
यूनिफॉर्म में नन्ही थानाध्यक्ष का जलवा: पिलखुवा थाने में 8वीं की पूर्वी ने संभाली कमान, बेटियों को मिला नया आत्मविश्वास (Source: Police Media Cell)
Class 8 Girl Turns SHO for a Day: पिलखुवा थाने के लिए बेहद खास और यादगार बन गया, जब मिशन शक्ति फेज-5.0 के तहत आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में एक स्कूली छात्रा ने थानाध्यक्ष की कुर्सी संभालकर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। दर्शना द स्कूल की कक्षा-8 की छात्रा पूर्वी शर्मा ने न केवल थाना प्रभारी की कुर्सी पर बैठकर जिम्मेदारी निभाई, बल्कि अपनी समझदारी, आत्मविश्वास और संवेदनशीलता से सभी को प्रभावित भी किया।
आमतौर पर सख्त अनुशासन और गंभीर माहौल के लिए पहचाने जाने वाले पिलखुवा थाने में इस दिन कुछ अलग ही दृश्य था। खाकी वर्दी के बीच एक स्कूली यूनिफॉर्म पहने नन्ही छात्रा जब थानाध्यक्ष की कुर्सी पर बैठी, तो वहां मौजूद पुलिसकर्मी, फरियादी और अन्य लोग तालियों से उसका स्वागत करते नजर आए। यह दृश्य न केवल अनोखा था, बल्कि प्रेरणादायक भी था।
थाना प्रभारी मनीष चौहान ने खुद पूर्वी शर्मा को अपनी कुर्सी पर बैठाकर उन्हें एक दिन की थानाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी। यह कदम मिशन शक्ति अभियान के तहत बेटियों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उठाया गया था। पूर्वी ने भी इस जिम्मेदारी को पूरी गंभीरता और आत्मविश्वास के साथ निभाया।
कुर्सी संभालते ही पूर्वी का पहला कदम महिला हेल्प डेस्क की ओर बढ़ा। वहां उन्होंने फरियादियों की शिकायतों को ध्यानपूर्वक सुना। एक महिला द्वारा न्याय की गुहार लगाने पर पूर्वी ने तुरंत महिला पुलिसकर्मियों को कार्रवाई के निर्देश दिए। उनके इस व्यवहार ने यह साबित कर दिया कि जिम्मेदारी उम्र नहीं, बल्कि सोच और समझ पर निर्भर करती है।
पूर्वी के चेहरे पर मासूमियत के साथ-साथ गंभीरता और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। उन्होंने जिस धैर्य के साथ लोगों की समस्याएं सुनीं और समाधान के लिए कदम उठाए, उससे वहां मौजूद हर व्यक्ति प्रभावित हुआ। फरियादी भी यह देखकर हैरान थे कि इतनी छोटी उम्र में इतनी परिपक्वता कैसे संभव है।
पूर्वी ने केवल प्रतीकात्मक रूप से कुर्सी नहीं संभाली, बल्कि उन्होंने पुलिस व्यवस्था की बारीकियों को भी समझने का प्रयास किया। उन्होंने CCTNS कक्ष का निरीक्षण किया और ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली। इसके अलावा मालखाना और हवालात का भी अवलोकन किया।
मिशन शक्ति प्रभारी रेखा भदौरिया से पूर्वी ने जीडी लेखन, साइबर अपराध और पॉक्सो एक्ट जैसे महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान उन्होंने कई सवाल भी पूछे, जिससे उनकी जिज्ञासा और सीखने की इच्छा स्पष्ट नजर आई।
थाना प्रभारी मनीष चौहान ने पूर्वी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने जिस तरह से जिम्मेदारी निभाई, वह काबिले तारीफ है। उनका कहना था कि इस तरह की पहल से बेटियों में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे समाज में अपनी भूमिका को बेहतर तरीके से समझ पाती हैं।
पूर्वी शर्मा का यह अनुभव अन्य छात्राओं के लिए भी प्रेरणा बन गया। कार्यक्रम में शामिल अन्य छात्राओं ने भी इस पहल की सराहना की और भविष्य में ऐसे अवसर मिलने की इच्छा जताई। यह कार्यक्रम बेटियों को यह संदेश देने में सफल रहा कि वे भी किसी से कम नहीं हैं।
एक दिन की थानाध्यक्ष बनने के बाद पूर्वी शर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “आज मुझे समझ आया कि वर्दी का मतलब सिर्फ रौब नहीं, बल्कि बड़ी जिम्मेदारी है। लोगों की मदद करके जो संतोष मिला, वह हमेशा याद रहेगा। अब मेरा सपना आईपीएस बनकर समाज की सेवा करना और बेटियों की आवाज बनना है।”
इस कार्यक्रम में शिक्षिका नूपुर गुप्ता के नेतृत्व में अन्य छात्राएं भी शामिल हुईं। शिक्षकों ने इस पहल को बेहद सराहनीय बताया और कहा कि इस तरह के कार्यक्रम छात्रों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के अंत में पूर्वी शर्मा को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल उनके लिए गर्व का क्षण था, बल्कि अन्य छात्रों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना।
मिशन शक्ति अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि यदि बेटियों को सही अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो वे हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं। यह पहल समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Published on:
17 Apr 2026 12:57 am
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