
विराट कोहली (फाइल फोटो: insta @virat.kohli)
Hamstring Injury Symptoms: भारतीय क्रिकेट स्टार विराट कोहली अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाली वनडे सीरीज से बाहर हो गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें हैमस्ट्रिंग इंजरी हुई है। खेल की दुनिया में यह चोट काफी आम मानी जाती है, लेकिन कई बार यह खिलाड़ियों को लंबे समय तक मैदान से दूर भी कर सकती है।
हैमस्ट्रिंग जांघ के पीछे मौजूद तीन मांसपेशियों का समूह होता है, जो घुटने को मोड़ने और पैर को पीछे की ओर ले जाने में मदद करता है। जब ये मांसपेशियां अपनी क्षमता से ज्यादा खिंच जाती हैं या उन पर अचानक ज्यादा दबाव पड़ता है, तो उनमें खिंचाव या टूट-फूट हो सकती है। इसी स्थिति को हैमस्ट्रिंग इंजरी कहा जाता है। क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) और मेयो क्लिनिक के अनुसार, यह चोट खासतौर पर उन लोगों में ज्यादा देखी जाती है जो दौड़ने, कूदने या अचानक दिशा बदलने वाली गतिविधियां करते हैं।
यह चोट अक्सर अचानक होती है और इसके लक्षण तुरंत महसूस हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं:
गंभीर मामलों में सामान्य रूप से चलना भी मुश्किल हो सकता है
ग्रेड 1 (हल्की चोट)
मांसपेशियों में हल्का खिंचाव होता है। आमतौर पर कुछ दिनों से लेकर 2-3 सप्ताह में सुधार हो सकता है।
ग्रेड 2 (मध्यम चोट)
मांसपेशी का कुछ हिस्सा फट जाता है। ऐसे मामलों में रिकवरी में कई सप्ताह लग सकते हैं और फिजियोथेरेपी की जरूरत पड़ सकती है।
ग्रेड 3 (गंभीर चोट)
मांसपेशी पूरी तरह फट सकती है। इस स्थिति में ठीक होने में कई महीने लग सकते हैं और कुछ मरीजों को सर्जरी की भी जरूरत पड़ सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, जिन लोगों को पहले हैमस्ट्रिंग इंजरी हो चुकी है, उनमें दोबारा चोट लगने का खतरा अधिक रहता है। इसके अलावा मांसपेशियों की कमजोरी, पर्याप्त वार्म-अप न करना, अचानक बहुत ज्यादा एक्सरसाइज शुरू करना और बढ़ती उम्र भी जोखिम बढ़ा सकती है।
अगर हैमस्ट्रिंग इंजरी का सही इलाज और आराम न किया जाए, तो यह बार-बार हो सकती है। कुछ लोगों में लंबे समय तक दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी और लचीलेपन में कमी जैसी समस्याएं भी देखी जाती हैं। ऐसी चोट लगने पर जल्दबाजी में खेल या भारी शारीरिक गतिविधि शुरू नहीं करनी चाहिए। सही इलाज, पर्याप्त आराम और फिजियोथेरेपी से अधिकांश लोग पूरी तरह ठीक हो सकते हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
5 Jun 2026, 12:29 PM IST
Published on:
5 Jun 2026, 12:29 PM IST
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