
खसरे से प्रभावित बच्चे की प्रतीकात्मक छवि (photo- freepik)
Measles Cases in Bangladesh: बचपन में होने वाली बीमारियों में खसरा (Measles) को अक्सर लोग सामान्य संक्रमण समझ लेते हैं, लेकिन पड़ोसी देश बांग्लादेश में यही बीमारी अब गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुकी है। वहां खसरे के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और मौतों का आंकड़ा भी चिंता बढ़ा रहा है।
ढाका ट्रिब्यून में छपी रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश के स्वास्थ्य विभाग (DGHS) ने पुष्टि की है कि पिछले 24 घंटों में खसरे के संदिग्ध मामलों से 7 और बच्चों की मौत हुई है। इसके साथ ही इस प्रकोप में मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 601 हो गई है। इनमें 90 मौतें लैब में पुष्टि किए गए खसरे के मामलों से जुड़ी हैं, जबकि बाकी मौतें संदिग्ध मामलों में दर्ज की गई हैं।
स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, पिछले एक दिन में 1,200 से ज्यादा नए संदिग्ध मामले सामने आए हैं। वहीं, 55 नए मामलों में लैब जांच के जरिए खसरे की पुष्टि हुई है। मार्च के मध्य से अब तक बांग्लादेश में करीब 74 हजार से ज्यादा संदिग्ध मामले और 9 हजार से अधिक पुष्टि किए गए संक्रमण दर्ज किए जा चुके हैं। इतने बड़े पैमाने पर संक्रमण फैलने के कारण अस्पतालों पर भी दबाव बढ़ गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, 15 मार्च से अब तक 60 हजार से ज्यादा संदिग्ध मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। राहत की बात यह है कि इनमें से करीब 56 हजार बच्चे इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ अस्पतालों में इलाज बढ़ाने से मौतों की संख्या कम नहीं होगी। बीमारी को शुरुआती स्तर पर रोकना ज्यादा जरूरी है।
पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. एम. मुश्तुक हुसैन का मानना है कि खसरे के बढ़ते मामलों के पीछे सबसे बड़ी वजह टीकाकरण में आई कमी है। उनका कहना है कि कई बच्चे समय पर वैक्सीन नहीं लगवा पाए, जिससे संक्रमण तेजी से फैलने का मौका मिला। विशेषज्ञों ने घर-घर जाकर टीकाकरण अभियान चलाने की जरूरत पर भी जोर दिया है, ताकि कोई भी बच्चा वैक्सीन से वंचित न रहे।
मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) की रिपोर्ट के अनुसार खसरा एक वायरल संक्रमण है जो बहुत तेजी से फैलता है। इसके शुरुआती लक्षणों में बुखार, खांसी, नाक बहना, आंखों में लालिमा और शरीर पर लाल चकत्ते शामिल हैं। छोटे बच्चों, कुपोषित बच्चों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में यह बीमारी निमोनिया, डिहाइड्रेशन, दिमागी संक्रमण और यहां तक कि मौत का कारण भी बन सकती है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
4 Jun 2026, 1:07 PM IST
Published on:
4 Jun 2026, 1:07 PM IST
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