले ही इनकी सुविधाएं दम तोड़ने लगी हैं। निर्माण के बाद करीब एक साल से नियमित मेंटेनेंस नहीं होने से मैदानों की स्थिति बिगड़ती जा रही है।
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एक साल से मेंटेनेंस नहीं, करोड़ों से तैयार मैदानों में टूटा ओपन जिम, बदहाल टॉयलेट-नल और कंकड़ वाला वॉलीबॉल कोर्ट

ग्वालियर. खिलाड़ियों को आधुनिक खेल सुविधाएं देने के नाम पर स्मार्ट सिटी ने लक्ष्मीबाई कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय (एमएलबी) के खेल मैदानों को करोड़ों रुपये की लागत से संवारा, लेकिन हैंडओवर से पहले ही इनकी सुविधाएं दम तोड़ने लगी हैं। निर्माण के बाद करीब एक साल से नियमित मेंटेनेंस नहीं होने से मैदानों की स्थिति बिगड़ती जा रही है। निर्माण कार्यों में खामियों का हवाला देते हुए कॉलेज प्रबंधन ने अभी तक मैदानों का हैंडओवर नहीं लिया है। इतना ही नहीं, कॉलेज द्वारा निर्माण से संबंधित एमओयू की प्रति मांगे जाने के बावजूद अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। ऐसे में सवाल है कि करोड़ों खर्च करने के बाद तैयार की गई खेल सुविधाओं की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?स्मार्ट सिटी की ओर से एमएलबी कॉलेज परिसर में फुटबॉल, वॉलीबॉल और टेनिस सहित अन्य खेल सुविधाएं विकसित की गई हैं। निर्माण के दौरान खिलाड़ियों की जरूरतों को ध्यान में रखने का दावा किया गया था, लेकिन कॉलेज प्रबंधन के निरीक्षण में कई खामियां सामने आई हैं। इन खामियों के कारण हैंडओवर की प्रक्रिया अटक गई है।

फुटबॉल मैदान छोटा, सतह भी ऊंची-नीची

कॉलेज प्रबंधन के मुताबिक फुटबॉल मैदान को पहले की तुलना में छोटा कर दिया गया है। मैदान की सतह भी पूरी तरह समतल नहीं है। सबसे गंभीर स्थिति मैदान के किनारों पर लगे बिजली के पोल को लेकर है। खेल के दौरान खिलाड़ियों के मैदान से बाहर जाने पर इन पोल से टकराने का खतरा बना रहता है। वॉलीबॉल कोर्ट में कंकड़ वाली मिट्टी डाली गई है, जिससे खिलाड़ियों को अभ्यास के दौरान परेशानी हो रही है। टेनिस कोर्ट को कवर्ड किए जाने से भी कॉलेज को आपत्ति है। प्रबंधन का कहना है कि इससे कोर्ट के इस्तेमाल में दिक्कत आ रही है। मैदानों में रोशनी के लिए फ्लड लाइटें तो लगा दी गईं, लेकिन उनका कनेक्शन तक नहीं किया गया। यानी सुविधा तैयार होने के बावजूद खिलाड़ी इसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।

ओपन जिम के उपकरण टूटे, जालियां भी उखाड़ीं

मेंटेनेंस के अभाव का असर ओपन जिम पर भी दिखाई दे रहा है। यहां लगाए गए कई उपकरण टूट चुके हैं। मैदान परिसर में प्रवेश के लिए लोगों ने जालियां तक तोड़ दी हैं। निर्माण के बाद स्मार्ट सिटी की ओर से सुरक्षा और देखरेख के लिए एक चौकीदार तैनात किया गया था, लेकिन उसका कार्यकाल समाप्त होने के बाद उसे हटा दिया गया। इसके बाद नियमित निगरानी की व्यवस्था नहीं हो सकी।

टॉयलेट से लेकर पानी के नल तक बदहाल

खिलाड़ियों के लिए बनाए गए टॉयलेट भी रखरखाव के अभाव में खराब हो रहे हैं। पॉट और वॉशबेसिन टूटे पड़े हैं तथा परिसर में गंदगी दिखाई देती है। पीने के पानी के लिए लगाए गए नल खराब हैं। कचरा प्रबंधन के लिए रखे गए डस्टबिन भी टूट चुके हैं। ऐसे में खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए तैयार किए गए परिसर में बुनियादी सुविधाएं ही सवालों के घेरे में हैं।

एमओयू नहीं मिला, इसलिए अटका हैंडओवर

एमएलबी कॉलेज के प्राचार्य हरीश अग्रवाल का कहना है कि खेल मैदानों को लेकर स्मार्ट सिटी से एमओयू की प्रति मांगी गई है। निर्माण किस आधार पर और किन शर्तों के तहत कराया गया, इसकी जानकारी मिलने के बाद ही कार्यों का परीक्षण कर हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उनके मुताबिक अभी तक स्मार्ट सिटी ने एमओयू की प्रति उपलब्ध नहीं कराई है।

हरीश अग्रवाल, प्राचार्य, एमएलबी कॉलेज ने कहा, “कॉलेज के खेल मैदानों को लेकर स्मार्ट सिटी से एमओयू की कॉपी मांगी गई है। निर्माण किस आधार पर और किन शर्तों के तहत कराया गया, इसकी जानकारी मिलने के बाद ही कामों का परीक्षण कर हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अभी तक स्मार्ट सिटी ने एमओयू की कॉपी उपलब्ध नहीं कराई है।” निर्माण के बाद मैदानों का उपयोग शुरू होने से पहले ही सुविधाओं के खराब होने और रखरखाव की व्यवस्था स्पष्ट नहीं होने से करोड़ों रुपये के इस प्रोजेक्ट की उपयोगिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब जरूरत इस बात की है कि स्मार्ट सिटी और कॉलेज प्रबंधन के बीच जिम्मेदारी स्पष्ट हो और मैदानों की खामियों को दूर कर खिलाड़ियों के लिए इन्हें सुरक्षित और उपयोगी बनाया जाए।