
कम सोने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है और आप जल्दी बीमार होने लगते हैं- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Late Night Garba Side Effect: क्या आप भी उन लोगों में से हैं गरबा नाइट्स में देर रात तक जागने और नाचने के शौकीन हैं या जो रात के बारह-एक बजे तक फोन स्क्रॉल करते रहते हैं या नाइट शिफ्ट के चक्कर में बमुश्किल 4-5 घंटे ही सो पाते हैं? अगर हां, तो यह आदत आपकी सेहत की गाड़ी को धीरे-धीरे पटरी से उतार रही है। यह आपकी सेहत पर गहरा असर छोड़ता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद से समझौता करना जैसे एक आम बात बन गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह अनदेखी आपको बड़ी परेशानी में भी डाल सकती है। इस पर बहुत सारे लोगों का ये कहना होता है कौनसा हम रोज-रोज ऐसा करते हैं और साल में एक बार त्योंहार आता है इस पर भी मौज ना कि तो फिर क्या ही फायदा। लेकिन बात त्योंहार की नहीं आपकी सेहत की है, आइए जानते हैं कि देर रात जागने का शरीर पर क्या असर पड़ता है?
National Heart, Lung, and Blood Home ( राष्ट्रीय हृदय, फेफड़े और रक्त संस्थान) के मुताबिक, जब आप रात को सुकून से सो नहीं पाते, तो सिर्फ आपकी आंखें ही नहीं बल्कि आपका पूरा शरीर थक जाता है। नींद हमारे शरीर की रिपेयरिंग विंडो होती है। कम सोने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी धड़ाम से नीचे आ जाती है। आप छोटी-मोटी बीमारियों और संक्रमण की चपेट में जल्दी आने लगते हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) की रिपोर्ट्स साफ कहती हैं कि लगातार नींद पूरी न होने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है और दिल की बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। जब आप जागते रहते हैं, तो शरीर में हॉर्मोनल असंतुलन पैदा होता है। इससे भूख बढ़ाने वाले हॉर्मोन्स तेज हो जाते हैं, जिससे वजन बढ़ने लगता है और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा मंडराने लगता है।
स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, वयस्कों को प्रति रात कम से कम 7 घंटे की नींद लेनी चाहिए। लगातार 6 घंटे से कम नींद लेने से सेहत पर काफी उल्टा असर पड़ना शुरू हो जाता है। कई लोगों की शिकायत होती है कि वे रात को सोते तो हैं, लेकिन ठीक 6 घंटे बाद उनकी नींद अपने आप खुल जाती है और फिर दोबारा नींद नहीं आती। इसके पीछे कोर्टिसोल (स्ट्रेस हॉर्मोन) का असंतुलन या तनाव मुख्य वजह हो सकती है। जब आपका दिमाग किसी बात को लेकर लगातार फिक्रमंद रहता है, तो शरीर गहरी नींद के चक्र (Deep Sleep Cycle) को पूरा किए बिना ही एक्टिव मोड में आ जाता है। हर इंसान के शरीर की जरूरत अलग होती है। अगर आप शारीरिक रूप से बहुत मेहनत करते हैं या किसी बीमारी से उबर रहे हैं, तो 8 से 9 घंटे की नींद बिल्कुल सामान्य है। लेकिन अगर आप पर्याप्त सोने के बाद भी दिनभर थका हुआ महसूस करते हैं, तो यह अंदरूनी कमजोरी या किसी छिपी हुई स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है।
रात की शिफ्ट करने वाले अक्सर यह सवाल पूछते हैं कि क्या दिन में 4 घंटे की नींद से काम चल जाएगा? सीधा जवाब है बिल्कुल नहीं! मानव शरीर की प्राकृतिक घड़ी (बायोलॉजिकल क्लॉक) रात के समय ही गहरी और गुणवत्तापूर्ण नींद के लिए बनी है। दिन में सोना और रात में जागना इस चक्र को पूरी तरह बिगाड़ देता है। नतीजा यह होता है कि आप हमेशा चिड़चिड़ेपन, मानसिक थकान और फोकस की कमी से जूझते रहते हैं।
नींद कोई ऐशो-आराम की चीज नहीं है, यह जीवित रहने और स्वस्थ रहने की बुनियादी शर्त है। आज की रात बिस्तर पर जाने से पहले खुद से यह सवाल जरूर पूछिए क्या कुछ घंटों के सोशल मीडिया स्क्रॉल के लिए अपनी सेहत का सौदा करना वाकई समझदारी है? संभलिए और अपनी नींद से समझौता करना बंद कीजिए।
Published on:
17 Oct 2026 11:02 am
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