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53-0 से जीतकर ग्वालियर बना संभागीय चैंपियन, मुरैना उपविजेता

खेल विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और टीम भावना विकसित करते हैं। खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास कर उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया गया।
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Women’s Basketball Divisional-Level Competition

प्रतियोगिता के मुख्य अतिथि जीवाजी विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त उपसंचालक डॉ. केशव सिंह गुर्जर और विशिष्ट अतिथि शारीरिक शिक्षा विभाग के संचालक डॉ. विजय मोघे रहे

ग्वालियर. महिला बास्केटबॉल की संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में ग्वालियर जिला टीम ने मुरैना को 53-0 से हराकर खिताब अपने नाम किया। शासकीय केआरजी स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय में उच्च शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश शासन के तत्वावधान में आयोजित प्रतियोगिता में ग्वालियर की खिलाड़ियों ने शुरुआत से ही दबदबा बनाए रखा। मजबूत रक्षा पंक्ति, आक्रामक खेल और बेहतर तालमेल के सामने मुरैना की टीम पूरे मुकाबले में एक भी अंक नहीं बना सकी। मुरैना को उपविजेता के खिताब से संतोष करना पड़ा। प्रतियोगिता के मुख्य अतिथि जीवाजी विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त उपसंचालक डॉ. केशव सिंह गुर्जर और विशिष्ट अतिथि शारीरिक शिक्षा विभाग के संचालक डॉ. विजय मोघे रहे। अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. साधना श्रीवास्तव ने की। प्रतियोगिता का संयोजन खेल अधिकारी डॉ. त्रिलोक सिंह चाहर ने किया।

खेलों से बढ़ता है आत्मविश्वास

समापन अवसर पर अतिथियों ने विजेता और उपविजेता टीमों की खिलाड़ियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि खेल विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और टीम भावना विकसित करते हैं। खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास कर उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया गया।

एक दिन में खत्म हुई प्रतियोगिता, सिर्फ दो टीमों की भागीदारी

संभाग स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन महज एक दिन में पूरा हो गया। इसमें ग्वालियर और मुरैना जिले की टीमों ने ही हिस्सा लिया। ऐसे में खिलाड़ियों को अधिक मुकाबले खेलने और अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर सीमित रहे। 53-0 का एकतरफा परिणाम दोनों टीमों के बीच प्रदर्शन के बड़े अंतर को भी दर्शाता है। संभाग स्तर की प्रतियोगिता में केवल दो जिलों की भागीदारी खेल आयोजनों में व्यापक सहभागिता सुनिश्चित करने की जरूरत को सामने लाती है। अधिक जिलों की टीमों की भागीदारी से मुकाबलों में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है और खिलाड़ियों को अपनी क्षमता परखने के ज्यादा अवसर मिल सकते हैं। ऐसे आयोजनों में सहभागिता बढ़ाने के प्रयास खेल प्रतिभाओं को आगे लाने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।