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इन 6 आदतों को बदलकर रोक सकते हैं हार्ट अटैक, आज ही जान लीजिए

Heart attack can be prevented by changing these 6 habits : हार्ट अटैक पहले अधिक उम्र के लोगों से जुड़ी बीमारी थी लेकिन अब कम उम्र में भी हो रही है। आज के अंक में जानते हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है और इससे बचाव के लिए क्या कुछ किया जा सकता है।

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Heart attack can be prevented by changing these 6 habits

heart attack can be prevented by changing these 6 habits : हार्ट अटैक पहले अधिक उम्र के लोगों से जुड़ी बीमारी थी लेकिन अब कम उम्र में भी हो रही है। आज के अंक में जानते हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है और इससे बचाव के लिए क्या कुछ किया जा सकता है।

- शहरी युवाओं में हाइ बीपी की वजह है खराब दिनचर्या और तनाव।

- करोड़ लोगों की मृत्यु होती है दुनिया में हर वर्ष कार्डियो-वेस्कुलर डिजीज की वजह से।

- फिजिकली एक्टिव न होना भी एक वजह

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तनाव से रिश्ता

ज्यादा स्ट्रेस हार्ट अटैक (Heart attack ) को दो तरह से प्रभावित करता है। पहला, लगातार तनाव से शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाएं घट जाती हैं। इससे खून का प्रवाह भी प्रभावित होता है। दूसरा, लगातार स्ट्रेस से एड्रिनलिन व कॉर्टिसोल का बार-बार ज्यादा स्रावित होना ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल पर असर डालता है। दिल में पंप होने वाले खून व ऑक्सीजन की मात्रा प्रभावित होती है।

कम नींद व अटैक में संबंध
दो-चार दिन कम नींद से समस्या नहीं होती है लेकिन चिड़चिड़ापन आदि हो सकता है। दिनचर्या प्रभावित होती है लेकिन लंबे समय या अनिद्रा आदत में शामिल होने से ऐसी समस्या हो सकती है। कई शोधों में स्पष्ट हो चुका है कि नींद की कमी से शरीर में हार्मोन असंतुलित होने लगते हैं। मोटापा, डायबिटीज, हाइपरटेंशन और दिल की बीमारियां जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

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डाइट भी बड़ा कारण
बीमारियों का खाने से सीधा संबंध होता है। जैसे टीवी देखते हुए जंक फूड खाना ज्यादा नुकसान करता है। इस समय हम न चाहते हुए ज्यादा खा लेते हैं। बाहरी और बाजार में बिकने वाले फूड आइटम्स में रिफाइंड आटा, शुगर, नमक और प्रिजर्वेटिव्स जैसी चीजें ज्यादा होती हैं। इनसे सीधे हार्ट अटैक (Heart attack ) का खतरा बढ़ता है।

पारंपरिक भोजन से दूरी
फास्ट फूड के चलते हम भारतीय पारंपरिक भोजन से भी दूर होते जा रहे हैं। इनमें विटामिन डी, सूक्ष्म पोषक तत्वों की अधिक मात्रा होती है। एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। हरी सब्जियां, सूखे मेवे जैसे अखरोट, बादाम, मछली, अलसी के बीज और हरी सब्जियां आदि दवा की तरह बीमारियों से बचाते हैं।

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लंबे समय तक सिटिंग जॉब, ज्यादा समय तक सोफे पर बैठे रहना आदि भी दिल की सेहत के लिहाज से सही नहीं होता है। कई ऐेसे शोध बताते हैं कि 20-30 मिनट तक एक ही जगह बैठने से शरीर का मेटाबॉलिज्म घटने लगता है। इससे शरीर में पाचन क्रिया सुस्त पड़ जाती है और मोटापा और दूसरी क्रॉनिक बीमारियों का आशंका बढऩे लगती है। इसलिए हर आधे घंटे में एक बार थोड़ी दूर चहलकदमी करने के बारे में डॉक्टरी सलाह दी जाती है। कोशिश करें कि हर रोज 30-40 मिनट व्यायाम करें।

अचानक हैवी वर्कआउट

35 से 40 वर्ष में जिन्हें पहले हार्ट अटैक हो चुका या कार्डियोमायोपैथी यानी हार्ट की मसल्स की कमजोरी या फिर हार्ट अटैक होने के रिस्क फेक्टर जैसे ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, स्मोकिंग, मोटापा आदि हो। ऐसे लोगों में अचानक से हैवी एक्सरसाइज करने से ब्लड वेसल में कोलेस्ट्रॉल का थक्का अचानक फट सकता है और हार्ट अटैक हो सकता है। 35-40 वर्ष के बाद जिम का प्लान कर रहे हैं तो एक बार डॉक्टरी राय जरूर लें।

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कब जाएं डॉक्टर के पास
हार्ट अटैक अचानक से नहीं होता है। इसके कुछ लक्षण हैं जो पहले से ही संकेत देेने लगते हैं लेकिन हम उन लक्षणों की अनदेखी कर देते हैं या फिर उन संकेतों को समझ ही नहीं पाते हैं। जैसे सीने में भारीपन रहना या दर्द होना, गले, जबड़े, पेट या कमर के ऊपरी हिस्से में दर्द रहना, सीने में खिंचाव या जलन, किसी एक बांह या दोनों बांहों में दर्द, सांस फूलना आदि। ऐसा है तो बिल्कुल लापरवाही न करें।

आदतों में बदलाव करें
नमक और चीनी की मात्रा कम करें। तंबाकू या अल्कोहल लेते हैं तो तत्काल छोड़ दें। व्यायाम जरूर करें। हल्के व्यायाम से शुरू करें। अगर उम्र 30 वर्ष भी है तो वर्ष में एक बार रुटीन टेस्ट करवाएं। पहले से कोई बीमारी है जैसे ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या कोई दूसरी बीमारी तो उसको नियंत्रित रखें। अगर घर में हार्ट की फैमिली हिस्ट्री है तो एस्प्रिन साथ में रखें। वजन नियंत्रित रखें और तनाव से दूर रहें।

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डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।