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चुनाव आते ही याद आने लगते है काका हाथरसी, जानिए सच्चाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी कविता को सदन में सुनाया

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हाथरस। काका हाथरसी की कविताएं जहां देश और विदेश में अपनी ख्याति प्राप्त कर चुकी है, वही वर्तमान में देश के प्रधानमंत्रनरेंद्र मोदी ने भी उनकी कविता को सदन में गाकर सुनाया है, यह वाक्य कई साल पहले का है, जब सदन में नरेंद्र मोदी ने काका की यह कविता की लाइने पढ़ी थी, जिन्हें सुनकर पूरा सदन हास्य से ओतप्रोत हो गया था। वही समय समय पर इनकी कविताएं सदन में तालिया बटोरती रही है।

काका संक्षिप्त जीवन परिचय

काका हाथरसी का जन्म और अवसान दिवस 18 सितम्बर को मनाया जाता है, काका हाथरसी एक ऐसी हस्ती थी जिन्होहोने अपनी हास्य कविताओं के माध्यम से देश मे ही नही विदेश में हाथरस को एक पहचान दिलाई। इनका जन्म हाथरस के अग्रवाल परिवार में 18 सितम्बर 1906 को हुआ था, इनके जन्म के 15 दिन बाद ही बीमारी के चलते इनके पिता की मृत्यु हो गयी।काका की प्रथम कविता गुलदस्ता 1933 में प्रकाशित हुई थी। सन 1946 में काका की कचहरी नामक पहली पुस्तक प्रकाशित हुई। इनकी मृत्यु 18 सितम्बर 1955 को हुई, इनकी शव यात्रा ऊंट गाड़ी पर निकाली गयी।

चुनावी माहौल में काका हाथरसी रहते है खासी चर्चाओं में

चुनावों के आते ही काका हाथरसी की नेताओं, जनप्रतिनिधियों को सुध आना शुरू हो जाती है। लेकिन जैसे ही चुनाव निकलते है, तो सभी इन्हें फिर से भूल जाते है, यह हाल सभी चुनावों में रहता है। चुनाव आते ही इनकी कविताओं का भी पाठ मंचों से शुरू हो जाता है, इनके नाम पर वोट भी मांगना शुरू हो जाता है।

याद किए गए काका

काका हाथरसी को सोमवार को उनके शहर में उन्हें याद किया गया। शहर के मुस्र्सान गेट पर स्थित काका हाथरसी स्मृति दिवस पर कार्यक्रम हुआ। इस दारौन भाजपा सांसद राजेश दिवाकर ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में रविकांत भटनागर रिटायर्ड आईएएस भी मौजूद थे। डीएम अमित कुमार सिंह भी मौजूद थे। वहां पर सभी लोगों का कहना था कि काका के परिजन यहां नहीं आते जबकि उन्हें यहां पर आना चाहिए। इस दौरान बच्चों ने सांस्कृति प्रस्तुति दी।