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UP Govt Kanwar Yatra Alert: कांवड़ यात्रा से पहले यूपी सरकार का बड़ा आदेश: होटल-ढाबों पर रेट लिस्ट और क्यूआर कोड अनिवार्य

Kanwar Route Watch: कांवड़ यात्रा 11 जुलाई से शुरू होने जा रही है। इसके पूर्व ही उत्तर प्रदेश सरकार ने सतर्कता बरतते हुए कांवड़ मार्ग पर होटलों और ढाबों को रेट लिस्ट व फूड लाइसेंस अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने का निर्देश दिया है। पहली बार 'फूड सेफ्टी कनेक्टिविटी ऐप' भी लागू किया गया है।

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कांवड़ यात्रा से पहले यूपी सरकार का बड़ा फैसला फोटो सोर्स : Social Media

कांवड़ यात्रा से पहले यूपी सरकार का बड़ा फैसला फोटो सोर्स : Social Media

UP Govt Kanwar Yatra 2025: उत्तर प्रदेश में आगामी 11 जुलाई से शुरू हो रही कांवड़ यात्रा को लेकर प्रशासन ने सतर्कता बरतते हुए कांवड़ मार्ग पर पड़ने वाले सभी होटलों और ढाबों को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। अब इन सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को अपनी दुकानों के बाहर खाद्य सामग्री की रेट लिस्ट और वैध फूड लाइसेंस अनिवार्य रूप से लगाना होगा। साथ ही, पहली बार कांवड़ यात्रा के दौरान "फूड सेफ्टी कनेक्टिविटी ऐप" का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को किसी प्रकार की खाद्य समस्या होने पर तुरंत शिकायत दर्ज करने की सुविधा मिलेगी।

पहली बार ‘फूड सेफ्टी कनेक्टिविटी ऐप’ की शुरुआत

हापुड़ के खाद्य विभाग के सहायक आयुक्त सुनील कुमार ने बताया कि इस बार कांवड़ यात्रा के दौरान खाद्य सुरक्षा को लेकर पूरी सतर्कता बरती जा रही है। इसके तहत ‘फूड सेफ्टी कनेक्टिविटी ऐप’ की शुरुआत की गई है। यह मोबाइल एप यात्रियों को भोजन की गुणवत्ता, दर और शिकायतों के समाधान की सुविधा प्रदान करेगा। ऐप के जरिए होटलों और ढाबों के बाहर क्यूआर कोड चिपकाया जाएगा, जिसे स्कैन कर कांवड़िए सीधे शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

होटल मालिकों के नाम-पते सहित क्यूआर कोड

फूड सेफ्टी कनेक्टिविटी ऐप के अंतर्गत होटल और ढाबों पर लगाए जा रहे क्यूआर कोड में संबंधित प्रतिष्ठान के मालिक का नाम और पूरा पता अंकित होगा। इससे कोई भी यात्री यदि भोजन की गुणवत्ता या दर को लेकर असंतुष्ट है तो वह बिना किसी परेशानी के क्यूआर कोड स्कैन कर अपनी शिकायत दर्ज कर सकता है। शिकायत मिलने के बाद प्रशासन तत्परता से कार्यवाही करेगा।

हर होटल-ढाबे पर रेट लिस्ट और लाइसेंस अनिवार्य

खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि कांवड़ मार्ग पर स्थित हर होटल और ढाबे को अपने प्रतिष्ठान के बाहर साफ-साफ रेट लिस्ट लगानी होगी। साथ ही, वैध फूड लाइसेंस की कॉपी भी प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी कांवड़िए से भोजन के नाम पर अनावश्यक रूप से अधिक राशि वसूली न हो और गुणवत्ता युक्त खाद्य सामग्री ही उपलब्ध कराई जाए।

क्यों उठाया गया यह कदम

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम का मुख्य उद्देश्य कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की सेहत की सुरक्षा और सेवा की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होती है, और इस दौरान अनेक अस्थायी व स्थायी भोजनालय मार्ग में संचालित होते हैं। इन पर निगरानी रखना आवश्यक है, ताकि कोई भी व्यक्ति दूषित या महंगा भोजन बेचकर श्रद्धालुओं का शोषण न कर सके।

हापुड़ से शुरू हुई पहल

राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई यह पहल हापुड़ जिले से शुरू हुई है। खाद्य विभाग के अधिकारियों ने कांवड़ मार्ग पर पड़ने वाले हर प्रमुख होटल और ढाबे का निरीक्षण करना शुरू कर दिया है। निरीक्षण के दौरान लाइसेंस की वैधता, रसोई की सफाई, पानी की गुणवत्ता और खाद्य सामग्री की स्थिति की भी जांच की जा रही है। यदि कोई प्रतिष्ठान बिना लाइसेंस के काम करता पाया गया, तो उस पर जुर्माना और कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन की निगरानी होगी तगड़ी

इस बार प्रशासन ने तय किया है कि कांवड़ यात्रा के दौरान हर जिले में एक विशेष निगरानी दल गठित किया जाएगा, जो समय-समय पर होटल, ढाबों और भोजनालयों का औचक निरीक्षण करेगा। यह दल फूड सेफ्टी कनेक्टिविटी ऐप पर आने वाली शिकायतों की तत्काल जांच करेगा और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।

कांवड़ियों को मिलेगा त्वरित समाधान

इस तकनीकी पहल से श्रद्धालुओं को सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि यदि कहीं कोई समस्या आती है, तो वे सीधा क्यूआर कोड स्कैन कर एक क्लिक में शिकायत दर्ज कर सकेंगे। उन्हें किसी दफ्तर या थाने के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इससे समय की बचत भी होगी और यात्रा का अनुभव भी सुगम रहेगा।

यात्रियों की सेहत और श्रद्धा का सम्मान

उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल यात्रियों की सेहत और श्रद्धा दोनों का सम्मान करती है। यह पहली बार है जब राज्य स्तर पर किसी धार्मिक यात्रा के लिए इस प्रकार की डिजिटल निगरानी व्यवस्था की गई है। इससे एक ओर जहाँ व्यापारियों में जवाबदेही बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर कांवड़ यात्रा की गरिमा भी सुरक्षित रहेगी।

होटल और ढाबा संचालकों की प्रतिक्रिया

कई होटल और ढाबा संचालकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे उन्हें ईमानदारी से काम करने का अवसर मिलेगा और यात्रियों का विश्वास भी बढ़ेगा। हालांकि, कुछ ने यह भी कहा कि बिना पूर्व तैयारी के लागू किए गए नियमों से शुरुआती कठिनाई हो सकती है।

कांवड़ पथ पर एक ढाबा संचालक रामबाबू ने बताया कि  “सरकारी नियमों का पालन करेंगे। हम तो सेवा के भाव से काम कर रहे हैं, लेकिन जो लोग अधिक पैसे लेते हैं, उन पर भी लगाम लगेगी।”

संभावित चुनौतिया

  • रिमोट इलाकों में क्यूआर कोड स्कैनिंग और नेटवर्क की समस्या
  • सभी ढाबा मालिकों को फूड लाइसेंस उपलब्ध न होना
  • रेट लिस्ट और कागजों की नियमित निगरानी की व्यवस्था
  • खाद्य निरीक्षकों की संख्या और क्षेत्र सीमित होना