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RESULT REVIEW : जीवाजी विश्वविद्यालय में 6 घण्टे चला विरोध, सवालों से बचते फिरे अधिकारी

RESULT REVIEW : जीवाजी विश्वविद्यालय में 6 घण्टे चला विरोध, सवालों से बचते फिरे अधिकारी
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students protest against jiwaji university working

RESULT REVIEW : जीवाजी विश्वविद्यालय में 6 घण्टे चला विरोध, सवालों से बचते फिरे अधिकारी

ग्वालियर। यहां आने वाले छात्रों के घर में खाने के लिए दो टाइम की रोटी नहीं है, माता-पिता मजदूरी करके बच्चों की पढ़ाई करा रहे हैं। यहां जेयू के अधिकारी ऐसी चैंबरों में बैठते हैं, इनके पर्दे भी गरीबों की साल भर की मजदूरी से ज्यादा मंहगे हैं, डिपार्टमेंट के बाबुओं के यहां पांच-पांच लाख रुपए का इंटीरियर है। इसके बाद भी जिनके पास फीस जमा करने को पैसा नहीं है, उनसे ही कॉपी दिखाने के नाम पर फीस वसूली जा रही है। गलती रिजल्ट बनाने वाली एजेंसी और विश्वविद्यालय के अधिकारियों की है, फिर छात्र फीस क्यों जमा करें। यह आरोप जेयू में हंगामा कर रहे छात्रों ने अधिकारियों पर लगाए।

हंगामा कर रहे छात्रों का कहना था कि अधिकारियों की लापरवाही का आलम यह है साइंस कॉलेज की जिस छात्रा ने लगातार टॉप किया है, उसको इस बार कैमिस्ट्री में फेल कर दिया। इसके अलावा उप कुलसचिव की पीएचडी को लेकर शिकायत हो चुकी है, इन्होंने एक छात्रा को फोर्जरी से पास किया है। इसके बाद भी उनको हटाया नहीं जा रहा। अब या उप कुलसचिव को हटाया जाए या मैडम इस्तीफा दें। दूसरा रिजल्ट बनाने वाली एजेंसी को ब्लैक लिस्टेड किया जाए और तीसरी मांग यह है कि बीएससी पांचवें सेमेस्टर का रिजल्ट रिव्यू किया जाए।

मांग पूरी होने पर ही खत्म हुआ धरना
नागपुर की माइक्रो प्रो एजेंसी द्वारा बीकॉम, बीए के बाद बीएससी पंचम सेमेस्टर के परिणाम में खामियों का अंबार लगा दिया है। खामियों वाले इस रिजल्ट को लेकर छात्र हर दिन परेशान हो रहे हैं। इस बीच साइंस कॉलेज और पीजीवी कॉलेज के ज्यादातर छात्रों को फिजिक्स, कैमिस्ट्री में फेल किए जाने के बाद छात्रों ने कॉपियां दिखाने की मांग की थी, जिसके जवाब में जेयू प्रबंधन ने निश्चित फीस जमा करवाने के बाद ही कॉपियां दिखाने के निर्देश दिए थे। इससे असंतुष्ट छात्र मंगलवार को परीक्षा नियंत्रक और कुलपति से मिले थे। तब दोनों कॉलेज के तीन-तीन टीचर्स से कॉपियां दिखवाने की हामी भरी गई थी। लेकिन बुधवार को कॉपियां दिखाने में आनाकानी की जाने लगी। इसका पता चलने पर एनएसयूआई, एबीवीपी ने मिलकर कुलसचिव का घेराव कर दिया। तीन सूत्रीय मांगों को लेकर दोनों ही छात्र संगठन पूरे दिन प्रशासनिक भवन में नारेबाजी करते रहे। दोपहर बार कुलपति के निर्देश पर विश्वविद्यालय थाना प्रभारी और बाद में सीएसपी मुनीष राजौरिया के आने से छात्र और ज्यादा आक्रोशित हो गए और शाम को मांगें पूरी होने के बाद ही धरना-प्रदर्शन खत्म किया।

