
फूस की झोपडी, या फिर कच्ची दीवारो का मकान, जी हां विकास खंड क्षेत्र में सैकड़ो पात्र परिवार प्रधानमंत्री आवास मिलने की आस लगाए है। लेकिन विडण्बना है कि दो साल पहले जिला मुख्यालय से ब्लॉक का आवास डेटा गुम होने के बाद से ब्लॉक को आवासों को कोई लक्ष्य नही मिला। इससे छूटे गरीबों के पक्के मकान नही बन पाए।
पंचनदियों से घिरे विकास खंड की 65 ग्रामसभाओं में सैकड़ों ग्रमीण बीते दो सालों से प्रधानमंत्री आवास पाने के लिए ब्लॉक मुख्यालय की दौड़ लगा रहे है। लेकिन ब्लॉक पर कोई लक्ष्य नही होने से मायूश होकर बैरंग घर लौट रहे है। नतीजन मजबूरन सर्दी, गर्मी और बरसात की मार झेलने को गरीब अभिशप्त बने हुए है। जिला मुख्यालय से दो साल पहले आवासों का डेटा गायब हो गया। जिससे बीते सालों में पात्रों को दिए गए आवासों का रिकार्ड उपलब्ध न ही होने से सन् 2020-21, 2021-22 और अब 2022-23 में गरीबों को प्रधानमंत्री आवास नही मिल सके है।
अधिकारियों से जनप्रतिनिधियों तक लगाई अवाज
इसके लिए पात्रों समेत ग्राम प्रधानों, जन्रप्रतिनिधियों ने अधिकारियों से गुहार लगाई गई। लेकिन समस्या का समाधान अभी तक नही हो पाया है। इसके चलते गरीब एक अदद छत के लिए लगातार अधिकारियो की चौखट पर दौड़ लगाने को मजबूर है। ब्लाक प्रमुख, विधायक से लेकर सांसद तक के सामने यह मामला पहुंच चुका है। आवास आवंटन प्रक्रिया कब से शुरू होगी ? यह जवाब जिम्मेदार नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे में सर्दी, गर्मी के बाद बारिश का कहर भी झोपड़ीनुमा व कच्चे मकानों में रह रहे लोग एक बार फिर भुगतेंगे।
दो साल से नहीं मिला आवास
बीडीओ मनबीर सिंह ने बताया कि डेटा गायब होने से ब्लॉक से दो साल में किसी को आवास नही दिलाए जा सके है। अभी तक आवासों के बारे में कोई लक्ष्य भी नही मिला है। समस्या का समाधान कराने के लिए प्रयासरत हैं।
Updated on:
24 Jun 2022 05:29 pm
Published on:
24 Jun 2022 05:26 pm
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