
World Health Day
World Health Day: दिल की सेहत को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अब भी ज्यादातर लोग केवल “कोलेस्ट्रॉल” तक ही सीमित रहते हैं। ब्लड टेस्ट में लिपिड प्रोफाइल के जरिए लोग अपने कोलेस्ट्राल के स्तर को पता करते हैं और मोटे तौर पर उनके आधार पर दवाएं ले रहे होते हैं। लेकिन दिल की बीमारी का खतरा बढ़ रहा है। नए टेस्ट भी आ रहे हैं जो हार्ट अटैक से बहुत पहले ही वॉर्निंग दे सकें। अब कुछ नए और ज्यादा सटीक टेस्ट सामने आए हैं, जिन्हें एक्सपर्ट एडवांस लिपिड मार्कर के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं।
ApoA, ApoB और Lipoprotein(a) ये टेस्ट दिल के खतरे को बेहतर तरीके से पहचान सकते हैं। देश के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट और पद्म सम्मान से सम्मानित दिल्ली के फोर्टिस एस्कॉर्टस अस्पताल के निदेशक डॉ अशोक सेठ के अनुसार, “आज हार्ट डिजीज को समझने के लिए हमें पारंपरिक टेस्ट से आगे बढ़कर इन एडवांस मार्कर्स को देखना जरूरी हो गया है, क्योंकि ये छुपे हुए खतरे को उजागर करते हैं।”
Apolipoprotein A (ApoA) को “अच्छे कोलेस्ट्रॉल” यानी HDL से जोड़ा जाता है। यह धमनियों में जमा अतिरिक्त फैट को हटाकर लिवर तक पहुंचाने में मदद करता है। आसान शब्दों में, ApoA दिल की सफाई करने वाला प्रोटीन है। अगर इसका स्तर अच्छा है, तो यह दिल की सुरक्षा का संकेत माना जाता है। दूसरी ओर, Apolipoprotein B (ApoB) “खराब कणों” जैसे LDL और VLDL का प्रतिनिधित्व करता है। यह बताता है कि खून में कितने ऐसे कण मौजूद हैं जो धमनियों में जमा होकर ब्लॉकेज बना सकते हैं। डॉ. सेठ के मुताबिक, “सिर्फ LDL देखने से पूरी तस्वीर साफ नहीं होती, लेकिन ApoB असली जोखिम को दिखाता है, जितना ज्यादा ApoB, उतना ज्यादा हार्ट अटैक का खतरा।”
Lipoprotein(a), जिसे Lp(a) भी कहा जाता है, मुख्य रूप से जेनेटिक खतरे को बता सकता है। यानी इसका स्तर आपकी जीवनशैली से ज्यादा आपके जीन पर निर्भर करता है। अगर यह बढ़ा हुआ है, तो कम उम्र में भी हार्ट अटैक, स्ट्रोक या धमनियों के सख्त होने का खतरा बढ़ सकता है। खास बात यह है कि सामान्य लिपिड प्रोफाइल में यह टेस्ट शामिल नहीं होता, इसलिए जिन लोगों के परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास है, उन्हें यह जांच जरूर करानी चाहिए। डॉ. सेठ बताते हैं कि “Lp(a) उन लोगों में भी खतरा पकड़ सकता है जो बाहर से पूरी तरह फिट दिखते हैं।”
इन टेस्ट्स की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि दिल की बीमारी अक्सर चुपचाप बढ़ती है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और मोटापा ये तीन बड़े कारण भारत में तेजी से हार्ट डिजीज को बढ़ा रहे हैं, और कई बार लोगों को इसका पता भी नहीं चलता। ऐसे में ApoB, ApoA और Lp(a) जैसे टेस्ट एक तरह से “अर्ली वार्निंग सिस्टम” का काम करते हैं, जिससे समय रहते कदम उठाए जा सकते हैं।
लेकिन सिर्फ जांच ही काफी नहीं है, सही समय पर सही कदम उठाना भी उतना ही जरूरी है। उदाहरण के लिए, कार्डिएक अरेस्ट एक ऐसी स्थिति है जिसमें दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है। नाचते गाते गिर जाना, जिम में एक्सरसाइज़ करते करते बेहोश होकर गिर पड़ना ये आमतौर पर कार्डिएक अरेस्ट में देखा गया है। इस दौरान पहले 3 से 5 मिनट बेहद अहम होते हैं, जिन्हें “गोल्डन मिनट्स” कहा जाता है। अगर इस समय CPR या डिफिब्रिलेटर का इस्तेमाल किया जाए, तो जान बचाई जा सकती है। सीपीआर में हाथों से छाती पर दबाव बनाकर दिल की पंपिग शुरु की जा सकती है। हालांकि इसे सीखने की ज़रुरत होती है।
हार्ट अटैक का शक होने पर देरी करना सबसे बड़ी गलती है। सीने में दर्द, पसीना, घबराहट या सांस फूलने जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए। प्राथमिक मदद के तौर पर एस्पिरिन चबाना मददगार हो सकता है, लेकिन यह इलाज का विकल्प नहीं है। डॉ. सेठ जोर देकर कहते हैं कि दिल की सेहत के लिए बड़े बदलाव नहीं, बल्कि छोटी-छोटी आदतें ज्यादा असरदार होती हैं।
दिल की बीमारी का खतरा कम करती हैं।
रोजाना 30 मिनट तेज चलने से दिल की बीमारी का खतरा 25% तक कम किया जा सकता है। दिन भर के खाने में 3 ग्राम नमक ही लें तो दिल की बीमारी के खतरे को 20% घटाया जा सकता है। तले-भुने खाने को कम करना, धूम्रपान से दूरी और तनाव को नियंत्रित रखना ये साधारण कदम हार्ट अटैक के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
Updated on:
07 Apr 2026 03:15 pm
Published on:
07 Apr 2026 11:04 am
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