रोल नंबर हमने दिए नहीं, आपने चेक कैसे कर लिए

प्रदर्शन के दौरान कुलसचिव आईके मंसूरी और परीक्षा नियंत्रक ने छात्र नेताओं से कहा कि 10 छात्र-छात्राओं के रोल नंबर दे दो हम चेक करा लेते हैं। कुछ देर बाद बताया कि 70 छात्रों की कॉपियां चेक कराई हैं, किसी में चेंज नहीं है। इस दौरान साइंस कॉलेज की छात्रा हर्षिता मौर्य को लेकर संगठन के नेताओं ने कहा कि जो छात्रा लगातार टॉप कर रही है, फिर वह कैमिस्ट्री में फेल कैसे हो गई। इस पर परीक्षा नियंत्रक ने कहा कि छात्रा चाहे तो अपनी कॉपी देख सकती है। कॉपी को प्रो राधा तोमर ने देखी तो नो चेंज बता दिया जबकि छात्रा का कहना था कि कॉपी में लिखे सारे उत्तर सही थे। इसी तरह डबरा की छात्रा मुस्कान आहूजा के नंबर भी कम आए थे, जबकि वह हर साल प्रथम श्रेणी में पास हो रही थी। इसके बाद उग्र छात्रों ने ... अब तो ये स्पष्ट है, विवि प्रशासन भ्रष्ट है, मैडम की तानाशाही नहीं चलेगी के नारे लगाना शुरू कर दिए।

प्रॉक्टर ने दी समझाइश, छात्र बोले- पुलिस क्यों बुलाई
आक्रोशित छात्रों को प्रॉक्टर एसके सिंह ने छात्रों को समझाया कि हम आप लोगों का अहित नहीं चाहते हैं, नियमानुसार कार्रवाई करेंगे। इस पर छात्र बोले आप कॉपियां चेक करने वाले टीचर बुलाओ और जिन टीचर्स ने छात्रों को पढ़ाया है,उनको भी बुलाओ फिर सार्वजनिक रूप से कॉपियां चेक कराओ, अगर हम गलत निकले तो माफी मांग लेंगे नहीं तो जेयू को सार्वजनिक माफी मांगनी पड़ेगी। मैडम के भैया डीजीपी थे, तो पुलिस वाले उनसे डरते थे, अब वे सीबीआई चीफ हैं तो पुलिस वाले उनसे डरते हैं, लेकिन हम छात्र हैं, यह हमारी यूनिवर्सिटी है, यहां पुलिस क्यों बुलाई गई।

विवि में हो रहा भ्रष्टाचार
छात्र नेताओं ने कहा कि बीएससी नर्सिंग, एमएससी नर्सिंग, एमबीबीएस, बीडीएस, बीएचएमएस का रिव्यू हो सकता है, क्योंकि इसमें पैसा मिलता है। इनको रिव्यू में पैसा चाहिए लेकिन सरकारी कॉलेज में ढाई हजार रुपए फीस देने वाला बीएससी का छात्र पास होने के लिए पांच हजार रुपए की रिश्वत कहां से लाएगा। इसके बाद भी अगर इनको पैसा चाहिए तो हम शहर में भीख मांगेगे, चंदा इक_ा करेंगे इनको पैसा देंगे। छात्रों ने कहा, अशोकनगर, डबरा, गुना से छात्र-छात्रा आते हैं, यहां उनकी कोई नहीं सुनता है, वे रोते-रोते घर जाते हैं।

यूनिवर्सिटी मेें अधिकारी बात नहीं करते, छात्रों से बात करने के लिए पुलिस को बुलाना पड़ रहा है। मैडम का पीए, गार्ड दलाली करते हैं। जहां से अटैची भरकर आती है, उनके हर साल चार-चार रिव्यू होते हैं। प्राइवेट कॉलेजों का रिजल्ट 65 प्रतिशत निकल रहा है और सरकारी कॉलेजों का रिजल्ट 35 प्रतिशत निकाला जा रहा है।

शाम को निकला निष्कर्ष

लगातार प्रदर्शन के दौरान कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, उप कुलसचिव ने आपस में बैठक की लेकिन कोई नतीजा निकला, इसके बाद फिर से बैठक हुई। शाम को पहले सीएसपी राजौरिया, टीआई तोमर, कुलसचिव मंसूरी, प्रॉक्टर एसके सिंह, पीआरओ शांतिदेव सिसोदिया ने आपस में मंथन किया और फिर कुलपति प्रो संगीता शुक्ला के पास गए। यहां से लौटकर पहले छात्रों को बरगलाने की कोशिश की, लेकिन जब छात्र नहीं माने तो परीक्षा परिणाम तैयार करने वाली नागपुर की एजेंसी का प्रकरण ईसी को भेजे जाने, उप कुलसचिव राजीव मिश्रा को पीएचडी की जांच पूरी होने तक तत्काल प्रभाव से हटाने के अलावा बीएससी के जिन 70 छात्रों के रोल नंबर छात्र उपलब्ध कराएंगे, उनका परिणाम रिव्यू करने की लिखित स्वीकारोक्ति जेयू प्रबंधन ने दी है। इसके साथ ही यह लिखा गया है कि 30 प्रतिशत से ज्यादा परिणाम प्रभावित होगा तो रिव्यू कराया जाएगा।