Brain Stroke Symptoms and Causes : अगर आपको शरीर के किसी भी हिस्से में कमजोरी महसूस होती है या बोलने में कुछ कठिनाई हो रही है या फिर सिर में अचानक तेज दर्द, देखने में दिक्कत है तो इन लक्षणों को भूलकर भी नजरअंदाज न करें। ये ब्रेन स्ट्रोक आने के शुरूआती संकेत हो सकते हैं।
Common Symptoms and Signs of Brain Stroke : ब्रेन स्ट्रोक एक गंभीर स्थिति है जिसमें मस्तिष्क को रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है। यह समस्या मुख्य रूप से रक्त के थक्के बनने या रक्त वाहिका के फटने के कारण होती है। भारत में प्रति एक लाख की जनसंख्या पर लगभग 105 से 152 लोगों को स्ट्रोक होने की संभावना रहती है।
जयपुर के वरिष्ठ न्यूरो फिजिशियन डॉ. आरके. सुरेका ने बताया कि चेहरे, बांह व पैरों में अचानक सुन्नपन या कमजोरी। खासतौर पर शरीर के एक हिस्से में कमजोरी आ जाना, अचानक भ्रम की मनोदशा, बोलने व समझने में कठिनाई, किसी अज्ञात कारण के बिना सिर में अचानक तेज दर्द, एक या दोनों आंखों से देख पाने में परेशानी एवं चलने-फिरने में अचानक दिक्कत, चक्कर आना, संतुलन या संयोजन खो देना। लक्षणों के गंभीर होने का इंतजार न करें। बल्कि मरीज को तुरन्त अस्पताल ले जाएं। समय पर उपचार मिलने से अपंगता को टाला जा सकता है।
विश्व स्ट्रोक संगठन (WSO) के अध्यक्ष, डॉ. जयराज पंडियन TOI से बातचीत में बताया कि भारत में स्ट्रोक के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। चिंताजनक तथ्य यह है कि कुल मामलों में से लगभग 25% मरीज 45 वर्ष से कम उम्र के होते हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि युवा भी इस गंभीर बीमारी के शिकार हो रहे हैं।
ब्रेन स्ट्रोक एक गंभीर चिकित्सा स्थिति है जिसमें मस्तिष्क को रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है। यह मुख्य रूप से इन कारणों से हो सकता है:
इस्केमिक स्ट्रोक- मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति करने वाली रक्त वाहिका में रुकावट के कारण होता है। यह सबसे आम प्रकार है।
थ्रोम्बोटिक स्ट्रोक- मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनी में खून का थक्का बनता है।
एम्बोलिक स्ट्रोक- शरीर में कहीं और रक्त का थक्का बनता है और मस्तिष्क तक जाता है।
हेमरेजिक स्ट्रोक- तब होता है जब मस्तिष्क में रक्त वाहिका फट जाती है, जिससे रक्तस्राव होता है। यह उच्च रक्तचाप जैसी स्थितियों के कारण हो सकता है।
- अचानक शरीर के किसी एक भाग में कमजोरी या सुन्नपन (विशेषकर चेहरे, हाथ या पैर में)
- बोलने या समझने में कठिनाई
- देखने में परेशानी या धुंधलापन
- तेज़ सिरदर्द, बिना किसी कारण
- संतुलन बनाने में दिक्कत या चक्कर आना
स्ट्रोक के 90% मामले रोके जा सकते हैं यदि सही समय पर आवश्यक सावधानियां बरती जाएं।
मुख्य कारण:
- उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर)
- मधुमेह (डायबिटीज)
- धूम्रपान और शराब का सेवन
- मोटापा और अस्वस्थ जीवनशैली
- अधिक तनाव और व्यायाम की कमी
बचाव के उपाय:
- नियमित रूप से ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की जांच करवाएं।
- संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं।
- धूम्रपान और शराब से बचें।
- नियमित व्यायाम करें और तनाव को नियंत्रित रखें।
डॉ. पंडियन के अनुसार, भारत में कई स्थानों पर स्ट्रोक रजिस्ट्रियों से यह पता चला है कि कोलकाता और उत्तर-पूर्वी राज्यों में स्ट्रोक के कारण ब्रेन हैमरेज की घटनाएं अधिक हैं, जिनका प्रतिशत क्रमशः 32% और 65% है।
पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के प्रो. धीरज खुराना बताते हैं कि गुजरात सहित कई राज्यों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को स्ट्रोक की पहचान और त्वरित उपचार के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
"हब एंड स्पोक मॉडल के तहत छोटे अस्पतालों को बड़े चिकित्सा संस्थानों से जोड़ा जा रहा है, जिससे मरीजों को 'गोल्डन ऑवर' के भीतर इलाज मिल सके। सही समय पर इलाज से रक्त के थक्के को घोला जा सकता है और मरीज को दीर्घकालिक अपंगता से बचाया जा सकता है।" - प्रो. खुराना
स्ट्रोक अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रही, बल्कि युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। जागरूकता बढ़ाकर, समय पर इलाज सुनिश्चित करके और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस घातक बीमारी से बचा जा सकता है।
डिसक्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी केवल जागरूकता के लिए है और यह किसी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी दवा या उपचार को अपनाने से पहले विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लें।