
रक्त परीक्षण ट्यूब की प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo- freepik)
Blood Test Sample: ब्लड टेस्ट के वक्त जब लैब टेक्नीशियन एक के बाद एक कई ट्यूब भरता है, तो लगता है कि इतना खून क्यों निकाला जा रहा है। असल में, आज की आधुनिक मशीनों को जांच के लिए सिर्फ कुछ बूंदों की ही जरूरत होती है, लेकिन पूरी ट्यूब भरने के पीछे वैज्ञानिक कारण हैं।
दरअसल, हर रंग-बिरंगी ट्यूब में पहले से खास केमिकल्स होते हैं। सटीक रिपोर्ट के लिए केमिकल और खून का सही अनुपात होना जरूरी है। इसके अलावा, एक ही ट्यूब से कई तरह की जांचें होती हैं। कई बार रिपोर्ट संदिग्ध होने पर लैब वाले इसी बचे हुए खून से दोबारा टेस्ट (Retest) करते हैं, ताकि आपको दोबारा सुई न चुभानी पड़े। यह निकाला गया खून शरीर का 1% भी नहीं होता, जिससे कोई कमजोरी नहीं आती।
बायोलॉजी इनसाइट्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ब्लड टेस्ट में लिया गया पूरा सैंपल सीधे मशीन में नहीं जाता। सबसे पहले खून को विशेष ट्यूब में जमा किया जाता है, फिर उसे प्रोसेस करके सीरम या प्लाज्मा अलग किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान सैंपल का केवल एक हिस्सा ही जांच के लिए इस्तेमाल होता है। यानी मशीन को भले ही कम मात्रा चाहिए हो, लेकिन पूरी प्रक्रिया को पर्याप्त सैंपल की जरूरत होती है।
कई लोग सोचते हैं कि एक ही ट्यूब से सारे टेस्ट हो जाने चाहिए। लेकिन ऐसा हमेशा संभव नहीं होता। Labcorp की लैब गाइडलाइंस के अनुसार, CBC, शुगर, थायरॉइड, लिवर फंक्शन और क्लॉटिंग प्रोफाइल जैसे टेस्ट के लिए अलग-अलग प्रकार की ट्यूब इस्तेमाल की जाती हैं। इन ट्यूबों में अलग रसायन (Additives) मौजूद होते हैं, जो सैंपल को सुरक्षित रखने और सही परिणाम देने में मदद करते हैं। यही वजह है कि एक ही बार में कई ट्यूब में खून लिया जाता है।
कभी-कभी रिपोर्ट में कोई असामान्य परिणाम आता है तो लैब उसी सैंपल से दोबारा जांच कर सकती है। अगर अतिरिक्त खून न लिया जाए, तो मरीज को फिर से बुलाकर नया सैंपल लेना पड़ सकता है। अतिरिक्त सैंपल रखने का उद्देश्य मरीज को बार-बार सुई लगाने से बचाना भी होता है।
अधिकांश सामान्य ब्लड टेस्ट में केवल कुछ मिलीलीटर खून लिया जाता है। तुलना करें तो एक स्वस्थ वयस्क के शरीर में लगभग 4.5 से 5.5 लीटर तक खून होता है। इसलिए सामान्य जांच के दौरान निकाली गई मात्रा शरीर के कुल रक्त का बहुत छोटा हिस्सा होती है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
09 Jun 2026 05:04 pm
Published on:
09 Jun 2026 05:04 pm
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