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शरीर की छोटी सी गांठ बनी जानलेवा, 19 साल की इन्फ्लुएंसर की मौत, जानिए इस Rare Cancer के 3 संकेत

Rare Cancer Symptoms: 19 साल की इन्फ्लुएंसर की कैंसर से मौत ने सभी को झकझोर दिया। जानिए रैबडोमायोसारकोमा क्या है, इसके शुरुआती लक्षण और बचाव के जरूरी तरीके।

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भारत

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Dimple Yadav

Apr 25, 2026

Rare Cancer Symptoms

Rare Cancer Symptoms (Photo- chatgtp)

Rare Cancer Symptoms: सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर जेड कॉप्स (Jade Kops) की इस दुर्लभ बीमारी से मौत हो गई, लेकिन उनकी 5 साल की लंबी जंग ने दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। महज 14 साल की उम्र में जेड एक दुर्लभ कैंसर 'रैबडोमायोसारकोमा' (Rhabdomyosarcoma) का शिकार हुईं। यह कहानी सिर्फ एक भावुक अंत नहीं है, बल्कि उन माता-पिता और युवाओं के लिए एक बड़ा 'हेल्थ अलर्ट' है जो शरीर की छोटी गांठों या दर्द को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

क्या है 'रैबडोमायोसारकोमा'? मेडिकल साइंस का नजरिया

मेडिकल रिसर्च के अनुसार, रैबडोमायोसारकोमा एक दुर्लभ प्रकार का सॉफ्ट टिश्यू सार्कोमा (Soft Tissue Sarcoma) है। यह कैंसर शरीर की उन मांसपेशियों (Muscles) में पनपता है जो हड्डियों से जुड़ी होती हैं। American Cancer Society की रिपोर्ट बताती है कि यह कैंसर बच्चों और किशोरों में अधिक देखा जाता है। इसकी सबसे खतरनाक बात यह है कि यह शरीर के किसी भी हिस्से (जैसे गर्दन, मूत्राशय या हाथ-पैर) में शुरू हो सकता है और बहुत तेजी से फैलता है।

यह कैंसर क्यों है खतरनाक?

रैबडोमायोसारकोमा एक ऐसा कैंसर है, जिसे शुरुआती स्टेज में पहचानना मुश्किल होता है। इसके लक्षण जैसे हल्का दर्द, सूजन या थकान अक्सर सामान्य लगते हैं, इसलिए लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही आगे चलकर जानलेवा बन सकती है।

इन 'साइलेंट' लक्षणों को बिल्कुल न करें इग्नोर:

रिसर्च और डॉक्टर्स के मुताबिक, ये संकेत खतरे की घंटी हो सकते हैं:

  • बिना दर्द वाली गांठ: शरीर के किसी भी हिस्से में अचानक सूजन या गांठ का उभरना।
  • आंखों में बदलाव: अगर आंखें बाहर की ओर निकली हुई लगें या पलकें झुक जाएं।
  • यूरिन में दिक्कत: पेशाब में खून आना या पेट में लगातार दर्द रहना।
  • अकारण कमजोरी: बिना किसी मेहनत के लगातार थकान और वजन का गिरना।

बीमारी के बीच भी दूसरों के लिए उम्मीद बनीं

जेड ने अपनी बीमारी के दौरान करीब €2 मिलियन (लगभग 18 करोड़ रुपये) कैंसर रिसर्च के लिए जुटाए। उन्होंने बच्चों के कैंसर पर काम करने वाले संगठनों की मदद की और एक फाउंडेशन भी शुरू किया, जो ऐसे परिवारों को सपोर्ट करता है।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।