
Black Fungus: कोरोना संक्रमण के मामलों में वृद्धि के साथ ही एक ब्लैक फंगस (म्यूकॉरमायकोसिस) ने भी अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया है। ब्लैक फंगस के के मामलों को देखते हुए बहुत से राज्यों ने इसे महामारी घोषित कर दिया है। यह बिमारी इतनी खतरनाक है की समय से इलाज न मिलने पर आँखे तक खराब हो सकती है। यदि ब्लैक फंगस ब्रेन तक पहुँच गई तो व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। मरीज की कमजोर इम्युनिटी और अधिक स्टेरॉयड के इस्तेमाल को इसका जिम्मेदार माना जा रहा है। भारत में ब्लैक फंगस जिस तरह से बेकाबू हो रहा है उस तरह किसी अन्य देश में नहीं देखा जा रहा है। देशभर में अब तक ब्लैक फंगस के कुल 11 हजार से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। डाइबिटीज के मरीजों में यह बिमारी ज्यादा देखने को मिल रही है।
ब्लैक फंगस नहीं हैं छूत की बीमारी- एम्स डायरेक्टर
एम्स डायरेक्टर डॉ रणदीप गुलेरिया के अनुसार ब्लैक फंगस छूत की बीमारी नहीं है। यह रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है। अगर डायबिटीज है और स्टोरॉयड ली है तो ऐसे में 95 प्रतिशत केसेसे में म्यूकर पाया जाता है। इसलिए ब्लड शुगर के मरीजों को साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना है।
ब्लैक फंगस का खतरा
मधुमेह के मरीजों में ब्लैक और व्हाइट फंगस का खतरा अधिक है। ब्लैक फंगस कोई संक्रामक रोग नहीं है। लेकिन व्हाइट फंगस की तुलना में बेहद खतरनाक भी है। जिन व्यक्तियों की इम्युनिटी कमजोर होती है, उन्हें इस बिमारी का ज्यादा खतरा है। मस्तिष्क और फेफड़ों में संक्रमण होने पर मरीज की मौत भी हो सकती है।
ब्लैक फंगस के लक्षण
प्राथमिक लक्षण के तौर पर इसकी पहचान की जा सकती है। जिसमें चेहरे में दर्द, आंख की पलक में सूजन और कम दिखने पर तत्काल डॉक्टर से परामर्श लेवें। स्वास्थ्य मंत्रालय ने ब्लैक फंगस के मरीजों को इलाज के लिए दवाइयां और दो सुई लगाने की सलाह दी है। वहीं, ICMR ने मधुमेह से पीड़ित कोरोना मरीजों को स्टेरॉयड नहीं लेने की सलाह दी है।
Web Title: Mucormycosis or Black Fungus is not a communicable disease
Published on:
28 May 2021 11:10 am
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