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अर्जी वाले गणेश के मंदिर में पूरी होती है कुंवारे लड़के-लड़कियों की मनोकामना, बस लगाना होता है राजस्थानी लड्डू का भोग

Ganesh Chaturthi 2025 : इस प्राचीन गणेश मंदिर को माना जाता है आस्था का बड़ा केंद्र। कुंवारे लड़के-लड़कियों की यहां हर मनोकामना पूरी होती है। अर्जी वाले भगवान को सिर्फ राजस्थानी लड्डू का भोग ही लगता है।

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Ganesh Chaturthi 2025

अर्जी वाले गणेश (Photo Source- Patrika)

Ganesh Chaturthi 2025 : देशभर में गणेश चतुर्थी की धूम है। पूरे हर्षोल्लास के साथ भक्त बप्पा की मूर्ति गणेश पांडालों और घरों में विराजित कर रहे हैं। हर तरफ भक्तिमय माहौल देखने को मिल रहा है। ऐसे में हम आपको मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्थित 300 साल पुराने एक ऐेसे प्राचीन गणेश मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जिसे शहर या प्रदेश में नहीं, बल्कि देशभर में अर्जी वाले गणेश के नाम से जाना जाता है। देशभर में अर्जी वाले गणेश को भक्तों की आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है।

पद्मासन मुद्रा में विराजमान अर्जी वाले गजानन के साथ रिद्धि और सिद्धि भी विराजित हैं। खास बात ये है कि, अर्जी वाले गणेश के दरबार में लगाई गई अर्जी हमेशा पूरी होती है। बस शर्त ये है कि, उन्हें भोग उनकी पसंद का यानी राजस्थानी लड्डू के रूप में लगाया जाए।

इस तरह लगाई गई अर्जी कभी खाली नहीं जाती

दरअसल, ग्वालियर शहर के शिंदे की छावनी इलाके में एक प्राचीन मंदिर है, जहां विराजित गजानन को अर्जी वाले गणेश के नाम से जाना जाता है। सड़क किनारे बने इस चमत्कारी मंदिर को भक्तों की आस्था का बड़ा केंद्र कहा जाता है। मंदिर में गणेश जी के साथ दोनों तरफ रिद्धि और सिद्धि भी विराजित हैं। मंदिर को लेकर मानता है कि यहां अर्जी लगाकर 11 और 9 बुधवार भक्तिपूर्वक दर्शन करने पर लगाई गई हर अर्जी पूरी होती है।

राजस्थानी लड्डू का लगता है भोग

ऐसी मान्यता है कि, खासतौर पर यहां कुंवारे लड़के-लड़कियों की अर्जी खाली नहीं जाती। यानी अगर वो भगवान को राजस्थानी लड्डू का भोग लगाने के साथ सच्चे मन से अच्छे जीवन साथी की मनोकामना लेकर जाते हैं तो उनकी वो मनोकामना जल्द से जल्द पूरी हो जाती है। साथ ही, वो लोग जिनकी शादी हो चुकी है, लेकिन पारिवारिक जीवन से परेशान रहते हैं यानी घर में आए दिन लड़ाई-झगड़े होते रहते हैं। ऐसे लोगों द्वारा गजानन को लगाई जाने वाली अर्जी भी यहां पूरी होती है। ऐसा कहा जाता है कि, अर्जी वाले गणेश जी को सिर्फ राजस्थान के मोटी बूंदी वाले लड्डू ही पसंद हैं, ऐसे में यहां सिर्फ राजस्थानी लड्डू का ही भोग चढ़ता है।

पद्मासन मुद्रा के चलते सिद्धि योग गणेश

बता दें कि, मंदिर में विराजित गणेश जी की प्रतिमा बेहद दुर्लभ है। क्योंकि, यहां गणेश जी के साथ रिद्धि और सिद्धि भी विराजित हैं। गणेश जी के उल्टे हाथ में विद्या है तो सीधे हाथ में फरसा नीचे दो मूषक भी हैं। पद्मासन मुद्रा के चलते इन्हें सिद्धि योग गणेश माना जाता है। ऐसे में गणेश चतुर्थी के अवसर पर यहां भक्तों का तांता लगा हुआ है।