
Diseases By Pigeons (Image- gemini)
Diseases By Pigeons: अक्सर हम पुण्य कमाने के चक्कर में घर की बालकनी या खिड़की पर कबूतरों के लिए दाना-पानी रखते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये मासूम दिखने वाले पक्षी आपके घर में साइलेंट किलर की तरह बीमारियां फैला रहे हैं? कबूतरों की गंदगी और उनके पंखों से निकलने वाले महीन कण हवा में घुलकर आपके शरीर के अंदर पहुंच रहे हैं।
यह समस्या इतनी गंभीर है कि शहरों में रहने वाले लोग बिना किसी लत के फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। अगर आपके घर के आसपास भी कबूतरों का डेरा है, तो वक्त रहते संभलना जरूरी है।
आइए डॉक्टर योकेश अरुल(गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट) से जानते हैं कि कबूतरों से कौनसी बीमारियां हो सकती है? गर्मियों में ये ज्यादा क्यों होती है?
यह कबूतरों से होने वाली सबसे खतरनाक बीमारी है। इसमें फेफड़ों में सूजन (Inflammation) आ जाती है, जिससे ऑक्सीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से फेफड़ों में फाइब्रोसिस हो जाता है, जिससे फेफड़े पत्थर की तरह सख्त हो जाते हैं और मरीज को सांस लेने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर पर निर्भर होना पड़ सकता है।
इसे पैरट फीवर भी कहा जाता है। यह Chlamydia Psittaci नामक बैक्टीरिया से फैलता है। संक्रमित पक्षी के संपर्क में आने या उसकी सूखी बीट की धूल में सांस लेने से इंसान बीमार पड़ सकता है। इसमें तेज बुखार, सिरदर्द और निमोनिया जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
कबूतरों की गंदगी जहां जमा होती है, वहां Histoplasma नामक फंगस पनपने लगता है। सांस के जरिए इसके स्पोर्स शरीर में जाने से फ्लू जैसे लक्षण, सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए यह स्थिति काफी गंभीर हो सकती है।
कबूतर साल्मोनेला बैक्टीरिया के वाहक होते हैं। अगर घर की बालकनी या किचन की खिड़की के पास कबूतरों का डेरा है, तो उनकी बीट के जरिए यह बैक्टीरिया खाने या पानी तक पहुंच सकता है, जिससे गंभीर फूड पॉइजनिंग और डायरिया की समस्या हो सकती है।
ज्यादातर लोग खिड़की पर AC या कूलर लगाते हैं, जिनके ऊपर कबूतर अपना घोंसला बना लेते हैं। जब ये उपकरण चलते हैं, तो बाहरी यूनिट पर जमी बीट के बैक्टीरिया खींचकर घर के अंदर आ जाते हैं। बंद कमरे में यह हवा बार-बार फिल्टर होती है, जिससे घर के अंदर मौजूद बच्चों और बुजुर्गों में अस्थमा और निमोनिया का खतरा 50% तक बढ़ जाता है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
18 Apr 2026 09:30 am
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