
युवाओं में बढ़ रहा Appendix Cancer, डॉक्टर से जानिए कारण व बचाव (फोटो सोर्स : Freepik)
Appendix Cancer Spike Among Millennials & Gen X : हाल ही में एक हैरान करने वाली स्वास्थ्य खबर सामने आई है. अपेंडिक्स कैंसर, जिसे कभी बहुत दुर्लभ माना जाता था अब युवाओं में ज्यादा देखने को मिल रहा है. वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के एक नए अध्ययन के मुताबिक, 1985 से 1990 के बीच जन्मे लोगों में इसके मामले पहले से चार गुना ज्यादा हो गए हैं. वहीं, 1980 से 1985 के बीच जन्मे लोगों में इसका खतरा तीन गुना बढ़ गया है.
भले ही अपेंडिक्स कैंसर (Appendix Cancer) अभी भी बहुत आम नहीं है. यह हर साल प्रति दस लाख लोगों में से केवल एक या दो को प्रभावित करता है—लेकिन युवा वयस्कों में इसका बढ़ना एक गंभीर चिंता का विषय है. और ऐसा सिर्फ अपेंडिक्स कैंसर के साथ ही नहीं हो रहा है. कोलोरेक्टल (पेट और आंत), स्तन, गर्भाशय, अग्नाशय और किडनी जैसे दूसरे कैंसर भी कम उम्र के लोगों में बढ़ रहे हैं.
डॉ. जयेश शर्मा, कैंसर सर्जन ने बताया अपेंडिक्स कैंसर पेट के कैंसर में बहुत ही कम होता है. कुल पेट के कैंसरों में से सिर्फ 1% ही अपेंडिक्स में पाए जाते हैं. पर ऐसा देखने में आ रहा है कि आजकल इसकी संख्या थोड़ी बढ़ रही है. इसके कई कारण हैं.
लाइफस्टाइल: हमारी जीवनशैली में बदलाव एक बड़ा कारण है. आजकल लोग प्रोसेस्ड खाना ज़्यादा खा रहे हैं, धूम्रपान कर रहे हैं और मोटे भी हो रहे हैं. ये सारी चीज़ें हर तरह के कैंसर को बढ़ाती हैं, जिसमें अपेंडिक्स कैंसर भी शामिल है. तो, यह लाइफस्टाइल के कारण होने वाले कैंसरों में वैश्विक बढ़ोतरी का ही एक हिस्सा है.
भारत में प्रोसेस्ड फूड का बढ़ना: भारत में भी धीरे-धीरे प्रोसेस्ड खाने का चलन बढ़ रहा है. यह भी अपेंडिक्स कैंसर बढ़ने की एक वजह है, ठीक वैसे ही जैसे दूसरे कैंसर भी बढ़ रहे हैं.
इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका है:
संतुलित आहार लें.
अपना वज़न सही रखें.
और हर तरह के नशे से दूर रहें.
डॉ. जयेश शर्मा ने कहा अपेंडिक्स कैंसर का बच्चों और युवाओं में बढ़ने का एक कारण बचपन का मोटापा और प्रोसेस्ड खाने का ज़्यादा सेवन है.
बचपन का मोटापा: पहले बच्चों में मोटापा बहुत कम देखने को मिलता था, लेकिन आजकल यह बढ़ता जा रहा है.
प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता चलन: दूसरा बड़ा कारण है प्रोसेस्ड फूड का ज़्यादा सेवन. बच्चे आजकल ज़्यादा पैकेज्ड और प्रोसेस्ड खाना खा रहे हैं.
अभी भी अपेंडिक्स कैंसर एक दुर्लभ बीमारी है, यानी यह बहुत कम लोगों को होता है. लेकिन अगर यही ट्रेंड चलता रहा, तो आगे चलकर इसके मामले बढ़ सकते हैं.
इसका एक और कारण है पुरानी सूजन (क्रोनिक इन्फ्लेमेशन). अगर अपेंडिक्स में लंबे समय से कोई इंफेक्शन या सूजन हो, तो इससे इसका खतरा थोड़ा बढ़ जाता है. आजकल भारत में इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD), जैसे कि क्रोहन रोग, काफी आम होती जा रही हैं. ये बीमारियाँ भी अपेंडिक्स कैंसर के खतरे को थोड़ा बढ़ा सकती हैं.
