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सुनाई गप्पी-ठप्पी की कहानी, सहकारिता विभाग के उप रजिस्ट्रार व सहकारी बैंक एमडी ने व्यवस्थापकों को कारोबार बढ़ाने के दिए टिप्स

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हनुमानगढ़

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Purushotam Jha

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Updated: 11 Feb 2019, 9:30 PM IST

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सुनाई गप्पी-ठप्पी की कहानी, सहकारिता विभाग के उप रजिस्ट्रार व सहकारी बैंक एमडी ने व्यवस्थापकों को कारोबार बढ़ाने के दिए टिप्स

सुनाई गप्पी-ठप्पी की कहानी, सहकारिता विभाग के उप रजिस्ट्रार व सहकारी बैंक एमडी ने व्यवस्थापकों को कारोबार बढ़ाने के दिए टिप्स
-सहकार सम्मेलन में वक्ताओं ने सहकारिता के ख्वाब को पूरा करने पर दिया जोर
हनुमानगढ़. ग्राम सेवा सहकारी समितियों का कारोबार बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है। लेकिन जमीनी तौर पर व्यवस्थापक समय के साथ नहीं चल रहे। जिसके कारण कारोबार प्रभावित हो रहा है। इन शिकायत भरे लफ्जों में सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने ग्राम सेवा सहकारी समिति के व्यवस्थापकों को कार्यशैली सुधारने की नसीहत दी। जिला मुख्यालय पर कृषि विभाग के आत्मा सभागार में सोमवार को आयोजित सहकार सम्मेलन में सहकारिता विभाग के उप रजिस्ट्रार अमीलाल सहारण ने गप्पी-ठप्पी की कहानी सुनाकर चुटीले अंदाज में व्यवस्थापकों को अपनी समितियों का कारोबार बढ़ाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि समन्वय ऐसी चीज है, जो हर मुश्किल को आसान बना देती है। सहारण ने कहा कि करीब ढाई लाख किसान समितियों से जुड़े हुए हैं। किसान कौन से उत्पाद को पसंद कर रहे हैं, इसे समझकर यदि समितियां उत्पाद रखेगी तो निश्चित तौर पर सहकारिता के कारोबार की जमीन मजबूत होगी। उन्होंने स्प्रे करने वाली मशीन के आगे लगने वाले यंत्र को लेकर मौजूद व्यवस्थापकों से सवाल किया तो सभी एक दूसरे की तरफ झांकने लगे। उप रजिस्ट्रार ने कहा कि यह हालात हमारी सहकारी समितियों के हैं। मतलब साफ है कमियां तो है। किसानों की सोच को समझकर उनके साथ मिलकर सहकारिता के सपने को साकार करने की बात उप रजिस्ट्रार ने कही। केंद्रीय सहकारी बैंक के एमडी भूपेंद्र सिंह ज्याणी ने कीटनाशक उत्पादों का कारोबार ग्राम सेवा सहकारी समिति स्तर पर करवाने के लिए व्यवस्थापकों को डिप्लोमा दिलवाने के लिए हनुमानगढ़ व नोहर मेें दो जगह बैच शुरू करवाने की बात कही। इसके लिए कृषि उपनिदेशक से उन्होंने सम्मेलन के दौरान ही गहनता से विचार-विमर्श किया। एमडी ने बताया कि ५२ सप्ताह का कोर्स है। जिसे करने के बाद समितियों को लाइसेंस मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि वक्त के साथ यदि समितियों ने कदमताल नहीं किया तो आंखों के सामने से कमाई का साधन छिन जाएगा। उन्होंने कहा कि लाइसेंस लेने में नादानी करने के बावजूद इसे सुधारने का प्रयास मिलजुल कर किया जाएगा। जिससे समितियों को आर्थिक मजबूती मिल सके। आत्मा परियोजना के निदेशक जयनारायण बेनीवाल, इफको उपक्षेत्र प्रबंधक एमआर जाखड़, सहकारी बैंक के प्रबंधक गणेशाराम, जोतराम नोजल सहित अन्य मौजूद रहे। इस मौके पर कृषि अधिकारियों ने विभाग की ओर से चलाई जा रही योजनाओं के के बारे में जानकारी दी।

सतर्कता बरतने की जरूरत
सहकार सम्मेलन में केंद्रीय सहकारी बैंक के एमडी भूपेंद्र सिंह ज्याणी ने कहा कि सरकार वादे करती है तो उसे पूरा भी करती है। गत सरकार ने जो कर्जमाफी का वादा किया था, उसमें जिले के व्यवस्थापकों ने काफी अच्छा काम किया। जिले में कर्जमाफी योजना में अनियमितता की शिकायतें बहुत कम आई। अब और ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है। नई सरकार की ओर से की जा रही कर्जमाफी योजना के बारे में कहा कि आचार संहिता से पहले सभी कर्जमाफी वाले किसानों को चिन्हित कर लिया जाएगा। इसके बाद सरकार के निर्देश के अनुरूप कर्जमाफी की प्रक्रिया पूरी होगी।

विकल्प तलाशने होंगे
सम्मेलन में सभी वक्ताओं ने ग्राम सेवा सहकारी समितियों को व्यापार के विकल्प तलाशने की सलाह दी। कर्ज वितरण के साथ ही पेस्टीसाइड, खाद-बीज के अलावा ग्रामीणों के उपयोग में आने वाली वस्तुओं का कारोबार करने की बात कही। जिससे सहकारिता मुहिम को मजबूती मिल सके। वक्ताओं ने कहा कि खाली हाथ कारोबार नहीं होता, इसलिए जरूरी है कि समितियां व्यापार के और भी विकल्प तलाशे।

फैक्ट फाइल
-जिले में २१५ ग्राम सेवा सहकारी समितियां संचालित हो रही है।
-हनुमानगढ़ केंद्रीय सहकारी बैंक की साख सीमा कुल १५०० करोड़ है।
- बैंक से एक लाख चार हजार ऋणी किसान जुड़े हुए हैं।
-वर्ष २०१८-१९ में केंद्रीय सहकारी बैंक हनुमानगढ़ को १०८० करोड़ का ऋण वितरण का लक्ष्य दिया गया। जिसका वितरण ग्राम सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से जारी है।

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