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Health News: बुजुर्गों के लिए जानलेवा हो सकता है चेस्ट इन्फेक्शन…इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज, जानें बचाव के तरीके

Chest Infection symptoms: बुजुर्गों में चेस्ट इन्फेक्शन युवाओं के मुकाबले अलग संकेत देता है। जानें क्या हैं इसके लक्षण और कैसे जीवनशैली में बदलाव करके इससे बचा जा सकता है।

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भारत

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Mohsina Bano

Apr 12, 2026

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Chest Infection symptoms (Photo- Chat GPT)

Chest Infection in Elderly: बढ़ती उम्र के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी कमजोर होने लगती है। ऐसे में बुजुर्गों को संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। हाल के दिनों में बुजुर्गों में चेस्ट इन्फेक्शन (सीने में संक्रमण) के मामले तेजी से बढ़े हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बुजुर्गों में इस बीमारी के लक्षण युवाओं की तुलना में काफी अलग होते हैं, जिसके कारण अक्सर इसे पहचानने में देरी हो जाती है। समय पर इलाज न मिलने पर यह निमोनिया या मल्टी ऑर्गन फेलियर जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।

बुजुर्गों में दिखने वाले संकेत

चेस्ट इन्फेक्शन होने पर बुजुर्गों में कुछ खास लक्षण दिखाई देते हैं जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है:

मानसिक भ्रम या भटकाव: युवाओं में इन्फेक्शन होने पर बुखार आता है, लेकिन बुजुर्गों में अक्सर बुखार नहीं आता। इसके बजाय वे भ्रमित महसूस करने लगते हैं या उन्हें चीजें याद रखने में परेशानी होती है। शरीर में ऑक्सीजन की कमी दिमाग पर असर डालती है।

लगातार खांसी और बलगम: अगर खांसी एक हफ्ते से ज्यादा रहे और बलगम का रंग पीला, हरा या उसमें खून दिखाई दे, तो यह फेफड़ों में बैक्टीरिया फैलने का संकेत है।

सांस लेने में तकलीफ: थोड़ा चलने या सामान्य काम करने पर भी सांस फूलना तरल पदार्थ के जमा होने का लक्षण हो सकता है।

सीने में दर्द और भारीपन: गहरी सांस लेते समय या खांसते समय सीने में तेज दर्द होना फेफड़ों के ऊतकों में सूजन को दर्शाता है।

अत्यधिक थकान और कमजोरी: बिना किसी भारी काम के बहुत ज्यादा थकान महसूस होना और चलने में लड़खड़ाना ऑक्सीजन की कमी के कारण होता है।

भूख न लगना और निर्जलीकरण: खाने की इच्छा खत्म होना और शरीर में पानी की कमी होना भी संक्रमण का संकेत है।

क्यों बढ़ जाता है संक्रमण का खतरा?

बुजुर्गों में चेस्ट इन्फेक्शन के पीछे कई कारण होते हैं। सर्दी, जुकाम या फ्लू के वायरस जब कमजोर फेफड़ों तक पहुंचते हैं, तो वहां सूजन पैदा कर देते हैं। इसके अलावा जो बुजुर्ग पहले से ही डायबिटीज, हार्ट की बीमारी या अस्थमा (COPD) से जूझ रहे हैं, उनमें यह संक्रमण बहुत जल्दी फैलता है। बाहरी वातावरण की धूल और प्रदूषण भी फेफड़ों की कार्यक्षमता को प्रभावित करते हैं।

बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय

फेफड़ों को स्वस्थ रखने और संक्रमण से बचने के लिए विशेषज्ञों ने कुछ सुझाव दिए हैं:

  • टीकाकरण करवाएं: बुजुर्गों को डॉक्टर की सलाह पर इन्फ्लुएंजा और निमोनिया से बचाव के टीके लगवाने चाहिए।
  • स्वच्छता का ध्यान: हाथों को नियमित रूप से साबुन से धोएं और साफ सफाई का ध्यान रखें ताकि वायरस न फैले।
  • धूम्रपान से दूरी: बीड़ी या सिगरेट फेफड़ों को सीधा नुकसान पहुंचाती है। इससे दूरी बनाना ही बेहतर है।
  • पौष्टिक आहार और पानी: शरीर की ताकत बढ़ाने के लिए फल, सब्जियां और प्रोटीन लें। दिन भर में कम से कम 7 से 8 गिलास पानी पिएं।
  • नियमित व्यायाम: घर के अंदर ही टहलें या हल्के सांस के व्यायाम करें जिससे फेफड़ों की क्षमता बनी रहे।
  • भीड़भाड़ से बचें: सर्दी के मौसम में बीमार लोगों के संपर्क में आने से बचें और बाहर जाते समय मास्क का प्रयोग करें।