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शहरी सरकार की बजट बैठक आज 294 करोड़ का खाका रखेंगे सदन में

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हनुमानगढ़

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Anurag Thareja

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Updated: 30 Jan 2019, 12:34 PM IST

294 करोड़ का खाका रखेंगे सदन में

294 करोड़ का खाका रखेंगे सदन में

शहरी सरकार की बजट बैठक आज
294 करोड़ का खाका रखेंगे सदन में

हनुमानगढ़. नगर परिषद की साधारण बैठक बुधवार को दोपहर तीन बजे से होगी। सदन में आगामी वित्तीय वर्ष में 294 करोड़ का बजट सदन में रखा जाएगा। वर्तमान बजट की तुलना में आगामी बजट में विकास कार्यों पर कैंची चलाई गई है। नगर परिषद का तर्क है कि इस वर्ष में लोकसभा व निकाय चुनाव और आय नहीं होने के कारण विकास कार्यों में कटौती की गई है। सूत्रों की माने विपक्षी पार्षद बैठक में निराश्रित पशु, एलईडी लाइट, रुके हुए निर्माण कार्य, आय के स्त्रोत शून्य होने सहित आदि मुद्दों पर भाजपा के बोर्ड का घेराव सर सकते हैं। गौरतलब है कि टाउन व जंक्शन में नगर परिषद क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक मोबाइल कंपनी के टावर लगे हुए हैं। नगर परिषद ने इन टावरों से एक वर्ष में बीस लाख रुपए की आय होनी थी, लेकिन दिसंबर 2018 तक 1.96 लाख का ही राजस्व प्राप्त हुआ है। इसी तरह मैरिज पैलेस व धर्मशालाओं से मनोरंजन कर पास लाख रुपए वसूला जाना था। इसके लिए डीएलबी ने भी इसी वर्ष विधानसभा चुनाव से पहले सर्वे करने के आदेश दिए थे। करीब दो वर्ष पूर्व भी नगर परिषद के अधिकारियों ने दो वर्ष पूर्व विवाह स्थलों का आधा अधूरा सर्वे कर फाइल को एक कौने में रख भूले हुए हैं। यही हाल नगरीय विकास कर का भी है।
आंख मूंदकर तैयार किया बजट
वर्तमान वित्तीय वर्ष में नगरीय विकास कर 75 लाख रुपए का लक्ष्य निर्धारित था। लेकिन दिसंबर 2018 तक केवल 5.56 लाख रुपए की वसूली ही हो पाई है। आगामी वित्तीय वर्ष 2019-20 में यही लक्ष्य रखा गया है। हैरत की बात है कि नगरीय विकास कर 2017 तक करीब पौने दो करोड़ रुपए बकाया था। दिसंबर 2018 तक यह आंकड़ा ढाई करोड़ के करीब पहुंच गया है। बजट में अधिकारियों ने इसका उल्लेख तक नहीं किया और आगामी वर्ष में भी 75 लाख रुपए का अनुमान लगाया गया है। यही हाल गृहकर का है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में गृहकर का आकंलन 25 लाख रुपए था। अभी तक 1.97 लाख वसूली की गई है। 2007 में सरकार ने इस गृहकर को बंद कर दिया था। उस वक्त दो करोड़ रुपए बकाया था, जो कि अभी तक चल रहा है। बजट के एजेंडे में इस तरह का उल्लेख भी नहीं किया गया है।
यहां भी पिछड़े
भूमि के नामातंरण शुल्क से एक करोड़ रुपए जमा होना प्रस्तावित है। अभी तक नामातंरण की एवज में 75 लाख रुपए की ही वसूली हो पाई है। राज्य सरकार की ओर से चुंगी पुर्नभरण के तौर पर तीस करोड़ रुपए मिलने का आंकलन था, लेकिन दिसंबर तक 21.77 करोड़ ही राज्य सरकार से मिले हैं। राज्य सरकार नगर परिषद को प्रतिमाह चुंगी पुर्नभरण के नाम पर 2.42 लाख रुपए देती है। शहरी क्षेत्र में लगे मोबाइल टावरों से बीस लाख रुपए में से अभी तक नगर परिषद 1.96 लाख रुपए की वसूली कर पाई है। कच्ची बस्ती नियमन उम्मीद से ज्यादा हुई है। करीब पांच लाख रुपए का आंकलन किया गया था, इस मद से 5.63 लाख रुपए की आय हुई है। बाजार में भूमि क्षेत्र में मंदी होने के कारण कृषि भूमि नियम पर सात करोड़ रुपए का आंकलन किया गया था। लेकिन नई कॉलोनियों के विकसित नहीं होने पर केवल 80 लाख रुपए का ही राजस्व प्राप्त हुआ है। लीज डीड से तीन करोड़ रुपए आने का अनुमान था, अभी तक 120 लाख रुपए ही आए हैं।
नहीं लगा पाए एलईडी लाइट
डीएलबी की ओर से नगर परिषद की ओर से 45 वार्डों में 12 हजार एलईडी लाइट लगाई जानी थी। अभी तक नगर परिषद यह कार्य भी पूरे नहीं करवा पाई। गत दो वर्ष से लेकर अभी तक स्ट्रीट लाइट के मरम्मत पर करीब डेढ़ करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। विधानसभा चुनाव से पहले भी नगर परिषद ने 77 लाख रुपए की निविदा करवाई थी। एलईडी लाइट के कार्य को पूरा कराने के लिए 77 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे।

निराश्रित पशुओं का समाधान
शहर में निराश्रित पशुओं के कारण हो रहे हादसों को कम करने के लिए जनसहयोग से टाउन की कल्याण भूमि में नंदीशाला खोली गई थी। लेकिन समिति व नगर परिषद में अनुदान को लेकर आपसी विवाद के कारण निराश्रित पशुओं को पकडऩे के लिए कोई अभियान नहीं चलाया गया।

कर्ज में डूबी नगर परिषद
हुडको से नगर परिषद ने 20 करोड़ का ऋण स्वीकृत करवा रखा है। इसमें से सवा तीन करोड़ रुपए की राशि मिल चुकी है। इसके अलावा 13 करोड़ रुपए मुख्यमंत्री बजट घोषणा, ढाई करोड़ रुपए शौचालय निर्माण, 60 लाख रुपए अम्बेडकर भवन व एक करोड़ रुपए कब्रिस्तान निर्माण आदि के लिए मिली राशि निकाय को अपने कोष से कटवानी होगी या वापस लौटानी होगी। वर्तमान में नगर परिषद की माली हालत बेहद पतली है, ऐसे में हुडको से मिले ऋण राशि 2020 के शुरू होते प्रत्येक तीन माह में 35 लाख रुपए वापस लौटाने होंगे। यह राशि किस आधार पर लौटाई जाएगी और इस तरह के ब्याज को अदा करने के लिए भविष्य की रणनीति के बारे में पार्षद इस कार्यकाल की आखिरी बजट बैठक होने के कारण घेराव करेंगे।

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