
Hello Doctor (photo- patrika)
Hello Doctor: हेलो डॉक्टर के इस एपिसोड में डाइटिशियन डॉ. शिल्पी गोयल ने लोगों की वजन संबंधी इन चारों सवालों के जवाब बेहद विस्तार और वैज्ञानिक तरीके से दिए हैं। वीडियो के आधार पर, यहां उनके द्वारा बताई गई एक-एक बात विस्तार से लिखी गई है।
डॉ. शिल्पी का कहना है कि वजन कम करने के लिए खुद को भूखा रखना या ऐसी डाइट लेना जिससे कमजोरी आए, बिल्कुल गलत है। अगर डाइट से कमजोरी आ रही है, तो वह डाइट अच्छी नहीं है। उन्होंने बैलेंस्ड प्लेट फॉर्मूला (Thali Rule) समझाया है, जिससे बिना कमजोरी के वजन कम होगा:
प्लेट का 50% हिस्सा (सब्जी और सलाद): जब भी आप खाना खाएं, आपकी थाली का आधा हिस्सा (50%) कच्ची और पकी हुई सब्जियों, सलाद और फलों से भरा होना चाहिए। इससे पेट भरेगा और कैलोरी कम जाएगी।
प्लेट का 25% हिस्सा (प्रोटीन): थाली के एक चौथाई हिस्से में अच्छी क्वालिटी का प्रोटीन होना चाहिए। शाकाहारी हैं तो दालें, पनीर, सोया, मशरूम लें। मांसाहारी हैं तो अंडा, चिकन या फिश लें।
प्लेट का 25% हिस्सा (साबुत अनाज): बाकी बचे एक चौथाई हिस्से में ही अनाज (रोटी, चावल, मिलेट्स) रखना चाहिए।
अक्सर लोग इंटरनेट, जिम ट्रेनर या पड़ोसियों की डाइट कॉपी करते हैं, जो गलत है। हर किसी का शरीर अलग है। मीठा और तला-भुना खाने की आदत को धीरे-धीरे 'हेल्दी विकल्पों' से बदलें, एकदम से खाना न छोड़ें, वरना क्रेविंग होगी और आप डाइट छोड़ देंगे।
डॉक्टर ने बताया कि दिन भर थकान, गैस, एसिडिटी और काम में मन न लगना शरीर के शुरुआती सिग्नल हैं कि आपका खानपान गलत है।डॉ. शिल्पी ने कहा कि अगर आपकी सुबह भागदौड़ वाली है, तो आपको अपनी डाइट पहले से प्लान करनी होगी। नाश्ता छोड़ना सबसे बड़ी गलती है।
क्विक ब्रेकफास्ट ऑप्शंस: अगर समय नहीं है, तो आप सत्तू का ड्रिंक (Sattu Drink), कोई शेक या स्मूदी पीकर निकल सकते हैं। एक कप दूध या एक अंडा भी आपको सुबह काम करने की एनर्जी दे देगा। आप अपने साथ डब्बे में कुछ हेल्दी स्नैक्स कैरी करें।
क्वालिटी बनाम क्वांटिटी: उन्होंने कहा, "क्वांटिटी ईटिंग (ज्यादा खाना) जरूरी नहीं है, क्वालिटी ईटिंग (पोषण वाला खाना) जरूरी है।" बाहर का कचोरी-समोसा खाने से शरीर की एनर्जी एकदम से गिरती है (Energy Dip), इसलिए घर का बना छोटा मील भी बेहतर है।
शुगर के मरीजों के लिए डॉ. शिल्पी ने बहुत स्पष्ट गाइडलाइन दी है:
इन चीजों से पूरा परहेज (Strictly Avoid): गुड़, शक्कर, शहद, मिश्री, खांड। इन सबमें बराबर शुगर होती है, इन्हें पूरी तरह बंद करना होगा।
अदृश्य चीनी (Invisible Sugar) से बचें: गेहूं, चावल, मैदा, सूजी, ब्रेड, बिस्किट और नमकीन में 'छिपी हुई शुगर' होती है। डॉक्टर ने बताया कि "एक रोटी खाने से शरीर में लगभग 3 चम्मच चीनी के बराबर शुगर रिलीज होती है।" इसलिए अनाज की मात्रा कम करें।
फल (Fruits): शुगर के मरीजों को फल बंद नहीं करने चाहिए, क्योंकि इनसे फाइबर और विटामिन्स मिलते हैं। आम, केला, चीकू, सीताफल, लीची और अंगूर। (इनमें बाकी फलों से 4 गुना ज्यादा चीनी होती है) इसे कम खाएं। इनके अलावा बाकी सभी फल 100 से 150 ग्राम रोज खा सकते हैं।
सब्जियां: जमीन के नीचे उगने वाली सब्जियां जैसे आलू, शकरकंद, अरबी, मूली, गाजर, बीटरूट (चुकंदर) कम खाएं। हरी पत्तेदार सब्जियां (मेथी, पालक), फूलगोभी, ग्वारफली, मुनगा आदि का सेवन कर सकते हैं। ये शुगर कंट्रोल करने में मदद करती हैं।
जिम जाने वालों के लिए डॉ. शिल्पी ने स्पष्ट किया कि सिंथेटिक प्रोटीन पाउडर की जरूरत नहीं होती है। कितना प्रोटीन चाहिए? आपको अपनी पूरी डाइट को प्रोटीन से भरने की जरूरत नहीं है। शरीर के हर किलो वजन पर 0.8 ग्राम प्रोटीन काफी है (जैसे 60 किलो के व्यक्ति को लगभग 50-60 ग्राम प्रोटीन चाहिए)। डॉक्टर ने विशेष रूप से कहा कि दालों से भी बेहतर शाकाहारी प्रोटीन सोयाबीन (Soya) और मशरूम में होता है। सभी तरह की दालें, दूध, दही, पनीर और हरी सब्जियां। सिर्फ प्रोटीन के पीछे न भागें। घर के बने खाने (दाल, पनीर, सोया) से ही यह जरूरत आसानी से पूरी हो जाती है और नेचुरल बॉडी बनती है।
Updated on:
03 Jan 2026 03:50 pm
Published on:
03 Jan 2026 03:49 pm
बड़ी खबरें
View Allस्वास्थ्य
ट्रेंडिंग
लाइफस्टाइल
