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एक-दो कमी हो, तो बात बन सकती है, लेकिन पीएचसी पर कमियों और असुविधाओं के अलावा कुछ दिखाई नहीं देता।

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sangria PHC situation

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संगरिया. उपखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) की स्थिति दयनीय है। कहीं मरीजों का अत्यधिक भार है, तो कुछ पीएचसी को मरीजों का इंतजार है। पत्रिका ने पीएचसी का दौरा कर वहां का हाल जानने का प्रयास किया। स्थिति दयनीय दिखी। कहीं भी पीएचसी अपना उद्देश्य पूरा करते नजर नहीं आती है। पीएचसी उपकरण, दवा और डॉक्टरों की कमियों को झेल रही हैं, तो गंदगी व असुविधाओं का केंद्र बन चुकी हैं।

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उपखंड संगरिया में लीलांवाली, नुकेरा, चक हीरासिंहवाला, किशनपुरा, दीनगढ़, मालारामपुरा ६ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। जिनमें से तीन पीएचसी चक हीरासिंहवाला, नुकेरा व लीलांवाली सब सैंटर्स भवनों में चल रही हैं। चिकित्सकों का अभाव इसी बात से लगाया जा सकता है कि चकहीरासिंहवाला में प्रतिनियुक्ति पर डॉ.राजेश सहारण धोलीपाल से नियुक्त हैं जिनके पास किशनपुरा का अतिरिक्त भार है। आदर्श पीएचसी मालारामपुरा में किशनपुरा से डॉ. दिनेश जैन कार्यरत हैं।

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जबकि दीनगढ़ में डॉ. रमेश कुमार, लीलांवाली में डॉ.चंदनप्रीतसिंह व नुकेरा में डॉ. विनोद घोड़ेला सेवारत हैं। विधायक व पूर्व मंत्री के गांव लीलांवाली का भवन खस्ताहाल है। दो कमरे ऐड पोस्ट अनुसार बने हैं। वार्ड से सटा एक कमरे की छत टूट चुकी ईंटो के ढेर, छत से उखड़ी सीमेंट से दिखते सरिए, टूट दरवाजे गिरने के कगार पर है। एक को ताला जड़ा हुआ है। वार्ड में अलमारी का हिस्सा क्षतिग्रस्त है। दीवार तथा छतों के प्लास्टर उखड़ चुके। जैसे-तैसे स्टाफ काम चला रहे हैं। भवन के अभाव में गांव लंबीढ़ाव व चक प्रतापनगर के सब सैंटर आंगनबाड़ी केंद्र में तथा ढाबां स्टेशन का गुरुद्वारा स्थित एक कमरे में चल रहे हैं।

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सब सैंटर्स पर चल रही पीएचसी के अनुरुप भवन नहीं होने से लैब, मरीजों को भरती करने के लिए वार्ड, ओपीडी सुविधाएं आदि में भारी परेशानियां हैं। स्टाफ व चिकित्सकों के लिए चक, लीलांवाली व नुकेरा में क्र्वाटर्स नहीं है। पुरानी पीएचसी दीनगढ़ व किशनपुरा में स्टाफ के रहने के लिए केवल एक ही क्र्वाटर से काम नहीं चलता। मालारामपुरा में तो रहवास के लिए बने क्र्वाटर्स तो खस्ताहाल हैं। कई कमरे सालों से क्षतिग्रस्त होने के कारण बेकार पड़े हैं। दरवाजे नहीं है तो छतें, दीवारें व कमरे बदहाली बयां करते हैं।

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यहां पर काई, धूल-मिट्टी, कचरा व पौधों का वास है। इन्हें कंडम कर पुननिर्माण करवाने की नितांत आवश्यकता है। कमोवेश स्थिति ये है कि पर्याप्त स्टाफ, लैब, चिकित्सकों व भवन के अभाव में चौबीसों घंटे मरीजों को चिकित्सकीय सुविधाएं नहीं मिल पाती। एक डॉक्टर को दो जगह काम देखना पड़ रहा है। नुकेरा व चक में लैब टैक्नीशियन नहीं है जबकि लीलांवाली का लैब टैक्नीशियन को टीबी क्लिनिक हनुमानगढ़ में प्रनियुक्त है। चक की पीएचसी में एक एलएचवी है। शेष में पद रिक्त होने से रिपोर्टिंग, सब सैंटर चैकिंग, टीकाकरण व अन्य कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

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प्रसव में आई कमी

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर परेशानियों के चलते प्रसव में भारी कमी दिखाई दी। अप्रैल से अगस्त २०१७ के बीच लीलांवाली में चार, दीनगढ़ में तीन, चकहीरासिंहवाला में तीन, मालारामपुरा में सोलह, नुकेरा में सात व किशनपुरा में चार प्रसव ही हुए हैं।

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