
Hepatitis : liver treatment with Ayurveda
Hepatitis : हमारी रोजमर्रा की भाषा में अक्सर हम 'दिल का टुकड़ा' या 'किडनी का टुकड़ा' नहीं, बल्कि 'जिगर का टुकड़ा' कहते हैं। यह बात सोचने लायक है कि क्यों हम जिगर को ही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानते हैं? आइए जानते हैं इसके पीछे का विज्ञान और भावनात्मक जुड़ाव।
जिगर , जिसे अंग्रेजी में लिवर कहते हैं, हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। यह अंग मेटाबॉलिज्म, एंजाइम उत्पादन और पाचन जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियों के लिए जिम्मेदार होता है। इसके बिना हमारे शरीर की कई क्रियाएं संभव नहीं हैं। इसलिए, इसे 'जिगर का टुकड़ा' कहकर हम अपने प्रियजन की महत्वपूर्णता और उसकी जरूरत को दर्शाते हैं
'जिगर का टुकड़ा' कहने का एक और कारण हेपेटाइटिस जैसे रोग हो सकते हैं जो जिगर को प्रभावित करते हैं। आयुर्वेद फेडरेशन ऑफ इंडिया के संस्थापक डॉ. अभिषेक गुप्ता बताते हैं कि जब किसी बीमारी के अंत में 'आइटिस' आता है, तो वह सूजन या संक्रमण का संकेत होता है, जैसे नेफ्रैटिस, ऑस्टियोआर्थराइटिस आदि। इसी प्रकार, हेपेटाइटिस भी एक सूजन और संक्रमण से जुड़ी समस्या है जिसमें जिगर प्रभावित होता है।
हेपेटाइटिस वायरस के पांच मुख्य प्रकार हैं: ए, बी, सी, डी और ई। यह सभी प्रकार लिवर से संबंधित रोगों का कारण बनते हैं, लेकिन प्रत्येक का संक्रमण और प्रभाव अलग-अलग होता है।
हेपेटाइटिस ए Hepatitis A : बच्चों में अधिक फैलता है और संक्रमित पानी या खाने से फैलता है।
हेपेटाइटिस बी और सी Hepatitis B and C: बॉडी फ्लूइड के माध्यम से फैलते हैं और लिवर सिरोसिस, लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
हेपेटाइटिस डी Hepatitis D: केवल हेपेटाइटिस बी से संक्रमित लोगों में होता है।
हेपेटाइटिस ई Hepatitis E : वयस्कों में होता है और संक्रमित पानी या खाने से फैलता है।
हेपेटाइटिस से बचाव Prevention of Hepatitis : टीकाकरण और आयुर्वेदिक उपचार
हेपेटाइटिस से बचने का सबसे प्रभावी तरीका टीकाकरण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इसे मान्यता देता है। इसके अलावा, आयुर्वेद में भी जिगर के स्वास्थ्य के लिए कई प्रभावी उपचार मौजूद हैं। डॉ. अभिषेक गुप्ता बताते हैं कि पंचकर्म एक विशेष उपचार प्रक्रिया है जिसके माध्यम से शरीर में मौजूद दूषित चीजों को बाहर निकाला जाता है, जिससे शरीर का कायाकल्प होता है।
आजकल टैटू का क्रेज बढ़ रहा है, लेकिन यह भी लिवर के लिए खतरनाक हो सकता है। टैटू बनवाते समय यदि नीडल स्टरलाइज्ड न हो तो संक्रमित खून के माध्यम से हेपेटाइटिस का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए, टैटू बनवाने से पहले इस बात का ध्यान रखें कि यह किसी लाइसेंस प्राप्त जगह से ही बनवाएं जहां स्वच्छता का पूरा ध्यान रखा जाता हो।
Published on:
29 Jul 2024 01:01 pm
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