तो, आखिर क्या वजह है? वैज्ञानिक अभी तक इसका सटीक कारण नहीं बता पाए हैं, लेकिन कुछ संभावित कारण जिन पर शोध किया जा रहा है, उनमें शामिल हैं:
हमारी बदली हुई लाइफस्टाइल और खान-पान: पिछले कुछ सालों में हमारी ज़िंदगी जीने का तरीका बहुत बदल गया है. अब हम ज़्यादा पैकेट वाला खाना खाते हैं, कम चलते-फिरते हैं, स्क्रीन पर ज़्यादा टाइम बिताते हैं और मोटे होने की दर भी बढ़ रही है. ये सब मिलकर सेहत पर असर डाल रहे हैं.
पर्यावरण में मौजूद ज़हरीले पदार्थ: हम पहले से कहीं ज़्यादा चीज़ों के संपर्क में आ रहे हैं—जैसे हमारे पानी में छोटे-छोटे प्लास्टिक के कण (माइक्रोप्लास्टिक्स), हमारे घर के सफ़ाई वाले सामानों में केमिकल और खाने में पेस्टिसाइड. हो सकता है कि ये पर्यावरण से मिलने वाले तत्व लंबे समय में हमारी सेहत को नुकसान पहुँचा रहे हों.
जेनेटिक कारण (आनुवंशिकता): कुछ लोगों को कैंसर होने का खतरा ज्यादा होता है क्योंकि उनमें लिंच सिंड्रोम या एफएपी (फेमिलियल एडेनोमेटस पॉलीपोसिस) जैसी कुछ वंशानुगत बीमारियाँ होती हैं. इनसे अपेंडिक्स और दूसरे तरह के कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है.
50 से पहले ही क्यों बढ़ रहा है Cancer
अपेंडिक्स कैंसर (Appendix Cancer) की दिक्कत ये है कि ये अक्सर चुपचाप बढ़ता रहता है किसी को पता भी नहीं चलता. ज्यादातर लोगों को तो ये पता ही नहीं चलता कि उन्हें अपेंडिक्स कैंसर है, जब तक कि वे ऑपरेशन थिएटर में न पहुंच जाएं. अक्सर डॉक्टर सोचते हैं कि ये सिर्फ अपेंडिसाइटिस (अपेंडिक्स में सूजन) का मामला है और उसे निकालने के लिए ऑपरेशन करते हैं, और तभी अचानक पता चलता है अरे, ये तो कैंसर निकला।
आपके पेट के निचले दाहिने हिस्से में (जहाँ आपका अपेंडिक्स होता है) हल्का दर्द या बेचैनी जो बनी रहती है और जाती नहीं.
पेट का फूलना जो लगातार बना रहे या अजीब सा लगे.
बिना किसी वजह के वज़न कम होना.
खाना खाते ही जल्दी पेट भर जाना, या बस पेट में एक अजीब सी, ठीक न लगने वाली फीलिंग.
शौचालय जाने की आदतों में बदलाव—कभी कब्ज़, कभी दस्त, या दोनों बारी-बारी से होना.
इनमें से कोई भी लक्षण चिल्लाकर नहीं कहता कि ये अपेंडिक्स कैंसर है और यही बात इसे इतना मुश्किल बनाती है. ये लक्षण अस्पष्ट होते हैं, इन्हें आसानी से तनाव, जंक फूड, का नतीजा मान लिया जाता है. लेकिन अगर कुछ अजीब सा लगे और वो बना रहे, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें.
भले ही आप हर चीज को कंट्रोल नहीं कर सकते पर कुछ ऐसी लाइफस्टाइल आदतें हैं जिन्हें अपनाकर आप शायद अपने खतरे को कम कर सकते हैं:
अपने शरीर को हिलाएं-डुलाएं : रोज़ाना कसरत करें. ज़रूरी नहीं कि बहुत ज़ोरदार कसरत हो बस एक्टिव रहें.
अच्छा खाना खाएं : जहां तक हो सके, साबुत और बिना प्रोसेस्ड खाना खाएं. जंक फूड और मीठे ड्रिंक्स से परहेज़ करें.
डॉक्टर के पास जाएं—भले ही आप ठीक महसूस कर रहे हों: रूटीन चेकअप से चीज़ों का जल्दी पता चल सकता है, इससे पहले कि कोई लक्षण दिखे.
पेट की सुनें : अगर कुछ अजीब सा लगे जैसे दर्द, पेट फूलना, या पाचन में बदलाव तो इसे हल्के में न लें. डॉक्टर से बात करें.
Updated on:
10 Jun 2025 06:04 pm
Published on:
10 Jun 2025 05:20 pm
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