
बच्चों में बढ़ रहा फैटी लिवर (Photo- freepik)
Fatty Liver: आज के समय में फैटी लिवर एक आम बीमारी हो गई है। यह डिजीज अब बच्चों और युवाओं में भी तेजी से फैल रहा है। इस मामले में कैलिफोर्निया स्थित हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड से प्रशिक्षित गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट ने बताया कि गलत खानपान, जंक फूड, मीठे पेय, और बैठकर रहने की आदत इसके सबसे बड़े कारण हैं।
NAFLD एक ऐसी स्थिति है जिसमें लिवर में फैट जमा हो जाती है, जबकि व्यक्ति शराब नहीं पीता या बहुत कम पीता है। इसे मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टिएटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) भी कहा जाता है। यह बीमारी अक्सर शुरुआती दौर में बिना लक्षण के होती है, इसलिए इसे साइलेंट डिजीज भी कहा जाता है।
अगर इसे समय रहते नहीं रोका गया तो यह नॉन-अल्कोहोलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (NASH) यानी मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोहेपेटाइटिस (MASH) में बदल सकता है। आगे चलकर यह लिवर फाइब्रोसिस, सिरोसिस और यहां तक कि लिवर कैंसर का कारण भी बन सकता है।
अधिकांश लोगों को NAFLD के शुरुआती चरण में कोई लक्षण नहीं होते। कभी-कभी टेस्ट के दौरान ही इसका पता चलता है। कुछ मामलों में ये संकेत दिख सकते हैं:
हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड से प्रशिक्षित गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट ने बताया कि बच्चों को ज्यादा मीठा खिलाना खतरनाक हो सकता है। पेस्ट्री, सॉफ्ट ड्रिंक और कुकीज जैसी चीजें शुगर से भरपूर होती हैं, जिसमें 50% ग्लूकोज और 50% फ्रक्टोज होता है। ग्लूकोज तो शरीर में ऊर्जा देता है, लेकिन ज्यादा फ्रक्टोज लिवर में फैट में बदल जाता है, जिससे फैटी लिवर हो सकता है। अगर इलाज न हो, तो सिरोसिस जैसी गंभीर स्थिति में लिवर ट्रांसप्लांट तक की जरूरत पड़ सकती है।
NAFLD से बचाव के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी है। आप संतुलित और पौष्टिक आहार लें, जिसमें साबुत अनाज, हरी सब्जियां, फल, लो-फैट डेयरी, हेल्दी ऑयल और प्रोटीन शामिल हों। ज्यादा शुगर और प्रोसेस्ड फूड से बचें। साथ ही नियमित रूप से व्यायाम करें। वजन को नियंत्रित रखें और जरूरत हो तो अतिरिक्त वजन घटाएं।
Published on:
14 Aug 2025 12:03 pm
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