
asha workers harda
मध्यप्रदेश में कर्मचारियों, अधिकारियों के लिए राज्य सरकार कई घोषणाएं करती है लेकिन उनपर अमल नहीं किया जाता। इससे प्रशासन के प्रति सरकारी अमले का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है। कर्मचारियों के वेतन से जुड़ा एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसमें अधिकारी विभागीय आदेश ही दबाकर बैठ गए। सरकार ने कर्मचारियों की वेतन वृद्धि करने संबंधी आदेश जारी कर दिया लेकिन उसपर अमल ही नहीं किया। वेतन वृद्धि के आदेश को ताक में दबाकर बैठने से कर्मचारियों को हजारों रुपए का घाटा हो रहा है लेकिन अधिकारी ध्यान ही नहीं दे रहे।
सोमवार को हरदा में जिलेभर की आशा कार्यकर्ता एकत्रित हुईं। स्वास्थ्य विभाग की इन कार्यकर्ताओं ने अपनी चौदह सूत्रीय मांगों का मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर संजीव कुमार नागू को सौंपा है। इसमें प्रमुख रूप से वेतन वृद्धि के आदेश पर अमल करने की मांग की गई जिसके कारण कार्यकर्ताओं का 14 माह से खासा नुकसान हो रहा है।
आशा कार्यकर्ता संगठन हरदा की जिलाध्यक्ष अनीता गौर ने बताया कि सभी आशा कार्यकर्ताओं ने डिप्टी कलेक्टर को ज्ञापन दिया है। इसमें 14 मांगें शामिल हैं जिनमें प्रमुख रूप से वार्षिक वेतन वृद्धि देने की मांग की गई है। जिलाध्यक्ष अनिता गौर के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने आशा कार्यकर्ताओं को 1 हजार रुपए की वार्षिक वेतन वृद्धि देने की घोषणा की थी जिसका अभी तक लाभ नहीं मिला है।
आशा कार्यकर्ताओं के अनुसार तत्कालीन सीएम शिवराजसिंह चौहान की घोषणा के बाद स्वास्थ्य विभाग ने आदेश भी जारी कर दिया था लेकिन इसका जिले में पालन नहीं किया गया। डिप्टी कलेक्टर संजीव कुमार नागू को सौंपे ज्ञापन में आशा कार्यकर्ताओं को 1 हजार वार्षिक वेतन वृद्धि संबंधी आदेश की तिथि भी उल्लेखित की है। आशा कार्यकर्ताओं के अनुसार 6 सितंबर 2023 को स्वास्थ्य विभाग ने वार्षिक वेतन वृद्धि के संबंध में सीएम की घोषणा के परिपालन के लिए आदेश जारी कर दिया था। स्वास्थ्य विभाग के इस आदेश को जिले के अधिकारियोें ने ताक पर रख दिया, जिले में आज तक इसका पालन नहीं हुआ है।
Published on:
11 Nov 2024 07:44 pm
